भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर जर्मनी रवाना हो रहे हैं। यह यात्रा रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक साझेदारी को और गहरा करने पर जोर रहेगा।
नई दिल्ली: Rajnath Singh मंगलवार से तीन दिन की जर्मनी यात्रा पर जा रहे हैं, जिसका उद्देश्य India और Germany के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करना है।इस दौरे के दौरान एक महत्वपूर्ण डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसके तहत दोनों देश भविष्य में हथियारों और रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास और उत्पादन पर काम करेंगे। बर्लिन में Rajnath Singh अपने जर्मन समकक्ष Boris Pistorius और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ विस्तृत बातचीत करेंगे।
रक्षा सहयोग को नई गति
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और जर्मनी के बीच एक व्यापक डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप को अंतिम रूप देना है। इस रोडमैप के तहत दोनों देश मिलकर भविष्य में उन्नत हथियार प्रणालियों, रक्षा उपकरणों और तकनीकों का संयुक्त विकास और उत्पादन कर सकते हैं। यह पहल भारत की ‘मेक इन इंडिया’ नीति को भी मजबूती देगी, जिसमें घरेलू स्तर पर रक्षा उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने जर्मन समकक्ष Boris Pistorius और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इन बैठकों में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है:
- रक्षा उद्योग में सहयोग
- सैन्य-से-सैन्य संबंधों को मजबूत करना
- साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- ड्रोन और आधुनिक युद्ध तकनीक
- संयुक्त प्रशिक्षण और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन
- “समुद्र का अदृश्य योद्धा” – पनडुब्बी सहयोग
इस दौरे का एक अहम पहलू जर्मनी के साथ उन्नत पनडुब्बी तकनीक पर संभावित सहयोग भी है। जर्मनी को पारंपरिक पनडुब्बी निर्माण में वैश्विक अग्रणी देशों में गिना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सहयोग आगे बढ़ता है, तो भारत को आधुनिक स्टील्थ पनडुब्बियों जैसी क्षमता मिल सकती है, जिन्हें अक्सर “समुद्र का अदृश्य योद्धा” कहा जाता है। इससे भारतीय नौसेना की ताकत और समुद्री सुरक्षा क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
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समझौते और MoU पर हस्ताक्षर की संभावना
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की मौजूदगी में कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
- रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप
- संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिए प्रशिक्षण सहयोग
- उन्नत तकनीकों के आदान-प्रदान के समझौते
- सात साल बाद हो रहा है यह दौरा
यह यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि करीब सात वर्षों के बाद कोई भारतीय रक्षा मंत्री जर्मनी का दौरा कर रहा है। इससे पहले Nirmala Sitharaman ने फरवरी 2019 में जर्मनी की यात्रा की थी। इस अंतराल के बाद हो रही यह यात्रा दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को फिर से सक्रिय और मजबूत करने का संकेत देती है।
राजनाथ सिंह इस दौरान जर्मनी के रक्षा उद्योग से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों और कंपनियों से भी मुलाकात करेंगे। इसका उद्देश्य भारत में संयुक्त उत्पादन और तकनीकी निवेश को बढ़ावा देना है।










