Indian Navy Surya: नौसेना में शामिल हुआ पहला स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप ‘सूर्या’, राजनाथ सिंह बोले- समुद्री ताकत का प्रतीक

Indian Navy Surya: भारतीय नौसेना में पहला स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप ‘सूर्या’ शामिल हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे भारत की बढ़ती समुद्री ताकत का

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना के बेड़े में फ्लीट सपोर्ट शिप-1 'सूर्या' को शामिल किया। मंगलवार को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में इसका जलावतरण किया गया। 'सूर्या' के नौसेना में शामिल होने से उसकी समुद्री पहुंच और परिचालन क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय नौसेना के लिए देश में निर्मित पहले फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS) का मंगलवार को जलावतरण किया गया। इस जहाज का नाम ‘सूर्या’ रखा गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम को भारत की बढ़ती स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता और समुद्री आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम उपलब्धि माना जा रहा है।

‘सूर्या’ को भारतीय नौसेना के लिए तैयार किया जा रहा फ्लीट सपोर्ट शिप-1 बताया गया है। इस तरह के जहाज नौसैनिक अभियानों के दौरान बेड़े के अन्य युद्धपोतों को लंबे समय तक समुद्र में संचालन बनाए रखने के लिए जरूरी सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नए जहाज के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्र में लंबे अभियानों को संचालित करने की क्षमता और परिचालन पहुंच को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

एक कार्यक्रम में तीन बड़ी उपलब्धियां

‘सूर्या’ के जलावतरण के साथ ही हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में दो अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं की शुरुआत भी हुई। कार्यक्रम के दौरान नए उन्नत स्लिपवे और 300 टन क्षमता वाले गोलियथ क्रेन का उद्घाटन किया गया। इसके अलावा एक और फ्लीट सपोर्ट शिप के निर्माण के लिए औपचारिक रूप से कील रखी गई।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन तीनों घटनाओं को भारत की समुद्री क्षमता में हो रहे विस्तार से जोड़ा। उन्होंने कहा कि जहाज का जलावतरण देश की उपलब्धि को दर्शाता है, दूसरे फ्लीट सपोर्ट शिप की कील रखना भविष्य के संकल्प का प्रतीक है और नया स्लिपवे भारत की बढ़ती जहाज निर्माण क्षमता को दिखाता है। उनके मुताबिक, हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में अब केवल जहाजों का निर्माण नहीं हो रहा, बल्कि भारत की भविष्य की समुद्री शक्ति के लिए आवश्यक औद्योगिक आधार को भी मजबूत किया जा रहा है।

हिंद महासागर में नौसेना की भूमिका

रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में संकट की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने वाले देश और एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के रूप में अपनी क्षमता साबित की है। मानवीय सहायता एवं आपदा राहत, समुद्री डकैती के खिलाफ अभियान, नागरिकों की निकासी और समुद्री सुरक्षा जैसे विभिन्न अभियानों में नौसेना ने सक्रिय भूमिका निभाई है। 

ऐसे अभियानों के लिए युद्धपोतों को लंबे समय तक समुद्र में तैनात रखने की क्षमता महत्वपूर्ण होती है। फ्लीट सपोर्ट शिप इसी जरूरत को पूरा करने में अहम योगदान दे सकते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को एक बड़ी समुद्री शक्ति के रूप में विकसित करना किसी नई यात्रा की शुरुआत नहीं है, बल्कि देश की पुरानी समुद्री विरासत को आधुनिक क्षमताओं के साथ मजबूत करने का प्रयास है।

हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की अहम भूमिका

रक्षा मंत्री ने हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड को भारत की राष्ट्रीय समुद्री क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि आठ दशकों से अधिक समय से यह संस्थान देश की रक्षा और समुद्री जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रहा है। रक्षा मंत्रालय के अधीन आने के बाद संस्थान की आर्थिक स्थिति में सुधार का भी उन्होंने उल्लेख किया। वर्ष 2025 में हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड को मिनीरत्न श्रेणी-1 का दर्जा मिलने को उन्होंने संस्थान में हुए बदलाव और प्रदर्शन में सुधार का प्रमाण बताया।

आत्मनिर्भरता से आगे वैश्विक प्रतिस्पर्धा का लक्ष्य

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की समुद्री ताकत को केवल नौसेना या किसी एक शिपयार्ड के प्रयासों से मजबूत नहीं किया जा सकता। इसके लिए नौसेना, सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड, निजी उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप, डीआरडीओ और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षमता हासिल करना भी है। 

देश के जहाज निर्माण केंद्रों को ऐसे स्तर तक पहुंचाने की जरूरत है, जहां वे भारतीय नौसेना के अलावा मित्र देशों और अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए भी जहाज तथा समुद्री सेवाएं उपलब्ध करा सकें।

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