प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को उनकी भारत यात्रा के दौरान छह विशेष उपहार भेंट किए, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला और परंपरा का प्रतीक हैं।
नई दिल्ली: भारत-रूस के मजबूत और ऐतिहासिक संबंधों को और गहराई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को उनकी भारत यात्रा के दौरान छह विशेष उपहार भेंट किए। ये उपहार भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्प, आध्यात्मिक मूल्यों और “एक जिला एक उत्पाद” (ODOP) व भौगोलिक संकेत (GI) जैसी राष्ट्रीय पहलों का वैश्विक मंच पर प्रतिनिधित्व करते हैं। ये तोहफे केवल औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि भारत-रूस की दशकों पुरानी दोस्ती, आपसी सम्मान और साझा मूल्यों के प्रतीक हैं।
पीएम मोदी द्वारा दिए गए ये उपहार भारत के विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट पहचान को दर्शाते हैं और यह संदेश देते हैं कि भारत अपनी परंपरा, शिल्प और आध्यात्मिक विरासत को दुनिया के सामने गर्व के साथ प्रस्तुत कर रहा है।
1. असम की प्रसिद्ध काली चाय
ब्रह्मपुत्र नदी के उपजाऊ मैदानों में उगाई जाने वाली असम की काली चाय को दुनिया की बेहतरीन चायों में गिना जाता है। यह चाय अपनी तीव्र माल्टी खुशबू, गहरे रंग और प्रबल स्वाद के लिए जानी जाती है। पारंपरिक विधियों से तैयार इस चाय को वर्ष 2007 में GI टैग प्राप्त हुआ था। इसमें असम की जलवायु, खेती की विरासत और स्थानीय किसानों की मेहनत की झलक मिलती है। साथ ही, इसके स्वास्थ्य लाभ भी इसे खास बनाते हैं। यह उपहार भारत की कृषि समृद्धि और पारंपरिक ज्ञान का प्रतीक है।
2. मुर्शिदाबाद का नक्काशीदार चांदी का चाय सेट
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का यह हस्तनिर्मित चांदी का चाय सेट बारीक नक्काशी और उत्कृष्ट शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण है। भारत और रूस—दोनों देशों में चाय का सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है। ऐसे में यह चाय सेट दोनों देशों की साझा परंपराओं और आपसी जुड़ाव का सुंदर प्रतीक बन गया है। यह उपहार भारतीय कारीगरों की सृजनात्मकता और ऐतिहासिक धरोहर को दर्शाता है।
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3. महाराष्ट्र का हस्तनिर्मित चांदी का घोड़ा
महाराष्ट्र की पारंपरिक धातु शिल्प परंपरा से बना यह हस्तनिर्मित चांदी का घोड़ा गरिमा, शक्ति और वीरता का प्रतीक है। घोड़े की आगे बढ़ती हुई मुद्रा भारत-रूस साझेदारी की निरंतर प्रगति का रूपक मानी जाती है। यह उपहार दोनों देशों की सांस्कृतिक सोच में निहित साहस, सम्मान और नेतृत्व के गुणों को दर्शाता है।
4. कश्मीरी केसर
कश्मीर की ऊंची वादियों में उगाया जाने वाला केसर, जिसे स्थानीय रूप से “कोंग” या “जाफरान” कहा जाता है, दुनिया के सबसे कीमती मसालों में से एक है। इसकी सुगंध, गहरा रंग और औषधीय गुण इसे विशेष बनाते हैं। यह उपहार कश्मीर की प्राकृतिक संपदा, मेहनत और पारंपरिक खेती की पहचान को वैश्विक स्तर पर उजागर करता है।
5. आगरा का संगमरमर शतरंज सेट
उत्तर प्रदेश के आगरा से आया यह हस्तनिर्मित संगमरमर का शतरंज सेट भारतीय शिल्प कौशल और कलात्मक परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें बारीक पत्थर जड़ाई, विपरीत रंगों के मोहरे और संतुलित डिज़ाइन इसे एक अनोखी कलाकृति बनाते हैं। शतरंज रणनीति, धैर्य और बुद्धिमत्ता का खेल है, जो कूटनीति और वैश्विक रिश्तों के संदर्भ में भी गहरा अर्थ रखता है।
6. रूसी भाषा में श्रीमद्भगवद्गीता
पीएम मोदी द्वारा भेंट की गई रूसी भाषा में अनुवादित श्रीमद्भगवद्गीता भारत की आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। महाभारत का यह पवित्र ग्रंथ श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को कर्तव्य, कर्म, आत्मा और मोक्ष का जो ज्ञान देता है, वह आज भी पूरी मानवता के लिए प्रासंगिक है। यह उपहार भारत की “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना और शांति व आत्मिक संतुलन का वैश्विक संदेश देता है।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए ये छह उपहार केवल वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि ये भारत की विविधता, परंपरा, आध्यात्मिक सोच और आर्थिक आत्मनिर्भरता की झलक पेश करते हैं। ODOP और GI जैसी पहलों के माध्यम से भारत स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिला रहा है, और यह उपहार उसी दिशा में एक मजबूत कदम हैं।









