चीन ने भारत को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि दोस्त और साझेदार बताया। विदेश मंत्री वांग यी ने सीमा विवादों और मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सहयोग, भरोसा और ब्रिक्स समर्थन पर जोर देते हुए साझा विकास का संदेश दिया।
World News: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच चीन ने भारत के साथ संबंधों को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए और खतरे की बजाय अवसर को महत्व देना चाहिए। बीजिंग में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वांग यी ने भारत-चीन संबंधों पर विस्तार से बात की और वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक रिश्तों पर जोर दिया।
भारत और चीन: मजबूत पड़ोसी
वांग यी ने कहा कि भारत और चीन महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं और दोनों ही ग्लोबल साउथ के हिस्से हैं। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध हैं और साझा हित भी व्यापक हैं।
वांग यी ने यह भी कहा कि भारत और चीन को अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को समझते हुए अच्छे पड़ोसी का कर्तव्य निभाना चाहिए और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि टकराव और विभाजन दोनों देशों और पूरे एशिया के विकास में बाधक हैं, इसलिए दोनों देशों को आपसी विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
वांग यी के चार मुख्य सुझाव
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत-चीन संबंध सुधार को लेकर चार महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार और खतरे की बजाय अवसर के रूप में देखना चाहिए। इसके अलावा, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखना और अच्छे पड़ोसी के रूप में व्यवहार करना आवश्यक है।

उन्होंने ब्रिक्स के तहत दोनों देशों के बीच सहयोग पर भी जोर दिया और कहा कि भारत और चीन को इस साल और अगले साल ब्रिक्स की बारी-बारी से अध्यक्षता में एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए। चौथा बिंदु यह है कि दोनों देशों को आपसी कदम बढ़ाते हुए बाधाओं को दूर करना चाहिए ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत और जिम्मेदार भूमिका निभाई जा सके।
आपसी सहयोग से साझा विकास संभव
वांग यी ने कहा कि भारत और चीन के बीच आपसी विश्वास और सहयोग साझा विकास के लिए बहुत फायदेमंद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुश्मनी और टकराव से केवल क्षेत्रीय तनाव बढ़ेगा और एशिया के पुनरुत्थान में बाधा आएगी। इसलिए अब दोनों देशों को आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को दुश्मन नहीं बल्कि दोस्त के रूप में देखना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी चिनपिंग की मुलाकात का जिक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वांग यी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनपिंग की हाल ही में तियानजिन में हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मुलाकात ने दोनों देशों के बीच संवाद और विश्वास को बढ़ाने में मदद की है। उन्होंने यह संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक बातचीत और सहयोग जारी रहेगा और वैश्विक चुनौतियों के सामने साझेदारी को मजबूत किया जाएगा।












