केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में विनायक दामोदर सावरकर को एक सच्चे देशभक्त और वैज्ञानिक सोच वाले व्यक्तित्व के रूप में याद किया है। उन्होंने कहा कि सावरकर ने जिस तरह हिंदुत्व के मूल सिद्धांतों और विचारों को समझाया और पेश किया, वह आज भी समाज के लिए महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने वीर स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक विनायक दामोदर सावरकर को एक निष्ठावान देशभक्त और वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले व्यक्तित्व के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि सावरकर का जीवन त्याग, तपस्या और देशभक्ति का प्रतीक है और उनका योगदान आज भी समाज और राष्ट्र के लिए प्रासंगिक है।
गडकरी ने यह बातें एक कार्यक्रम में कहीं, जहां सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज पांडे (रिटायर्ड) का सम्मान किया गया। इस अवसर पर गडकरी ने सावरकर के जीवन और उनके विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सावरकर सिर्फ देशभक्त नहीं थे, बल्कि बेहतरीन कवि, विचारक और इतिहासकार भी थे। उन्होंने समाज सुधार की दिशा में जो कदम उठाए, वह आज भी अनुकरणीय हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और हिंदुत्व की प्रासंगिकता
गडकरी ने कहा, "सावरकर की सोच वैज्ञानिक थी। उन्होंने हिंदुत्व को जिस तरह से समझाया, वह आज के समय में भी अत्यंत उपयोगी और प्रासंगिक है।" उन्होंने बताया कि सावरकर का मानना था कि हिंदू समाज में जाति-भेद और छुआछूत को पूरी तरह समाप्त करना चाहिए। उनका उद्देश्य समाज में समानता और न्याय स्थापित करना था।
साथ ही गडकरी ने बताया कि सावरकर का जीवन गुणों पर आधारित श्रेष्ठता का प्रतीक है। उनका मानना था कि किसी भी व्यक्ति को उसकी जाति के कारण श्रेष्ठ नहीं माना जा सकता; बल्कि व्यक्ति अपने गुणों और कृतियों के आधार पर श्रेष्ठ होता है।

सावरकर को लेकर राजनीतिक टिप्पणी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सावरकर और उनके परिवार ने देश के लिए अपार बलिदान दिया। "देश के लिए सावरकर के परिवार जितना बलिदान किसी अन्य परिवार ने नहीं दिया," गडकरी ने कहा। उन्होंने यह भी कहा कि सावरकर का जीवन देशभक्ति और समर्पण की मिसाल है। सावरकर ने अंग्रेजों के शासन के दौरान अपने कार्यों और लेखन के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। गडकरी ने कहा कि उनकी लेखनी और विचार आज भी देशभक्ति और सामाजिक सुधार के मार्गदर्शक हैं।
नितिन गडकरी ने अप्रत्यक्ष रूप से एक "बड़े राजनीतिक नेता" की आलोचना का जवाब भी दिया। उन्होंने कहा कि जब कुछ लोग सावरकर की आलोचना करते हैं, तो यह समझना चाहिए कि देश के लिए सावरकर और उनके परिवार का बलिदान अतुलनीय है। गडकरी के इस बयान की पृष्ठभूमि में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों का जिक्र किया जा सकता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सावरकर ने अंग्रेजों से माफी मांगकर जेल से छूटने की कोशिश की थी। इन बयानों के बाद सावरकर के परपोते ने पुणे की अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
गडकरी ने कहा कि विचारधारा पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन देशभक्ति और बलिदान की मान्यता हमेशा सम्मानित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सावरकर के लेखन और उन पर बनी फिल्म को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना चाहिए ताकि नई पीढ़ी उनके जीवन और योगदान से प्रेरणा ले सके।










