मिडिल ईस्ट में इजरायल और ईरान का युद्ध 10वें दिन भी जारी है। अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के तेल भंडार और इंडस्ट्रियल क्षेत्रों पर हमले कर रहे हैं। खाड़ी देशों और वैश्विक तेल बाजार पर इसका असर गंभीर हो गया है।
Israel-US-Iran War: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष आज 10वें दिन भी जारी है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत से शुरू हुए इस युद्ध ने पूरे क्षेत्र को प्रभावित किया है। हिजबुल्लाह समेत कई देशों और संगठन अब इस जंग में शामिल हो गए हैं। संघर्ष का असर खाड़ी देशों, वैश्विक तेल बाजार और हिंद महासागर में स्थित समुद्री मार्गों तक दिखाई दे रहा है।
युद्ध की शुरुआत
यह युद्ध 28 फरवरी से शुरू हुआ, जब अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के दफ्तर पर हमला किया। इस हमले के बाद ईरानी मीडिया और अमेरिका ने खामेनेई की मौत की पुष्टि की। ईरान ने तुरंत बदला लेने की चेतावनी दी और अमेरिका और इजरायल को निशाना बनाने का एलान किया। इस हमले ने पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा दिया।

दूसरा दिन: हिजबुल्लाह का जंग में प्रवेश
ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के बाद लेबनान में आधारित ईरान समर्थित उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह ने भी युद्ध में भाग लिया। हिजबुल्लाह ने इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इसके जवाब में अमेरिका-इजरायल ने ओमान की खाड़ी के पास दक्षिणी ईरान में कोर्नाक नेवल बेस को निशाना बनाया, जिसमें ईरान के तीन जहाज डूब गए।
तीसरा दिन: इजरायल और ईरान का सीधा मुकाबला
तीसरे दिन इजरायल ने लेबनान और ईरान पर सीधे हमले शुरू कर दिए। वहीं ईरान ने बहरीन में स्थित अमेरिकी एयरबेस पर हमला किया। इस हमले ने खाड़ी देशों में भी सुरक्षा की स्थिति को खतरनाक बना दिया।
चौथा दिन: ईरान का बदला
ईरान ने अमेरिकी और गठबंधन देशों से बदला लेने के लिए सात देशों के एयरबेस को निशाना बनाया। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन में स्थित डेटा सेंटर और क्लाउड फैसिलिटी को भी नुकसान पहुंचा। इससे खाड़ी देशों में डिजिटल और कंप्यूटिंग सेवाओं पर असर पड़ा।
पांचवां दिन: हिंद महासागर में अमेरिकी हमला

चुनौतीपूर्ण स्थिति में अमेरिकी नौसेना ने 4 मार्च को श्रीलंका के पास हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को डुबो दिया। इस जहाज पर करीब 130 लोग सवार थे, जिनमें से सिर्फ 32 क्रू मेंबर्स ही बच पाए। यह हमला मिडिल ईस्ट की जंग को हिंद महासागर तक फैलाने वाला पहला बड़ा समुद्री संघर्ष था।
छठा दिन: यूरोपीय देशों का शामिल होना
छठे दिन यूरोपीय देश भी युद्ध में शामिल होने लगे। अजरबैजान ने ईरान-अजरबैजान सीमा के पास हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन को निशाना बनाया, जिसमें दो लोग घायल हुए। इस हमले से क्षेत्रीय नागरिकों में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ गई।
सातवां दिन: ईरान का इजरायल पर हमला
सातवें दिन ईरान ने इजरायल पर सॉलिड फ्यूल मिसाइल से हमला किया। इन मिसाइलों की रफ्तार तेज थी और इन्हें रोकना मुश्किल साबित हुआ। इस हमले ने इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी और दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया।
आठवां दिन: इजरायल का जबरदस्त जवाब
आठवें दिन इजरायल ने ईरान के दो प्रमुख शहरों इस्फहान और तेहरान में लगातार धमाके किए। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि इजरायल ने एयरपोर्ट और तेल भंडारण की जगहों पर भी हमला किया। इस हमले के बाद ईरान के नागरिक और व्यापार प्रभावित हुए।

नौवां दिन: ईरान का नया सुप्रीम लीडर
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के नौवें दिन ईरान ने नए सुप्रीम लीडर का एलान किया। खामेनेई के बेटे मोजतबा को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया। नए लीडर बनने के बाद ईरान ने तुरंत इजरायल पर मिसाइल हमला किया और युद्ध की स्थिति को और गंभीर बना दिया।
दसवां दिन: संघर्ष की आग और बढ़ी
आज युद्ध का दसवां दिन है और मिडिल ईस्ट में संघर्ष और भड़कता नजर आ रहा है। अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान में लगातार बम और मिसाइल हमले कर रहे हैं। इजरायल ने ईरान की तेल भंडारण और इंडस्ट्रियल क्षेत्रों को निशाना बनाया। मिडिल ईस्ट की जियोपॉलिटिकल स्थिति अब पूरी तरह से अस्थिर हो गई है।
खाड़ी देशों और वैश्विक असर
इस जंग का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है। सऊदी अरब, कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान समेत कई खाड़ी देश भी प्रभावित हो रहे हैं। तेल की आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है। व्यापार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।













