इंडोनेशिया की जंगलों में लगी आग से दक्षिण-पूर्व एशिया में जहरीला धुआं, अल नीनो ने बढ़ाई चिंता

इंडोनेशिया में जंगलों की भीषण आग से सुमात्रा और कालीमंतन में जहरीला धुआं फैला है। मलेशिया और फिलीपींस भी प्रभावित हैं, जबकि अल नीनो ने चिंता बढ़ाई है।

इंडोनेशिया में कई सप्ताह से जारी जंगलों की आग का धुआं मलेशिया और फिलीपींस तक पहुंच गया है। लाखों लोग खराब वायु गुणवत्ता से प्रभावित हैं। अल नीनो के कारण स्थिति बिगड़ने की आशंका है, जबकि आग से ओरंगुटान और पीटलैंड भी प्रभावित हैं।

जकार्ता: इंडोनेशिया में कई सप्ताह से जारी भीषण जंगल और भूमि की आग का धुआं दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों तक पहुंच गया है। सुमात्रा और बोर्नियो द्वीप के इंडोनेशियाई हिस्से कालीमंतन में बड़ी संख्या में लोग जहरीले धुएं और खराब वायु गुणवत्ता के संपर्क में हैं। पड़ोसी मलेशिया और फिलीपींस के कुछ इलाकों में भी धुंध और धुएं का असर महसूस किया जा रहा है।

विशेषज्ञों को आशंका है कि सामान्य से अधिक मजबूत अल नीनो परिस्थितियां इस वर्ष आग की स्थिति को और गंभीर बना सकती हैं। लंबे समय तक बारिश की कमी और शुष्क मौसम जंगलों तथा पीटलैंड में आग फैलने के जोखिम को बढ़ा रहे हैं। अधिकारियों ने आग पर नियंत्रण के लिए हजारों कर्मियों को तैनात किया है।

इंडोनेशिया में कई सप्ताह से धधक रही आग

इंडोनेशिया के सुमात्रा और कालीमंतन क्षेत्रों में कई जगहों पर आग कई सप्ताह से जल रही है। अधिकारियों के अनुसार, अगस्त के दौरान हॉटस्पॉट और सक्रिय आग की घटनाओं में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष जनवरी से जुलाई के बीच देश में लगभग 1,07,465 हेक्टेयर क्षेत्र आग से प्रभावित हुआ। यह 2023 की इसी अवधि की तुलना में करीब 110 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2023 में भी इंडोनेशिया अल नीनो की परिस्थितियों से प्रभावित हुआ था।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, आग से प्रभावित क्षेत्र का उसका अलग अनुमान लगभग 73,310 हेक्टेयर है। अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर उनके आकलन के तरीकों और निगरानी प्रणालियों के कारण हो सकता है।

कालीमंतन में सबसे ज्यादा सक्रिय आग

इंडोनेशियाई अधिकारियों ने सुमात्रा और कालीमंतन के छह प्रांतों को आग से निपटने के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दोनों द्वीपों पर 182 सक्रिय आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं।

इनमें से 145 से अधिक आग कालीमंतन क्षेत्र में बताई गई हैं। बोर्नियो द्वीप का इंडोनेशियाई हिस्सा कालीमंतन कहलाता है और यहां घने जंगलों के साथ बड़े पैमाने पर पीटलैंड भी मौजूद हैं।

पीटलैंड में लंबे समय से जमा जैविक पदार्थ के कारण आग का प्रभाव सामान्य जंगल की आग से अलग हो सकता है। सतह पर आग बुझने के बाद भी जमीन के नीचे मौजूद कार्बन और जैविक सामग्री सुलगती रह सकती है, जिससे आग को पूरी तरह नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।

39 हजार से ज्यादा कर्मी अभियान में जुटे

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, जंगल और भूमि की आग पर काबू पाने के लिए 39,000 से ज्यादा कर्मियों को तैनात किया गया है। इनमें विभिन्न सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और स्थानीय स्तर की टीमें शामिल हैं।

बड़े पैमाने पर तैनाती का उद्देश्य आग को फैलने से रोकना, प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाना और धुएं के प्रभाव को कम करना है। हालांकि, लंबे समय तक सूखा मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां अग्निशमन अभियान को चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।

अग्निशमन दलों के सामने एक और समस्या यह है कि पीटलैंड की आग जमीन के भीतर तक फैल सकती है। ऐसी स्थिति में केवल सतह पर मौजूद आग को बुझाना पर्याप्त नहीं होता और लंबे समय तक निगरानी की जरूरत पड़ सकती है।

जहरीला धुआं मलेशिया और फिलीपींस तक पहुंचा

इंडोनेशिया की आग का धुआं केवल स्थानीय समस्या नहीं रह गया है। हवा के साथ फैलने वाले धुएं और महीन कणों ने पड़ोसी मलेशिया के कुछ क्षेत्रों को भी प्रभावित किया है।

फिलीपींस के उत्तरी हिस्सों में भी धुंध का असर देखा गया है। राजधानी मनीला में स्थिति विशेष रूप से चिंता का विषय बनी, जहां स्थानीय शहरी प्रदूषण के साथ बाहरी स्रोतों से आए धुएं ने हवा की गुणवत्ता को और खराब किया।

मनीला प्रशासन ने खतरनाक धुंध और वायु प्रदूषण के बीच मंगलवार को सरकारी स्कूलों में आमने-सामने की कक्षाएं निलंबित कर दीं। कुछ क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता को बहुत अस्वास्थ्यकर से लेकर अत्यंत गंभीर श्रेणी तक दर्ज किया गया।

इंडोनेशिया की जंगलों में लगी आग से दक्षिण-पूर्व एशिया में जहरीला धुआं, अल नीनो ने बढ़ाई चिंता

स्थानीय प्रशासन ने लोगों को घर के भीतर रहने और जरूरत पड़ने पर उच्च क्षमता वाले N95 जैसे मास्क इस्तेमाल करने की सलाह दी।

मनीला में धुंध से बढ़ी स्वास्थ्य चिंता

मनीला इंडोनेशिया के बोर्नियो क्षेत्र से लगभग 1,700 किलोमीटर दूर है। इसके बावजूद शहर तक धुएं का पहुंचना आग के क्षेत्रीय प्रभाव को दर्शाता है।

फिलीपींस के पालावान प्रांत में भी स्थानीय निवासियों ने धुएं और धुंध की शिकायत की है। यह क्षेत्र बोर्नियो और मनीला के बीच स्थित है और भौगोलिक रूप से इंडोनेशिया से आने वाले धुएं के प्रभाव के संपर्क में आ सकता है।

वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों तथा पहले से सांस संबंधी समस्याओं वाले लोगों के लिए जोखिम बढ़ा सकते हैं। इंडोनेशिया में बड़ी संख्या में लोगों के श्वसन संक्रमण के कारण अस्पताल पहुंचने की खबरें भी सामने आई हैं।

अल नीनो से बढ़ सकती है आग की गंभीरता

इस वर्ष की आग को लेकर वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता का एक बड़ा कारण अल नीनो है। यह जलवायु घटना प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव से जुड़ी होती है और इसका असर दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश तथा तापमान के पैटर्न पर पड़ सकता है।

इंडोनेशिया में मजबूत अल नीनो परिस्थितियां आम तौर पर शुष्क मौसम और कम बारिश की स्थिति को बढ़ा सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में जंगल और पीटलैंड अधिक सूख जाते हैं, जिससे आग लगने और उसके तेजी से फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुष्क परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रहीं, तो आग से पर्यावरणीय नुकसान के साथ-साथ स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभाव भी बढ़ सकते हैं।

पीटलैंड में छिपे कार्बन का खतरा

इंडोनेशिया की आग का एक गंभीर पर्यावरणीय पहलू पीटलैंड से जुड़ा है। इन क्षेत्रों में हजारों वर्षों से जैविक पदार्थ जमा होकर कार्बन का विशाल भंडार बनाते रहे हैं।

जब पीटलैंड में आग लगती है तो केवल पेड़-पौधे ही नहीं जलते, बल्कि जमीन के भीतर जमा पुराना कार्बन भी वातावरण में पहुंच सकता है। इसी वजह से पर्यावरण विशेषज्ञ ऐसे क्षेत्रों को संभावित कार्बन बम के रूप में देखते हैं।

अगर बड़े पैमाने पर पीटलैंड जलता है तो इससे कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य प्रदूषक तत्वों का उत्सर्जन बढ़ सकता है। इससे स्थानीय वायु गुणवत्ता और वैश्विक जलवायु दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की चिंता रहती है।

आग ने ओरंगुटान के आवास को भी नुकसान पहुंचाया

जंगल की आग का असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। बोर्नियो के जंगलों में रहने वाले ओरंगुटान भी इस संकट से प्रभावित हो रहे हैं।

वन्यजीव संरक्षण संगठन YIARI के अनुसार, आग ने सैकड़ों ओरंगुटान के आवास के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचाया है। संगठन की प्रमुख करमेली लियानो सांचेज के मुताबिक, आग के कारण कुछ ओरंगुटान भोजन और पानी की कमी से जूझ रहे हैं।

पश्चिम कालीमंतन के केतापांग इलाके में एक कमजोर ओरंगुटान जमीन पर पड़ा मिला, जिसे बचाव दल ने सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। उसे उपचार और देखभाल के लिए पुनर्वास केंद्र ले जाया जाना है। स्वस्थ होने के बाद उसे फिर से जंगल में छोड़ने की योजना है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए चिंता केवल तत्काल बचाव तक सीमित नहीं है। यदि जंगल और भोजन के स्रोत लगातार नष्ट होते रहे तो ओरंगुटान की आबादी के लिए दीर्घकालिक खतरा बढ़ सकता है।

सूखे के बीच बारिश के लिए विशेष प्रार्थना

इंडोनेशिया में लंबे समय से जारी सूखे और आग के बीच जकार्ता में लोगों ने बारिश के लिए विशेष इस्तिस्का नमाज भी अदा की। इस्लामी परंपरा में सूखे के समय बारिश की मांग के लिए यह प्रार्थना की जाती है।

इस आयोजन ने भी उस गंभीर स्थिति को रेखांकित किया जिसमें कई इलाके लंबे समय तक बारिश की कमी और बढ़ती आग का सामना कर रहे हैं।

क्षेत्रीय संकट बनता जा रहा है जंगल की आग का धुआं

इंडोनेशिया में लगी आग अब केवल स्थानीय पर्यावरणीय समस्या नहीं रही। धुएं का दूसरे देशों तक पहुंचना इसे दक्षिण-पूर्व एशिया की साझा वायु गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती में बदल रहा है।

मलेशिया और फिलीपींस में धुंध का असर यह दिखाता है कि सीमा पार वायु प्रदूषण को केवल एक देश के स्तर पर नियंत्रित करना कठिन है। क्षेत्रीय निगरानी, समय पर चेतावनी और देशों के बीच सहयोग ऐसी परिस्थितियों में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

आने वाले दिनों में आग की स्थिति काफी हद तक बारिश, हवा की दिशा और तापमान पर निर्भर करेगी। यदि शुष्क परिस्थितियां जारी रहती हैं तो आग के नए क्षेत्र सामने आने और धुएं के फैलाव का खतरा बना रहेगा।

इंडोनेशियाई अधिकारियों के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है—आग को नियंत्रित करना और उससे प्रभावित लोगों तथा वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। वहीं, दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों को भी खराब होती वायु गुणवत्ता पर नजर रखनी होगी। मौजूदा संकट ने एक बार फिर जंगलों, पीटलैंड, जलवायु परिवर्तन और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को सामने ला दिया है।

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