हिंद महासागर में श्रीलंका के पास अमेरिकी नौसेना ने ईरानी वॉरशिप IRIS Dena पर हमला कर उसे डुबो दिया। हमले से पहले क्रू को जहाज छोड़ने की चेतावनी दी गई थी। घटना के बाद 32 नाविकों को श्रीलंकाई नौसेना ने बचाया।
Middle East: हिंद महासागर में 4 मार्च को एक बड़ा सैन्य घटनाक्रम सामने आया जब अमेरिकी नौसेना ने श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर हमला कर उसे डुबो दिया। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार हमला अमेरिकी सबमरीन द्वारा किया गया था। इससे पहले अमेरिकी सेना ने वॉरशिप के चालक दल को जहाज छोड़ने के लिए दो बार चेतावनी भी दी थी।
यह घटना उस समय हुई जब ईरानी नौसेना का यह युद्धपोत हिंद महासागर के क्षेत्र में मौजूद था। हमले के बाद जहाज पूरी तरह डूब गया और कई नाविकों की जान जोखिम में पड़ गई। हालांकि कुछ नाविक समय रहते जहाज से निकलने में सफल रहे।
हमले से पहले अमेरिका ने दी थी दो बार चेतावनी
फारसी भाषा के सैटेलाइट टीवी चैनल और न्यूज नेटवर्क ईरान इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हमले से पहले अमेरिकी सेना ने IRIS Dena के क्रू को दो बार चेतावनी दी थी कि वे तुरंत जहाज छोड़ दें। रिपोर्ट के मुताबिक चेतावनी स्पष्ट थी कि यदि जहाज नहीं छोड़ा गया तो सैन्य कार्रवाई की जाएगी।

नाविक के परिवार के एक करीबी सूत्र ने बताया कि चेतावनी मिलने के बावजूद जहाज के कमांडर ने चालक दल को वॉरशिप छोड़ने की अनुमति नहीं दी। इस फैसले को लेकर कुछ क्रू मेंबर्स ने कमांडर से बहस भी की थी। उनका कहना था कि चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए और जहाज छोड़ देना चाहिए, लेकिन अंतिम निर्णय कमांडर का ही रहा।
इस फैसले का परिणाम बेहद गंभीर साबित हुआ क्योंकि कुछ ही समय बाद अमेरिकी सबमरीन ने हमला कर दिया और युद्धपोत डूब गया।
अंतिम समय में नाविक ने पिता को किया था फोन
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हमले से ठीक पहले जहाज पर मौजूद एक नाविक ने अपने पिता को फोन किया था। उस कॉल में उसने स्थिति की गंभीरता का जिक्र किया और बताया कि उन्हें जहाज छोड़ने की चेतावनी मिली है। यह बातचीत उस परिवार के लिए बेहद भावुक और डरावनी साबित हुई।
नाविक के पिता ने बाद में बताया कि जहाज पर मौजूद कई क्रू मेंबर्स स्थिति को लेकर चिंतित थे। कुछ लोग जहाज छोड़ना चाहते थे लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली। यह घटना उन परिवारों के लिए भी बेहद दर्दनाक बन गई जिनके प्रियजन उस युद्धपोत पर मौजूद थे।
32 नाविक किसी तरह बच पाए
हमले के बाद समुद्र में बड़ी संख्या में नाविक फंस गए थे। रिपोर्ट के अनुसार कुल 32 नाविक ऐसे थे जो चेतावनी मिलने के बाद लाइफबोट की मदद से जहाज से निकलने में सफल हो गए थे। यही वजह रही कि वे हमले से बच पाए।

ये सभी नाविक समुद्र में लाइफबोट पर तैरते हुए काफी देर तक मदद का इंतजार करते रहे। बाद में श्रीलंका की नौसेना ने उन्हें ढूंढकर सुरक्षित बचा लिया। श्रीलंकाई नौसेना ने इन नाविकों को समुद्र से निकालकर किनारे तक पहुंचाया और उन्हें सुरक्षा में रखा।
इस रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद यह घटना और भी चर्चा में आ गई क्योंकि इससे साफ हुआ कि चेतावनी के बावजूद जहाज नहीं छोड़ा गया था।
एक और ईरानी जहाज ने श्रीलंका में ली शरण
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ईरानी नौसेना का एक और जहाज IRIS Bushehr भी इलाके में मौजूद था। इस जहाज पर करीब 208 क्रू मेंबर सवार थे। हमले के बाद इस जहाज ने सुरक्षा के लिए श्रीलंका के पास एक द्वीपीय क्षेत्र में शरण ले ली।
बताया जा रहा है कि यह जहाज फिलहाल सुरक्षित है और उसके सभी क्रू मेंबर भी सुरक्षित हैं। हालांकि इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई है और कई देश इस पर नजर बनाए हुए हैं।
अमेरिकी दूतावास ने श्रीलंका से की विशेष मांग
इस घटना के बाद एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी विदेश विभाग के एक इंटरनल केबल में बताया गया है कि कोलंबो स्थित अमेरिकी दूतावास ने श्रीलंका सरकार से एक खास अनुरोध किया है।
कोलंबो में अमेरिकी दूतावास की चार्ज डी अफेयर्स जेन हॉवेल ने श्रीलंका से कहा है कि IRIS Dena के बचे हुए 32 नाविकों और IRIS Bushehr के 208 क्रू मेंबर को ईरान वापस न भेजा जाए। फिलहाल ये सभी लोग श्रीलंका की कस्टडी में हैं।











