देश के कई राज्यों में मानसून का असर जारी है। सिक्किम में लैंडस्लाइड से दो नदियों का बहाव प्रभावित हुआ। बिहार और यूपी में लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। मध्य प्रदेश में नदियां उफान पर हैं और कई डैम के गेट खोले गए।
गंगटोक: देश के कई हिस्सों में मानसून की सक्रियता के बीच बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। सिक्किम में शनिवार देर रात हुए भूस्खलन के कारण तीस्ता और च्याकोऊंग नदियों का बहाव प्रभावित हुआ और एक स्थान पर पानी जमा होने लगा। उत्तर प्रदेश और बिहार में भी कई जिलों में बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है, जबकि मध्य प्रदेश में नर्मदा समेत कई नदियां उफान पर हैं। 6 सितंबर 2026 को सामने आए मौसम अपडेट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं और करीब 3.53 लाख लोग प्रभावित बताए गए हैं। प्रयागराज में जलस्तर बढ़ने के कारण कई घाट डूब गए हैं। वहीं बिहार के 18 जिले बाढ़ की चपेट में हैं और करीब 6.65 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
सिक्किम में लैंडस्लाइड से दो नदियों का बहाव प्रभावित
सिक्किम के नगा फॉरेस्ट क्षेत्र में शनिवार देर रात नगा-टोसा रोड की नई सड़क कटिंग पर भूस्खलन हुआ। यह घटना थेंग टनल के सामने तीस्ता और च्याकोऊंग नदियों के संगम के पास हुई।
भूस्खलन के कारण दोनों नदियों का सामान्य बहाव रुक गया, जिससे इलाके में एक स्थान पर पानी जमा होने लगा। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के बीच इस तरह की घटनाएं स्थानीय स्तर पर जलप्रवाह और सड़क संपर्क के लिए चुनौती पैदा कर सकती हैं।
उपलब्ध अपडेट में इस घटना से हुए किसी जान-माल के नुकसान की जानकारी नहीं दी गई है।
उत्तर प्रदेश में अगले एक सप्ताह बारिश का अनुमान
उत्तर प्रदेश में कुछ दिनों की अपेक्षाकृत नरमी के बाद मानसून फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में बना कम दबाव का क्षेत्र अब प्रभावी हो रहा है। इसके प्रभाव से प्रदेश में अगले एक सप्ताह तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
रविवार को राज्य के 18 जिलों में बारिश का अलर्ट बताया गया है। वहीं, 26 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। इन इलाकों में करीब 3.53 लाख लोग प्रभावित बताए गए हैं।
बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर का असर कई निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। प्रशासन और स्थानीय स्तर पर लोगों को जलभराव और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सावधानी बरतने की जरूरत है।
प्रयागराज में घाट डूबे, सड़क पर अंतिम संस्कार
प्रयागराज में गंगा और आसपास के जलस्तर बढ़ने से घाटों पर पानी पहुंच गया है। घाट डूबने के कारण अंतिम संस्कार के लिए लोगों को सड़क पर चिताएं जलानी पड़ रही हैं।
घाटों का जलमग्न होना शहर के नदी किनारे वाले क्षेत्रों में बढ़ते जलस्तर का संकेत है। बाढ़ की स्थिति के बीच स्थानीय लोगों और प्रशासन के सामने अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक सेवाओं को व्यवस्थित बनाए रखने की चुनौती भी सामने आई है।
बिहार के 18 जिले बाढ़ की चपेट में
बिहार में गंगा और कोसी नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। कटिहार में दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ने से जिले के कई क्षेत्र प्रभावित हुए हैं।
राज्य के 18 जिले बाढ़ की चपेट में बताए गए हैं और 6.65 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। बक्सर से भागलपुर तक गंगा का जलस्तर लाल निशान से ऊपर बताया गया है। गंगा और पुनपुन नदियों के बढ़ते जलस्तर ने पटना समेत कई इलाकों में स्थिति को और गंभीर किया है।
पटना में गंगा ने 10 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा
पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर एक महत्वपूर्ण स्तर तक पहुंच गया है। शनिवार को यहां जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया, जो 2016 में दर्ज किए गए 50.52 मीटर के स्तर से अधिक है।
इस तरह गांधी घाट पर गंगा ने 10 साल पुराना रिकॉर्ड पार कर लिया। नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण पटना और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ा हुआ है।
मध्य प्रदेश में नदियां उफान पर, डैम के गेट खोले गए
मध्य प्रदेश में भी लगातार बारिश के कारण कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। नर्मदा समेत कई नदियां उफान पर हैं। स्थिति को देखते हुए बरगी, भदभदा और कलियासोत डैम के गेट खोले जा चुके हैं।
राज्य में अब तक 30 इंच से ज्यादा बारिश होने की जानकारी दी गई है। मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, ग्वालियर-चंबल और सागर क्षेत्रों में रविवार को मजबूत मौसम प्रणाली बनने की संभावना है। इससे इन इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।
डैम के गेट खोले जाने और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच नदी किनारे तथा निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सतर्कता महत्वपूर्ण बनी हुई है।
छत्तीसगढ़ में बारिश की रफ्तार धीमी
छत्तीसगढ़ में फिलहाल बारिश का दौर कुछ धीमा पड़ा है। रविवार को राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है।
पिछले 24 घंटों में लोरमी, दरीमा और कुमर्दा में 10-10 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। राज्य में अब तक मौजूदा मानसून सीजन के दौरान सामान्य से 3 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
उत्तराखंड में बारिश के बाद कुछ राहत
उत्तराखंड में पिछले एक सप्ताह से बारिश का दौर जारी रहने के बाद रविवार को कई इलाकों में मौसम कुछ साफ हुआ। हालांकि, मौसम विभाग के अनुसार राज्य के सभी जिलों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
शनिवार को नून नदी में एक महिंद्रा पिकअप पानी में बह गई। वहीं, रामनगर के पंपापुरी क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के पास बारिश के बाद एक विशाल पेड़ सड़क पर गिर गया।
इन घटनाओं से पहाड़ी और नदी किनारे वाले क्षेत्रों में बारिश के दौरान यात्रा और सड़क सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां सामने आई हैं।
हरियाणा के कई हिस्सों में बारिश जारी
हरियाणा में भी मानसून सक्रिय बना हुआ है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में तेज बारिश दर्ज की गई।
यमुनानगर के हथिनीकुंड बैराज क्षेत्र में 57.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जो राज्य में बताए गए प्रमुख आंकड़ों में सबसे अधिक है। गुरुग्राम में 51.5 मिलीमीटर और पंचकूला में 50.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
रविवार को राज्य के सात जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। तीन जिलों में पिछले 24 घंटों के दौरान 2 इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई।
पंजाब और चंडीगढ़ में भी बारिश के आसार
पंजाब और चंडीगढ़ में पिछले दिनों हुई बारिश से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली है। रविवार को भी राज्य के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बताई गई है।
राज्य के अधिकतम तापमान में 0.7 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई, जिसके बाद यह सामान्य के करीब पहुंच गया। बठिंडा में सबसे अधिक 36.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
कई राज्यों में मौसम पर बनी रहेगी नजर
सिक्किम में भूस्खलन से नदियों का बहाव प्रभावित होने से लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश में बाढ़ तथा मध्य प्रदेश में नदियों के उफान तक, देश के कई हिस्सों में मानसून का व्यापक असर दिखाई दे रहा है।
उत्तर प्रदेश में अगले एक सप्ताह बारिश जारी रहने का अनुमान है, जबकि बिहार में गंगा और कोसी समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर पर नजर बनी हुई है। मध्य प्रदेश में डैम के गेट खोले जाने के बाद नदी क्षेत्रों में सतर्कता जरूरी है।
छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब में भी अलग-अलग तीव्रता के साथ बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन की advisories का पालन करना और जलभराव, नदी तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है।









