India-US Trade Deal: शेयर बाजार में कहां बनेंगे पैसे, बर्नस्टीन ने बताए पसंदीदा सेक्टर

India-US ट्रेड डील के बाद शेयर बाजार में सेंटिमेंट मजबूत हुआ है। बर्नस्टीन के अनुसार निफ्टी 2026 तक 28,100 पहुंच सकता है। जानिए किन सेक्टरों में निवेश

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। ब्रोकरेज बर्नस्टीन का मानना है कि बेहतर सेंटिमेंट से निफ्टी में तेजी आ सकती है और बैंकिंग, आईटी व टेलीकॉम सेक्टर निवेश के लिए बेहतर रहेंगे।

Stock Market: भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील को भारतीय शेयर बाजार के लिए एक मजबूत और सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इस समझौते के बाद बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और सेंटिमेंट में साफ सुधार देखने को मिल रहा है। ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन का मानना है कि यह समय शेयर बाजार में निवेश के लिए अनुकूल है और आने वाले महीनों में निफ्टी नए स्तरों की ओर बढ़ सकता है।

बर्नस्टीन के विश्लेषकों के अनुसार, ट्रेड डील के बाद बाजार का मूड बदलेगा और यही तेजी की मुख्य वजह बनेगा। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया है कि यह तेजी कमाई में बड़े सुधार से नहीं बल्कि बेहतर सेंटिमेंट से आएगी।

निफ्टी पर ब्रोकरेज का अनुमान

बर्नस्टीन का अनुमान है कि निफ्टी 50 इंडेक्स साल 2026 के अंत तक 28,100 अंक तक पहुंच सकता है। यह मौजूदा स्तरों से करीब 8 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है। ब्रोकरेज का कहना है कि हाल के महीनों में कमजोर अर्निंग्स और साधारण बजट के चलते बाजार दबाव में था। लेकिन अब भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद निवेशकों का भरोसा लौट सकता है।

बर्नस्टीन के मैनेजिंग डायरेक्टर वेनुगोपाल गरे ने को-राइटर निखिल अरेला के साथ लिखी रिपोर्ट में कहा कि निफ्टी पहले 26,500 के स्तर तक जा सकता है। इसके बाद बाजार में धीरे-धीरे मजबूती देखने को मिल सकती है। साल के अंत तक 28,100 का स्तर उनका टारगेट बना हुआ है।

बाजार में तेजी की वजह क्या होगी

बर्नस्टीन के अनुसार, आने वाले समय में बाजार की तेजी का आधार कंपनियों की कमाई नहीं बल्कि सेंटिमेंट होगा। कमजोर नतीजों और बड़े पैमाने पर फंड जुटाने की वजह से कमाई में बड़ा सुधार फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है। इसी कारण तेजी के बाद रिटर्न सीमित रह सकते हैं।

ब्रोकरेज ने निवेशकों को यह भी चेतावनी दी है कि बड़ी कंपनियों द्वारा ज्यादा फंड जुटाने से शेयरों पर दबाव आ सकता है। इसलिए निवेश करते समय सावधानी जरूरी है और हर सेक्टर में अंधाधुंध निवेश से बचना चाहिए।

किन सेक्टरों पर लगाएं दांव

सेक्टर के लिहाज से बर्नस्टीन ने कुछ चुनिंदा क्षेत्रों को निवेश के लिए बेहतर बताया है। ब्रोकरेज का मानना है कि बैंकिंग यानी फाइनेंशियल्स, आईटी और टेलीकॉम सेक्टर इस समय सबसे मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे हैं।

इन सेक्टरों पर ट्रेड डील की शर्तों का सीधा और नकारात्मक असर नहीं पड़ता। इसके उलट, बेहतर ग्लोबल माहौल और मजबूत सेंटिमेंट से इन कंपनियों को फायदा मिल सकता है। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेड से जुड़े कुछ शेयरों में भी सीमित सुधार देखने को मिल सकता है।

बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर क्यों पसंद

बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर को घरेलू अर्थव्यवस्था से सीधा फायदा मिलता है। रुपये में स्थिरता, ब्याज दरों में संभावित कटौती और बेहतर लिक्विडिटी से इस सेक्टर की स्थिति मजबूत हो सकती है। बर्नस्टीन का मानना है कि ट्रेड डील के बाद रुपये को सहारा मिलेगा, जिससे ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बनेगी।

कम ब्याज दरें लोन ग्रोथ को सपोर्ट करेंगी और बैंकिंग सेक्टर की कमाई को स्थिरता मिलेगी। इसी वजह से फाइनेंशियल्स को निवेश के लिहाज से बेहतर माना जा रहा है।

आईटी सेक्टर पर भरोसा बरकरार

बर्नस्टीन ने आईटी सेक्टर को लेकर अपनी ओवरवेट राय बरकरार रखी है। ब्रोकरेज का कहना है कि आईटी सेक्टर का अमेरिका से सबसे ज्यादा जुड़ाव है। बेहतर भारत-अमेरिका रिश्तों से आईटी सेवाओं पर अतिरिक्त जांच और नए टैक्स का खतरा कम होगा।

आईटी कंपनियों की आय का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है। ऐसे में ट्रेड डील से नियमों को लेकर स्पष्टता बढ़ेगी और कंपनियों की ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। यही वजह है कि आईटी सेक्टर को मीडियम से लॉन्ग टर्म के लिए मजबूत विकल्प माना जा रहा है।

टेलीकॉम सेक्टर की स्थिति

टेलीकॉम सेक्टर को भी बर्नस्टीन ने निवेश के लिए पसंदीदा सेक्टरों में शामिल किया है। इस सेक्टर पर ट्रेड डील का सीधा असर नहीं पड़ता, लेकिन बेहतर सेंटिमेंट और स्थिर आर्थिक माहौल से इसमें निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। डाटा खपत में लगातार बढ़ोतरी और डिजिटल इकोनॉमी के विस्तार से टेलीकॉम कंपनियों की आय में स्थिरता बनी रह सकती है।

किन सेक्टरों में रहना चाहिए सतर्क

बर्नस्टीन ने यह भी साफ किया है कि कुछ सेक्टरों में अब भी सावधानी जरूरी है। ऑटो और मेटल्स जैसे सेक्टरों पर अलग-अलग टैक्स लागू रह सकते हैं। हालांकि कुल मिलाकर टैक्स दर 20 से 25 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है।

इससे भारत की स्थिति आसियान देशों के बराबर हो जाती है और चीन के मुकाबले मजबूत होती है। लेकिन फिर भी इन सेक्टरों में निवेश करते समय जोखिम को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

रुपये को मिलेगा सहारा

ब्रोकरेज का कहना है कि हाल के महीनों में रुपये की कमजोरी की वजह से डॉलर के लिहाज से भारत का रिटर्न कमजोर रहा है। ट्रेड डील के बाद रुपये को सहारा मिलने की उम्मीद है। रुपये में स्थिरता से विदेशी निवेश बढ़ सकता है और महंगाई पर भी नियंत्रण रहेगा। इससे ब्याज दरों में कटौती की संभावना बनेगी, जो पूरी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक मानी जाती है।

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