NEET में अच्छे स्कोर के बावजूद रद्द होगा MBBS एडमिशन, जानें 1st ईयर पास करने की 4 साल की सीमा

NEET में अच्छे स्कोर के बावजूद MBBS छात्रा को 1st ईयर में अतिरिक्त मौका नहीं मिला। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 4 साल और 4 प्रयास की सीमा स्पष्ट की।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने MBBS छात्रा की याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि फर्स्ट ईयर पास करने के लिए अधिकतम चार प्रयास मिल सकते हैं। छात्रा NEET में अच्छे स्कोर के बावजूद समय सीमा पार कर चुकी थी।

MBBS Rule: NEET UG में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने वाली छात्रा को MBBS फर्स्ट ईयर में बार-बार असफल होने के कारण अतिरिक्त मौका नहीं मिला। बॉम्बे हाईकोर्ट ने Graduate Medical Education Regulations 2023 का हवाला देते हुए कहा कि फर्स्ट ईयर पूरा करने के लिए छात्र को अधिकतम चार साल या चार प्रयास ही मिल सकते हैं।

क्या है MBBS छात्रा का मामला?

MBBS में दाखिला पाने के लिए NEET UG देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। हर साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी डॉक्टर बनने के लक्ष्य के साथ इस परीक्षा में शामिल होते हैं। लेकिन NEET में अच्छा स्कोर करने के बाद भी केवल प्रवेश मिल जाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तय नियमों के अनुसार मेडिकल कोर्स के अलग-अलग चरणों को समय पर पूरा करना भी जरूरी है।

NEET में अच्छे स्कोर के बावजूद रद्द होगा MBBS एडमिशन, जानें 1st ईयर पास करने की 4 साल की सीमा

ऐसा ही मामला महाराष्ट्र की एक छात्रा से जुड़ा है। छात्रा को NEET UG में अच्छे स्कोर के आधार पर अगस्त 2023 में महाराष्ट्र के एक प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट मिली थी। यह कॉलेज महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (MUHS) से संबद्ध था।

छात्रा ने फर्स्ट ईयर के लगभग सभी विषयों के इंटरनल असेसमेंट पास कर लिए थे। हालांकि, वह एनाटॉमी विषय की मुख्य परीक्षा में सफल नहीं हो पाई। उसने इस विषय को पास करने के लिए कई बार परीक्षा दी, लेकिन थ्योरी पेपर क्लियर नहीं कर सकी। इसके बाद कॉलेज ने उसे अगली परीक्षा में शामिल होने से रोक दिया।

कॉलेज के इस फैसले के खिलाफ छात्रा ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया और दलील दी कि उसे एनाटॉमी परीक्षा में एक और मौका दिया जाना चाहिए।

कोर्ट ने 4 साल और 4 प्रयास की सीमा बताई

मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने MBBS फर्स्ट ईयर पूरा करने को लेकर लागू नियमों को स्पष्ट किया। जस्टिस फिरदौस पी. पूनीवाला और जस्टिस आर. आई. चागला की बेंच ने कहा कि MBBS के फर्स्ट ईयर की पढ़ाई पूरी करने के लिए किसी छात्र को चार साल से ज्यादा समय या चार प्रयास नहीं दिए जा सकते।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चार प्रयासों की सीमा इस बात पर निर्भर नहीं करती कि छात्र ने प्रत्येक प्रयास में कितने विषयों की परीक्षा दी थी। यानी यदि किसी विद्यार्थी ने अलग-अलग प्रयासों में अलग-अलग विषयों की परीक्षा दी है, तब भी फर्स्ट ईयर पास करने के लिए कुल प्रयासों की निर्धारित सीमा लागू रहेगी।

छात्रा की ओर से तर्क दिया गया था कि उसने विशेष रूप से एनाटॉमी का पेपर केवल तीन बार दिया है। इसलिए उसे इस विषय के लिए चौथा मौका दिया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

Graduate Medical Education Regulations 2023 का दिया हवाला

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में Graduate Medical Education Regulations 2023 के Regulation 21 का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि नियमों के तहत किसी भी परिस्थिति में MBBS छात्र को फर्स्ट ईयर पास करने के लिए चार से अधिक अवसर नहीं दिए जा सकते।

कोर्ट के अनुसार छात्रा अपने चार प्रयास पूरे कर चुकी थी। इसलिए उसे एनाटॉमी विषय की परीक्षा के लिए अतिरिक्त अवसर देने का आधार नहीं बनता। इसी आधार पर अदालत ने छात्रा की याचिका खारिज कर दी।

इस फैसले से मेडिकल छात्रों के लिए यह बात महत्वपूर्ण हो जाती है कि MBBS में केवल प्रवेश हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है। पाठ्यक्रम के प्रत्येक चरण को संबंधित नियमों और निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करना जरूरी है।

MBBS कोर्स कितने साल का होता है?

भारत में MBBS की पढ़ाई पूरी करने में सामान्य तौर पर करीब 5.5 साल का समय लगता है। इसमें 4.5 साल की अकादमिक पढ़ाई के बाद एक साल की अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप शामिल होती है।

इसके अलावा Graduate Medical Education Regulations (Amendment) 2023 के तहत MBBS छात्रों को अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप सहित पूरा कोर्स पूरा करने के लिए अधिकतम 10 साल की अवधि दी गई है।

हालांकि, पूरे MBBS कोर्स के लिए निर्धारित अधिकतम अवधि और फर्स्ट ईयर पास करने की चार साल की सीमा अलग-अलग नियम हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट के इस मामले में विवाद खास तौर पर फर्स्ट ईयर के चार प्रयास पूरे होने के बाद अतिरिक्त मौका देने से जुड़ा था।

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