Indian Economy: भारत की आर्थिक रैंकिंग छठे स्थान पर क्यों पहुंची? सरकार ने बताई वजह

Indian Economy Ranking: भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में छठे स्थान पर क्यों पहुंचा? सरकार ने आर्थिक रैंकिंग में बदलाव की वजह बताई है। जानें भारत की GDP

अमेरिकी डॉलर के हिसाब से किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का आकार नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ और उसकी मुद्रा के डॉलर के मुकाबले एक्सचेंज रेट जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।

बिजनेस न्यूज़: भारत की अर्थव्यवस्था लगातार तेज गति से आगे बढ़ रही है, लेकिन वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर में मापी जाने वाली अर्थव्यवस्थाओं की रैंकिंग में भारत छठे स्थान पर पहुंच गया है। इस बदलाव के पीछे केवल आर्थिक वृद्धि की रफ्तार नहीं, बल्कि भारतीय रुपये की कमजोरी, डॉलर की मजबूती, नॉमिनल GDP में बदलाव और राष्ट्रीय आय के नए आंकड़ों जैसे कई कारक जिम्मेदार हैं। सरकार ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर विस्तार से स्थिति स्पष्ट की है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF की अप्रैल 2026 की World Economic Outlook रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की नॉमिनल GDP करीब 3.92 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर आंकी गई है। इस आधार पर भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

डॉलर में GDP से तय होती है वैश्विक रैंकिंग

सरकार के अनुसार, वैश्विक आर्थिक रैंकिंग को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि IMF की यह तुलना अमेरिकी डॉलर में नॉमिनल GDP के आधार पर की जाती है। यानी किसी देश की घरेलू अर्थव्यवस्था बढ़ने के बावजूद उसकी डॉलर आधारित रैंकिंग पर उसकी मुद्रा के विनिमय मूल्य का बड़ा असर पड़ सकता है।

यदि किसी देश की करेंसी डॉलर के मुकाबले कमजोर होती है, तो उसकी स्थानीय मुद्रा में मापी गई GDP को डॉलर में बदलने पर उसका आकार अपेक्षाकृत कम दिखाई दे सकता है। यही कारण है कि भारत की आर्थिक गतिविधियां बढ़ने के बावजूद अमेरिकी डॉलर में उसकी GDP और वैश्विक रैंकिंग पर रुपये की कमजोरी का प्रभाव पड़ा है।

पंकज चौधरी ने राज्यसभा में कहा कि देशों की रैंकिंग कई कारणों से बदल सकती है। इनमें आर्थिक विकास की दर, विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव, महंगाई और कीमतों का प्रभाव, राष्ट्रीय खातों की गणना में संशोधन तथा अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के आकार और विकास में बदलाव शामिल हैं।

नई GDP सीरीज का भी पड़ा असर

भारत की रैंकिंग में बदलाव की एक महत्वपूर्ण वजह GDP की नई सीरीज भी मानी जा रही है। 2022-23 को आधार वर्ष मानकर तैयार की गई नई राष्ट्रीय आय श्रृंखला के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की नॉमिनल GDP 345.47 ट्रिलियन रुपये निर्धारित की गई है। नई सीरीज में GDP के आकलन और आंकड़ों की गणना के तरीके में बदलाव किया गया है। पुराने आंकड़ों की तुलना में नई श्रृंखला के आधार पर नॉमिनल अर्थव्यवस्था का आकार अलग दिखाई देता है। ऐसे संशोधनों का असर अंतरराष्ट्रीय तुलना और डॉलर आधारित रैंकिंग पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, रैंकिंग में एक स्थान की गिरावट का अर्थ यह नहीं है कि भारतीय अर्थव्यवस्था सिकुड़ गई है। भारत की कुल आर्थिक क्षमता और उत्पादन का आकार पिछले वर्षों की तुलना में बढ़ा है। वर्ष 2019 में भारत करीब 2.94 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना था। इसके बाद भी देश की GDP में वृद्धि जारी रही है।

रुपये की कमजोरी ने बढ़ाया दबाव

भारतीय रुपये में आई गिरावट भी डॉलर आधारित GDP के लिए महत्वपूर्ण कारक रही है। सरकार द्वारा साझा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का औसत विनिमय मूल्य वित्त वर्ष 2021-22 में 74.23 रुपये प्रति डॉलर था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 88.31 रुपये प्रति डॉलर हो गया।
रुपये में कमजोरी का सीधा असर तब दिखाई देता है, जब भारत की GDP को अमेरिकी डॉलर में परिवर्तित किया जाता है। 

घरेलू स्तर पर उत्पादन और आय बढ़ने के बावजूद कमजोर विनिमय दर डॉलर में अर्थव्यवस्था के आकार को प्रभावित कर सकती है। इसलिए नॉमिनल डॉलर GDP रैंकिंग को किसी देश की आर्थिक ताकत का एकमात्र पैमाना नहीं माना जा सकता।

भारत की विकास कहानी अब भी मजबूत

सरकार का कहना है कि वैश्विक रैंकिंग में बदलाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है। भारत दुनिया की प्रमुख बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज वृद्धि करने वाले देशों में शामिल है। घरेलू मांग, बुनियादी ढांचे पर निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सेवाओं के विस्तार जैसे क्षेत्र आर्थिक वृद्धि को समर्थन दे रहे हैं।

फिच रेटिंग्स ने भी भारत की सॉवरेन रेटिंग को BBB- पर बरकरार रखते हुए आउटलुक को स्टेबल बनाए रखा है। एजेंसी ने भारत की मजबूत विकास संभावनाओं और अपेक्षाकृत ठोस बाहरी वित्तीय स्थिति को इसके प्रमुख सकारात्मक कारकों में शामिल किया है।

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