Indian Navy AI Technology: युद्ध में AI और स्वायत्त प्रणालियों का बढ़ेगा इस्तेमाल, नौसेना ने बताया भविष्य का रोडमैप

Indian Navy AI Technology: भारतीय नौसेना भविष्य के युद्धों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वायत्त प्रणालियों और मानवरहित तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की

भारतीय नौसेना हवा, समुद्र और पानी के भीतर अपनी परिचालन क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम तकनीक जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी विकास पर जोर दे रही है।

Indian Navy AI Technology: भारतीय नौसेना भविष्य की समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम तकनीक और स्वायत्त प्रणालियों सहित आधुनिक तकनीकों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। नौसेना का लक्ष्य एक ऐसी बहुआयामी और नेटवर्क आधारित सैन्य शक्ति विकसित करना है, जो हवा, सतह, समुद्र के भीतर और डिजिटल क्षेत्र में प्रभावी ढंग से काम कर सके। नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर ने नई दिल्ली में यह जानकारी देते हुए कहा कि बदलते युद्धक्षेत्र में तकनीक की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नौसेना का उद्देश्य केवल नई तकनीक को अपनाना नहीं, बल्कि उसे इस तरह इस्तेमाल करना है कि परिचालन क्षमता, समुद्री निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। हाल के अंतरराष्ट्रीय संघर्षों से मिले अनुभवों ने भी भविष्य की सैन्य तैयारियों में तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित किया है।

युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ेगी भूमिका

वाइस एडमिरल अजय कोचर के अनुसार, भविष्य के युद्धों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ने की संभावना है। आधुनिक सैन्य अभियानों में तेजी से जानकारी जुटाना, उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण करना और बदलती परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने में सहायता प्राप्त करना महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

AI आधारित तकनीक इन कार्यों में सैन्य बलों की मदद कर सकती है। वहीं, स्वायत्त प्रणालियों के जरिए कुछ निगरानी और परिचालन संबंधी गतिविधियों को मानव नियंत्रण के साथ अधिक प्रभावी तरीके से अंजाम देने की संभावनाएं भी विकसित हो रही हैं। नौसेना के सामने चुनौती इन तकनीकों को सुरक्षित, भरोसेमंद और प्रभावी तरीके से अपने मौजूदा सैन्य ढांचे में शामिल करने की है। इसके लिए तकनीकी विकास के साथ प्रशिक्षण, नेटवर्क व्यवस्था और परिचालन प्रक्रियाओं को भी मजबूत करना जरूरी होगा।

काउंटर-यूएएस और क्वांटम तकनीक पर जोर

Indian Navy AI Technology: युद्ध में AI और स्वायत्त प्रणालियों का बढ़ेगा इस्तेमाल, नौसेना ने बताया भविष्य का रोडमैप

नौसेना की भविष्य की तैयारियों में काउंटर-यूएएस यानी मानवरहित हवाई प्रणालियों से निपटने वाली तकनीक भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। आधुनिक संघर्षों में ड्रोन और अन्य मानवरहित हवाई उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ने से सैन्य प्रतिष्ठानों, जहाजों और महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए नई क्षमताओं की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

काउंटर-यूएएस तकनीक का उद्देश्य ऐसे खतरों का पता लगाने, उनकी पहचान करने और उनसे निपटने की क्षमता विकसित करना है। इसके अलावा, नौसेना क्वांटम तकनीक पर भी ध्यान दे रही है। भविष्य में इस क्षेत्र का इस्तेमाल सुरक्षित संचार, संवेदन प्रणालियों और कंप्यूटिंग जैसी क्षमताओं के विकास में उपयोगी हो सकता है।

कोचर ने कहा कि काउंटर-यूएएस और क्वांटम तकनीक ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें आने वाले समय में तेजी से प्रगति हो सकती है। उन्होंने बताया कि नौसेना इन बदलावों को लेकर सजग है और अपनी तैयारियों में इन पहलुओं को शामिल कर रही है।

पश्चिम एशिया संकट के बीच समुद्री सुरक्षा पर नजर

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके कारण समुद्री मार्गों पर पैदा होने वाली चुनौतियों को लेकर भी नौसेना सतर्क है। वाइस एडमिरल कोचर ने कहा कि मौजूदा संकटों ने नौसेना की गतिविधियों और तैनाती से जुड़ी जरूरतों को प्रभावित किया है। उन्होंने ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ का उल्लेख करते हुए बताया कि इस अभियान के तहत महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर हमलों के बीच कई जहाजों को सुरक्षित भारतीय तटों तक पहुंचाने में मदद मिली। यह घटनाक्रम समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और भारतीय हितों की सुरक्षा के लिहाज से समुद्री मार्गों के महत्व को दर्शाता है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति नेटवर्क पर निर्भर है। ऐसे में समुद्री रास्तों पर किसी भी तरह का व्यवधान व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। नौसेना की निगरानी और परिचालन तैयारियां इन जोखिमों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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