भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब एक नए चरण में प्रवेश करने की तैयारी कर रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन Gaganyaan के शुरुआती चरणों के बाद अपने अंतरिक्ष यात्री कार्यक्रम को पहली बार आम नागरिकों के लिए खोलने की योजना पर काम कर रहा है।
ISRO: भारत का मानव अंतरिक्ष मिशन Gaganyaan धीरे-धीरे अपने अगले चरणों की ओर बढ़ रहा है, और इसी के साथ अंतरिक्ष यात्रियों (astronauts) के चयन को लेकर नई संभावनाओं पर चर्चा भी तेज हो गई है। Indian Space Research Organisation की योजना के अनुसार, शुरुआती तकनीकी और मानवयुक्त परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे होने के बाद अंतरिक्ष यात्री कैडर को और व्यापक बनाया जा सकता है।
इसका मतलब यह है कि भविष्य में सिर्फ फाइटर पायलट ही नहीं, बल्कि विज्ञान, इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े आम नागरिकों को भी अंतरिक्ष यात्रा के लिए चुने जाने का अवसर मिल सकता है।
अंतरिक्ष यात्रियों में आएगी नई विविधता
सूत्रों के अनुसार, ISRO के दूसरे अंतरिक्ष यात्री बैच में कुल 10 उम्मीदवारों का चयन किया जा सकता है। इसमें:
- 6 उम्मीदवार भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट होंगे
- 4 उम्मीदवार STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) पृष्ठभूमि से आम नागरिक होंगे
यह पहली बार होगा जब भारत का अंतरिक्ष यात्री कैडर सैन्य और नागरिक दोनों क्षेत्रों से प्रतिभागियों को शामिल करेगा।
गगनयान के बाद बदलेगा चयन मॉडल
Gaganyaan के शुरुआती मानवयुक्त मिशनों के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद यह नई प्रणाली लागू की जाएगी। वर्तमान में पहले बैच के सभी अंतरिक्ष यात्री भारतीय वायुसेना से चुने गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- एयर कमोडोर प्रशांत बी नायर
- ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला
- ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन
- ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप
इन सभी का चयन उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और तकनीकी दक्षता को देखते हुए किया गया है।
हर साल दो मानव मिशनों की योजना

ISRO की योजना के अनुसार आने वाले वर्षों में हर साल दो मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन संचालित किए जा सकते हैं। प्रस्तावित ढांचे के अनुसार:
- एक अंतरिक्ष यात्री मिशन के बाद लगभग दो साल का अंतराल होगा
- प्रशिक्षण और चयन प्रक्रिया का पूरा चक्र लगभग 4.5 वर्ष का होगा
यह मॉडल भारत की दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।
अंतरिक्ष यात्री समूह का विस्तार
विशेषज्ञ समिति के अनुसार, शुरुआती चरण में 7 अंतरिक्ष यात्री पर्याप्त माने गए थे, लेकिन भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए इस संख्या को बढ़ाकर 10 कर दिया गया है। इसके पीछे प्रमुख कारण हैं:
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिशनों की संभावना
- अंतरिक्ष यात्री की संभावित अनुपलब्धता
- भविष्य के भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की योजना
- भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की तैयारी
आने वाले वर्षों में भारत अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस परियोजना में अधिक अंतरिक्ष यात्रियों की आवश्यकता होगी, जिससे वैज्ञानिक प्रयोग और लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने वाले मिशन संभव हो सकें। इस दिशा में अंतरिक्ष यात्रियों की संख्या और विविधता दोनों को बढ़ाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









