International Fleet Review 2026: स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत दिखाएगा भारत की समुद्री शक्ति

International Fleet Review 2026 में स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत भारत की समुद्री ताकत का प्रदर्शन करेगा। जानें कार्यक्रम और विशेषताएं।

भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत आगामी इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) 2026 में औपचारिक रूप से भाग लेगा, जहां दुनिया के सामने भारतीय नौसेना की बढ़ती सामरिक और तकनीकी ताकत प्रदर्शित की जाएगी।

Aircraft Carrier INS Vikrant: ऑपरेशन सिंदूर में इंडियन नेवी ने ‘साइलेंट’ रहते हुए अपना महत्वपूर्ण रोल निभाया, जिससे पाकिस्तान के पास मौजूद सीमित वॉरशिप भी अपने हार्बर से बाहर नहीं आ पाए। इस ऑपरेशन के दौरान इंडियन नेवी की अरब सागर में फॉरवर्ड तैनाती थी और कैरियर बैटल ग्रुप सक्रिय था। अब इसी ताकत को दुनिया देख पाएगी, क्योंकि इसी महीने होने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भारत का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत अपने कैरियर बैटल ग्रुप के साथ शामिल होगा।

राष्ट्रपति करेंगी फ्लीट का निरीक्षण

18 फरवरी को विशाखापत्तनम में आयोजित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारत की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नौसेना के युद्धपोतों का निरीक्षण करेंगी। इस दौरान स्वदेशी नेवल ऑफशोर पेट्रोल वेसल INS सुमेधा को राष्ट्रपति यॉट के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। राष्ट्रपति इसी पोत पर सवार होकर तट के पास खड़े युद्धपोतों के बीच से गुजरेंगी और नौसैनिक बेड़े की तैयारियों का जायजा लेंगी।

इस फ्लीट रिव्यू की सबसे बड़ी आकर्षण INS विक्रांत होगा, जो अपने पूर्ण कैरियर बैटल ग्रुप (CBG) के साथ शामिल होगा। एक कैरियर बैटल ग्रुप में आमतौर पर विमानवाहक पोत के साथ अत्याधुनिक फ्रिगेट, विध्वंसक जहाज (डिस्ट्रॉयर), सहायक युद्धपोत और पानी के भीतर तैनात पनडुब्बियां (सबमरीन) शामिल होती हैं। यह संरचना किसी भी देश की नौसैनिक शक्ति का सबसे मजबूत परिचालन रूप मानी जाती है।

नौसेना के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रदर्शन से यह साफ संदेश जाएगा कि भारत न केवल हिंद महासागर क्षेत्र में, बल्कि व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी एक जिम्मेदार और सक्षम समुद्री शक्ति बन चुका है।

International Fleet Review 2026: स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत दिखाएगा भारत की समुद्री शक्ति

137 देशों को न्योता, 60+ की पुष्टि

हालिया घटनाक्रमों में भारतीय नौसेना की प्रभावी समुद्री तैनाती का जिक्र भी किया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अरब सागर में भारतीय नौसेना की अग्रिम मौजूदगी इतनी मजबूत थी कि पड़ोसी देश की सीमित नौसैनिक क्षमता भी अपने बंदरगाहों से बाहर निकलने से बचती रही। इस संदर्भ में INS विक्रांत की भागीदारी भारत की बढ़ती डिटरेंस (निवारक क्षमता) का प्रतीक मानी जा रही है।

भारतीय नौसेना ने इस बार IFR के लिए 137 देशों को आधिकारिक निमंत्रण भेजा है। इनमें से 60 से अधिक देशों ने अपने युद्धपोतों के साथ भाग लेने की पुष्टि कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन समुद्री सुरक्षा, आपसी सहयोग और नौसैनिक कूटनीति (Naval Diplomacy) को नई दिशा देगा।

नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट भी होगा शामिल

INS विक्रांत के अलावा, अत्याधुनिक नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट भी इस फ्लीट रिव्यू का हिस्सा होगा। यह स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट आधुनिक रडार, मिसाइल प्रणाली और एंटी-सबमरीन युद्ध क्षमता से लैस है, जो भारतीय नौसेना की तकनीकी प्रगति को दर्शाता है। भारत में पहला इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2001 में आयोजित हुआ था, जब राष्ट्रपति के. आर. नारायणन ने INS सुकन्या से बेड़े का निरीक्षण किया था। उस समय 20 देशों के 97 युद्धपोत शामिल हुए थे, जिनमें 73 भारतीय और 24 विदेशी जहाज थे।

दूसरा IFR 2016 में विशाखापत्तनम में हुआ, जिसमें करीब 50 देशों के लगभग 100 युद्धपोत शामिल हुए थे। तब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने INS सुमित्रा से नौसेना की शक्ति का जायजा लिया था। इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू आमतौर पर हर चार से पांच साल में आयोजित किया जाता है। इसके अलावा, हर राष्ट्रपति के कार्यकाल में एक बार प्रेजिडेंट्स फ्लीट रिव्यू (PFR) भी होता है, जिसमें देश की समुद्री सुरक्षा तैयारियों का आकलन किया जाता है। पिछला PFR 2022 में आयोजित किया गया था।

गणतंत्र दिवस परेड के विपरीत, जहां राष्ट्रपति एक स्थान पर खड़े होकर सलामी लेते हैं, फ्लीट रिव्यू में सभी युद्धपोत एक निश्चित फॉर्मेशन में स्थिर खड़े रहते हैं, जबकि राष्ट्रपति का जहाज उनके बीच से गुजरता है।

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