इजराइल में बड़ा सियासी गठबंधन, नेतन्याहू के खिलाफ बेनेट-लैपिड हुए एकजुट

पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और येर लैपिड ने नई पार्टी टुगेदर बनाकर नेतन्याहू के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया, 2027 चुनावों से पहले बड़ा राजनीतिक बदलाव।

इजराइल में पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और येर लैपिड ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ एकजुट होकर नई पार्टी ‘टुगेदर’ बनाई है। दोनों नेताओं का लक्ष्य आगामी चुनावों में सत्ता बदलना और विपक्ष को मजबूत करना है।

तेल अवीव: इजराइल की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। देश के दो पूर्व प्रधानमंत्री—नफ्ताली बेनेट और यैर लैपिड—ने मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ एक बार फिर राजनीतिक मोर्चा बनाने का फैसला किया है।

दोनों नेताओं ने घोषणा की है कि वे अपनी-अपनी राजनीतिक ताकतों को मिलाकर एक नई पार्टी बनाएंगे, जिसका नाम “टुगेदर (Together)” रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य लंबे समय से सत्ता में बने नेतन्याहू को चुनौती देना है।

2021 की सफलता फिर दोहराने की कोशिश

यह पहली बार नहीं है जब बेनेट और लैपिड साथ आए हैं। वर्ष 2021 में दोनों ने अलग-अलग विचारधाराओं वाली पार्टियों को एकजुट करके एक ऐतिहासिक गठबंधन सरकार बनाई थी।

उस समय उन्होंने लगभग 12 साल से सत्ता में रहे नेतन्याहू को सत्ता से बाहर कर दिया था। यह गठबंधन इजराइल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना गया था।

हालांकि, यह सरकार ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी और 2022 में राजनीतिक अस्थिरता के चलते संसद भंग कर दी गई। इसके बाद हुए चुनावों में नेतन्याहू फिर से सत्ता में लौट आए।

नई पार्टी ‘टुगेदर’ की रणनीति

नई पार्टी “टुगेदर” का नेतृत्व बेनेट करेंगे और वे ही इसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार भी होंगे।

  • इस गठबंधन का मुख्य लक्ष्य है:
  • विपक्ष को एकजुट करना
  • वोटों का विभाजन रोकना

नेतन्याहू के खिलाफ मजबूत विकल्प पेश करना

लैपिड की पार्टी का मानना है कि इजराइल में विपक्षी वोट बिखरे हुए हैं, जिसे एक साथ लाना जरूरी है ताकि चुनावी नतीजों पर असर डाला जा सके।

बेनेट और लैपिड की अलग राजनीतिक सोच

हालांकि दोनों नेता एक साथ आ रहे हैं, लेकिन उनकी विचारधारा काफी अलग है।

नफ्ताली बेनेट की सोच

  • दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी नेता
  • वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों के समर्थक
  • सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता
  • फिलिस्तीन राज्य के गठन के खिलाफ रुख

यैर लैपिड की सोच

  • उदार और धर्मनिरपेक्ष नेता
  • मध्यम वर्ग और शहरी मतदाताओं में लोकप्रिय
  • व्यावहारिक और संतुलित विदेश नीति के पक्षधर
  • संवाद और राजनीतिक समझौते पर जोर

2022 में गठबंधन टूटने का कारण

2021 में बनी सरकार अलग-अलग विचारधाराओं वाली पार्टियों का मिश्रण थी, जिसमें दक्षिणपंथी, वामपंथी, मध्यमार्गी और एक अरब पार्टी भी शामिल थी।

इन सभी के बीच सुरक्षा, फिलिस्तीन नीति और बस्तियों जैसे मुद्दों पर गहरे मतभेद थे। धीरे-धीरे राजनीतिक असहमति बढ़ती गई और सरकार अस्थिर हो गई।

आखिरकार दोनों नेताओं ने संसद भंग करने का निर्णय लिया, जिससे नए चुनाव कराए गए और नेतन्याहू की वापसी हुई।

राजनीतिक समीकरण और चुनावी रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया गठबंधन इजराइल की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।

अगर बेनेट और लैपिड के साथ पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट भी जुड़ते हैं, तो विपक्ष और मजबूत हो सकता है।

सर्वेक्षणों के अनुसार, यह गठबंधन करीब 38 सीटों तक पहुंच सकता है, जिससे यह संसद में सबसे बड़ा राजनीतिक समूह बन सकता है।

आर्थिक और राजनीतिक लाभ

इस गठबंधन से दोनों नेताओं को रणनीतिक लाभ भी मिलेगा:

  • चुनावी फंडिंग में बढ़ोतरी
  • अलग-अलग वोट बैंक का एकीकरण
  • सुरक्षा और मध्यम वर्ग दोनों मतदाताओं तक पहुंच
  • नेतन्याहू विरोधी वोटों का केंद्रीकरण

इजराइल में पार्टियों को मिलने वाला सरकारी फंड संसद में सीटों के आधार पर तय होता है, इसलिए यह गठबंधन आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या नेतन्याहू को चुनौती मिल पाएगी?

हालांकि यह गठबंधन मजबूत दिख रहा है, लेकिन इजराइल की राजनीतिक संरचना जटिल है। 120 सीटों वाली संसद में बहुमत हासिल करना आसान नहीं होता।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस गठबंधन का सबसे बड़ा असर मनोवैज्ञानिक हो सकता है। अगर जनता को लगे कि विपक्ष एकजुट है, तो मतदान प्रतिशत बढ़ सकता है।

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