India Trade Deficit Update: भारत के विदेशी व्यापार को बड़ी राहत, नवंबर में एक्सपोर्ट रिकॉर्ड स्तर पर

India Trade Deficit Update: भारत के विदेशी व्यापार को बड़ी राहत, नवंबर में एक्सपोर्ट रिकॉर्ड स्तर पर

नवंबर 2025 में भारत का निर्यात 19.37 प्रतिशत बढ़कर 38.13 अरब डॉलर के दशक के उच्च स्तर पर पहुंचा। आयात में गिरावट से व्यापार घाटा घटकर 24.53 अरब डॉलर रहा, जिससे अर्थव्यवस्था को राहत मिली।

India Trade Deficit Update: नवंबर का महीना भारत के विदेशी व्यापार के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। लंबे समय से दबाव में दिख रहे एक्सपोर्ट फ्रंट पर मजबूती लौटी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में भारत का निर्यात (Exports) 10 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि आयात (Imports) में गिरावट दर्ज की गई। इस दोहरे असर से देश का व्यापार घाटा (Trade Deficit) भी कम हुआ है, जिसे अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

नवंबर में निर्यात का मजबूत प्रदर्शन

नवंबर 2025 में भारत का कुल निर्यात 19.37 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 38.13 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। यह आंकड़ा पिछले दस वर्षों में किसी भी एक महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी डेटा के अनुसार, यह उछाल ऐसे समय में आया है जब अक्टूबर में निर्यात में गिरावट देखी गई थी।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि नवंबर के मजबूत आंकड़ों ने अक्टूबर में हुए नुकसान की भरपाई कर दी है। उनका कहना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय निर्यातकों ने नए बाजारों में पकड़ मजबूत की और मौजूदा मांग का बेहतर इस्तेमाल किया।

आयात में गिरावट से घटा व्यापार घाटा

नवंबर में जहां निर्यात ने रिकॉर्ड बनाया, वहीं आयात में 1.88 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान कुल आयात घटकर 62.66 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। आयात में आई इस कमी का सीधा असर व्यापार घाटे पर पड़ा। नवंबर में भारत का व्यापार घाटा 24.53 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया, जो अक्टूबर के मुकाबले काफी कम है।

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, आयात में गिरावट और निर्यात में तेज बढ़त का यह कॉम्बिनेशन चालू खाते (Current Account) के संतुलन के लिए अहम माना जाता है।

किन सेक्टरों ने निर्यात को दी रफ्तार

नवंबर में निर्यात बढ़ने के पीछे कई सेक्टरों की अहम भूमिका रही। खासतौर पर इंजीनियरिंग उत्पाद (Engineering Goods), इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics), गहने और आभूषण (Gems and Jewellery), दवाइयां और फार्मा (Pharma) जैसे सेक्टरों में मजबूत मांग देखने को मिली।

इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात में इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी वस्तुओं की मांग बढ़ी। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी बढ़ने का असर दिखा। फार्मा सेक्टर ने भी स्थिर और भरोसेमंद सप्लायर के रूप में अपनी छवि को मजबूत किया।

सोने के आयात में भारी गिरावट

नवंबर में आयात घटने का सबसे बड़ा कारण सोने के आयात में आई तेज गिरावट रही। आंकड़ों के अनुसार, गोल्ड इंपोर्ट में करीब 60 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पाद, वनस्पति तेल और कोयले के आयात में भी गिरावट देखने को मिली।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची कीमतों और घरेलू मांग में नरमी के कारण सोने के आयात में यह गिरावट आई है। इससे न सिर्फ व्यापार घाटा कम हुआ, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव भी घटा है।

अप्रैल से नवंबर तक का समग्र व्यापार हाल

वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से नवंबर की अवधि की बात करें तो भारत का कुल निर्यात 2.62 प्रतिशत बढ़कर 292.07 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। वहीं, इसी अवधि में आयात 5.59 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 515.21 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।

हालांकि पूरे वित्त वर्ष के आंकड़ों में आयात की रफ्तार निर्यात से ज्यादा रही है, लेकिन नवंबर जैसे महीनों में आया सुधार यह संकेत देता है कि आने वाले समय में अंतर कम हो सकता है।

अमेरिका को निर्यात में तेज बढ़त

नवंबर में भारत का अमेरिका को निर्यात 22 प्रतिशत बढ़कर 6.97 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। यह आंकड़ा इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर कुछ टैरिफ (Tariff) लगाए हुए हैं। इसके बावजूद निर्यात में बढ़ोतरी यह दिखाती है कि भारतीय उत्पाद वहां की मांग में बने हुए हैं।

वाणिज्य सचिव ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील (Trade Deal) को लेकर बातचीत जारी है। अगर यह समझौता आगे बढ़ता है, तो आने वाले महीनों में निर्यात को और मजबूती मिल सकती है।

अक्टूबर में क्यों बढ़ा था व्यापार घाटा

नवंबर के बेहतर आंकड़ों को समझने के लिए अक्टूबर के डेटा पर नजर डालना जरूरी है। अक्टूबर में भारत का निर्यात 11.8 प्रतिशत घटकर 34.38 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया था। वहीं, आयात 16.63 प्रतिशत बढ़कर 76.06 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था।

उस महीने व्यापार घाटा बढ़कर 41.68 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया था। आयात में इस तेज बढ़ोतरी का मुख्य कारण सोना और चांदी के आयात में अचानक आई तेजी थी। यही वजह है कि नवंबर में जब गोल्ड इंपोर्ट घटा, तो घाटे में भी सुधार दिखा।

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