इंडोनेशिया में अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी के लगातार विस्फोट से छह हवाई अड्डों पर उड़ान संचालन रोका गया। 467 उड़ानें प्रभावित हुईं और 1.5 लाख से अधिक यात्री फंस गए। राख सिंगापुर, दोहा, सिडनी और कुआलालंपुर की उड़ानों को भी प्रभावित कर रही है।
जकार्ता: इंडोनेशिया में अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी के लगातार सक्रिय होने के बाद हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ज्वालामुखी से निकली राख के कारण अधिकारियों ने छह हवाई अड्डों पर अस्थायी रूप से उड़ान संचालन रोक दिया। इससे 1.5 लाख से अधिक यात्री अलग-अलग हवाई अड्डों पर फंस गए हैं। इंडोनेशिया के परिवहन मंत्री डुडी पुरवागंधी ने बताया कि अब तक 467 उड़ानें प्रभावित हुई हैं। उन्होंने एयरलाइंस से कुछ उड़ानों को दूसरे हवाई अड्डों की ओर मोड़ने पर विचार करने को कहा है। अधिकारियों के अनुसार, ज्वालामुखीय राख के फैलाव को देखते हुए हवाई यात्रा को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाया गया।
छह हवाई अड्डों पर अस्थायी रोक
ज्वालामुखीय राख के कारण प्रभावित हवाई अड्डों में राजधानी जकार्ता का सुकर्णो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी शामिल है। रविवार सुबह सबसे पहले इसी हवाई अड्डे का संचालन रोका गया था। अधिकारियों ने बताया कि हवाई अड्डे के आसपास के वायुमंडल में ज्वालामुखीय राख की मौजूदगी का पता चला था। इसके बाद राख के पश्चिमी जावा की दिशा में फैलने की पुष्टि होने पर कई अन्य हवाई अड्डों पर भी संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया।
परिवहन मंत्री ने कहा कि उड़ान सेवाओं को रोकने का निर्णय यात्रियों और विमान संचालन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया। अधिकारियों ने एयरलाइंस से प्रभावित यात्रियों को समय पर जानकारी देने और रद्द उड़ानों के टिकटों का रिफंड तेजी से उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया है।
467 उड़ानें प्रभावित, कई अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर असर
परिवहन मंत्रालय के अनुसार, ज्वालामुखीय गतिविधि से अब तक 467 उड़ानें प्रभावित हुई हैं। इसका सबसे ज्यादा असर सिंगापुर आने-जाने वाली उड़ानों पर पड़ा है।
इसके अलावा दोहा, सिडनी और कुआलालंपुर समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय मार्गों की उड़ान सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। अधिकारियों की चिंता सिर्फ मौजूदा उड़ानों तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में यात्रा करने वाले यात्रियों को भी समय पर जानकारी देने को कहा गया है, ताकि हवाई अड्डों पर भीड़ की स्थिति न बने।
मंत्री पुरवागंधी ने एयरलाइंस से यात्रियों के लिए रिफंड प्रक्रिया तेज करने और उड़ानों में बदलाव या रद्द होने की जानकारी जल्द साझा करने को कहा है।
ज्वालामुखी से लगातार निकल रही राख और लावा
अनाक क्राकाटोआ में शुक्रवार देर रात से ही विस्फोटक गतिविधियां शुरू हो गई थीं। अधिकारियों के मुताबिक, ज्वालामुखी से लगातार भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की गईं। इसके अलावा लावा के फव्वारे और आसपास के इलाकों में तेज धमाकों जैसी आवाजें भी सुनाई दीं।
रविवार तड़के ज्वालामुखी में दो और विस्फोट हुए। इसके बाद राख का फैलाव और अधिक बढ़ गया।
इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान एजेंसी BMKG के अनुसार, ज्वालामुखीय राख जावा के पूर्वी हिस्से में करीब 20,000 फीट यानी 6,000 मीटर की ऊंचाई तक पहुंची। वहीं ज्वालामुखी के पश्चिम में सुमात्रा की ओर राख करीब 50,000 फीट यानी 15,000 मीटर तक पहुंच गई।
राख के इतने बड़े क्षेत्र में फैलने से विमान संचालन के लिए जोखिम बढ़ गया है। इसी वजह से अधिकारियों ने कई हवाई अड्डों पर एहतियाती कदम उठाए हैं।
सुनामी की चेतावनी नहीं
अनाक क्राकाटोआ सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित है, जो इंडोनेशिया के जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच है। ज्वालामुखी की गतिविधि के बावजूद अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इससे संबंधित कोई सुनामी चेतावनी जारी नहीं की गई है।
हालांकि, ज्वालामुखीय राख और धूल के कारण स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आई हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से घर के अंदर रहने और चेहरे पर मास्क लगाने की अपील की है।
अधिकारियों के मुताबिक, राख से सांस लेने, आंखों और त्वचा से जुड़ी परेशानियों का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है।
लोगों ने आंखों में जलन की शिकायत की
स्थानीय समाचार पत्र कोम्पास के मुताबिक, राख के कारण कुछ स्कूलों ने शनिवार को अपनी गतिविधियां रद्द कर दीं। विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों ने आंखों में जलन की शिकायत की थी।
समुद्र में जाने वाले कुछ मछुआरों ने भी अपनी यात्राएं रद्द कर दीं। उन्होंने भी राख के संपर्क में आने के बाद आंखों में परेशानी की शिकायत की।
स्थानीय निवासी अल्दी चंद्र प्रायोगी ने बताया कि शुक्रवार शाम से ही उन्हें परेशानी महसूस हो रही थी। उन्होंने इसकी तुलना आंखों में रेत के छोटे-छोटे कण चले जाने जैसी अनुभूति से की। राहत के लिए उन्हें आंखों में दवा की बूंदें डालनी पड़ रही थीं।
उन्होंने यह भी बताया कि धूल इतनी ज्यादा जमा हो रही है कि उन्हें अपने घर के सामने का आंगन लगभग हर पांच मिनट में साफ करना पड़ रहा है।
यात्रियों से भीड़ से बचने की अपील
हवाई अड्डों पर बड़ी संख्या में यात्रियों के फंसने के बाद अधिकारियों ने एयरलाइंस से यात्रियों को उड़ानों की स्थिति के बारे में समय पर जानकारी देने को कहा है।
सरकार का मानना है कि यदि यात्रियों को उड़ानों के रद्द होने या मार्ग बदलने की जानकारी पहले मिल जाए, तो हवाई अड्डों पर अनावश्यक भीड़ को कम किया जा सकता है।
प्रभावित यात्रियों को रिफंड प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिकारियों ने एयरलाइंस से वैकल्पिक हवाई अड्डों का इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा है।
1883 के क्राकाटोआ विस्फोट से जुड़ा है इतिहास
अनाक क्राकाटोआ, जिसका अर्थ 'क्राकाटोआ का बच्चा' है, पिछली सदी की शुरुआत में समुद्र से उभरने के बाद से समय-समय पर सक्रिय रहा है। यह उस ज्वालामुखीय क्षेत्र में बना है, जो 1883 में माउंट क्राकाटोआ के बड़े विस्फोट के बाद बने कैल्डेरा से जुड़ा है।
अनाक क्राकाटोआ का इतिहास खास तौर पर 2018 की घटना के कारण भी महत्वपूर्ण है। दिसंबर 2018 में ज्वालामुखी का एक हिस्सा ढह गया था। इसके बाद आई बड़ी सुनामी ने 400 से अधिक लोगों की जान ले ली थी। सुमात्रा और जावा के आसपास के तटीय क्षेत्रों में हजारों लोग विस्थापित और घायल हुए थे।
वैज्ञानिकों ने बाद में पाया था कि ज्वालामुखी के ढहने के दौरान समुद्र में खिसके चट्टानी हिस्सों में कुछ की ऊंचाई करीब 70 से 90 मीटर तक थी।
इंडोनेशिया 'रिंग ऑफ फायर' क्षेत्र में
इंडोनेशिया दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखीय क्षेत्रों में से एक है और प्रशांत 'रिंग ऑफ फायर' का हिस्सा है। यह क्षेत्र प्रशांत महासागर के आसपास ज्वालामुखियों, भूकंप क्षेत्रों और टेक्टोनिक प्लेटों की एक लंबी श्रृंखला से बना है।
यह क्षेत्र दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी छोर से लेकर न्यूजीलैंड तक करीब 40,000 किलोमीटर यानी 25,000 मील तक फैला हुआ है।
दुनिया में आने वाले लगभग 90 प्रतिशत भूकंप इसी क्षेत्र के आसपास दर्ज होते हैं। दुनिया के सक्रिय ज्वालामुखियों में से करीब 75 प्रतिशत भी इसी क्षेत्र में स्थित हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रिंग ऑफ फायर में करीब 452 सक्रिय ज्वालामुखी हैं।
इंडोनेशिया में अनाक क्राकाटोआ की मौजूदा गतिविधि ने एक बार फिर इस क्षेत्र में ज्वालामुखीय जोखिम और उसके व्यापक प्रभाव को सामने ला दिया है। फिलहाल अधिकारियों का ध्यान राख के फैलाव, हवाई यातायात की सुरक्षा और प्रभावित यात्रियों को राहत देने पर है।








