लोकसभा में लगातार दूसरे दिन हंगामा जारी रहा। राहुल गांधी द्वारा चीन और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर सत्ता पक्ष से टकराव हुआ, जिसके चलते प्रश्नकाल बाधित हुआ और सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
New Delhi: लोकसभा में लगातार दूसरे दिन भी शोर-शराबा और हंगामे का माहौल बना रहा। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। प्रश्नकाल से लेकर दोपहर की कार्यवाही तक, सदन कई बार स्थगित करना पड़ा। विपक्ष के नेता राहुल गांधी चीन से जुड़े मुद्दे पर चर्चा की मांग पर अड़े रहे, जबकि सरकार ने इस मांग का विरोध करते हुए नियमों का हवाला दिया।
इस पूरे घटनाक्रम में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और राहुल गांधी के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली। मामला इतना बढ़ गया कि सदन में बोले गए एक शब्द ने भी विवाद का रूप ले लिया और संसदीय मर्यादा पर सवाल खड़े हो गए।
सुबह शुरू हुई कार्यवाही
मंगलवार सुबह लोकसभा की कार्यवाही तय समय पर 11 बजे शुरू हुई। लेकिन जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी और विरोध शुरू कर दिया। राहुल गांधी चीन और राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) से जुड़े मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग कर रहे थे। विपक्ष का कहना था कि यह देश की सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील विषय है, जिस पर संसद में खुली बहस जरूरी है।
हंगामे के कारण प्रश्नकाल बाधित हुआ और सदन की कार्यवाही कुछ ही देर में 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। सत्ता पक्ष का कहना था कि प्रश्नकाल को बाधित करना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है और चर्चा के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
दोपहर में फिर हंगामा
दोपहर 12 बजे जब लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तब भी माहौल शांत नहीं हुआ। विपक्षी सांसद अपनी मांग पर कायम रहे और सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराते रहे। नतीजतन, हंगामा बढ़ता गया और स्पीकर को एक बार फिर कार्यवाही 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
इस दौरान सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर सदन की कार्यवाही नहीं चलने देना चाहता। वहीं विपक्ष का तर्क था कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।
राहुल गांधी का फिर प्रयास, लेकिन नहीं मिली अनुमति
दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राहुल गांधी एक बार फिर बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने दोबारा चीन और पाकिस्तान से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को उठाने की कोशिश की। राहुल गांधी का कहना था कि यह विषय राजनीति से ऊपर है और देशहित में इस पर चर्चा जरूरी है।
हालांकि, आसन की ओर से उन्हें यह संकेत दिया गया कि वे निर्धारित विषयों पर ही बात रखें। सत्ता पक्ष ने इस पर कड़ा विरोध जताया और कहा कि राहुल गांधी बार-बार नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।
किरेन रिजिजू का राहुल पर हमला
![]()
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सदन में एक ऐसी किताब का हवाला दे रहे हैं, जो अभी प्रकाशित भी नहीं हुई है। रिजिजू ने इसे संसदीय नियमों के खिलाफ बताया और कहा कि किसी अप्रकाशित (Unpublished) किताब के आधार पर सरकार को घेरना गलत परंपरा है।
रिजिजू ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी जानबूझकर सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहे हैं और देश की तरक्की से जुड़े मुद्दों पर चर्चा नहीं होने देना चाहते। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष की ओर से जोरदार समर्थन देखने को मिला।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस को लेकर टकराव
आसन पर बैठे कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने जब राहुल गांधी को बोलने का अवसर दिया, तो राहुल ने एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि चीन और पाकिस्तान से जुड़े विषय देश की सुरक्षा से सीधे जुड़े हुए हैं और इन पर संसद में चर्चा होनी चाहिए।
इस पर किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार चर्चा से भाग नहीं रही है, लेकिन इसके लिए तय नियम और समय होता है। उन्होंने कहा कि सदन में हर मुद्दे को मनमाने तरीके से नहीं उठाया जा सकता।
‘यार’ शब्द पर गरमाया माहौल
बहस और हंगामे के बीच एक ऐसा पल आया, जिसने पूरे सदन का ध्यान खींच लिया। किसी सदस्य ने चेयर को संबोधित करते हुए ‘यार’ शब्द का इस्तेमाल कर दिया। यह शब्द सुनते ही आसन पर बैठे कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी नाराज हो गए।
उन्होंने तुरंत सदस्य को टोकते हुए कहा कि यह संसद है और यहां भाषा और व्यवहार में मर्यादा (Decorum) बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। इस टिप्पणी के बाद सदन में तनाव और बढ़ गया।
आसन की सख्ती
चेयर की फटकार के बावजूद हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा था। राहुल गांधी अपनी मांग पर अड़े रहे और सरकार पर चर्चा से भागने का आरोप लगाते रहे। इसी बीच आसन ने संकेत दिया कि यदि सदस्य बोलना नहीं चाहते या नियमों का पालन नहीं करेंगे, तो उन्हें बैठ जाना चाहिए।
इसके बाद आसन की ओर से दूसरे सदस्य का नाम लिया गया, जिससे साफ हो गया कि राहुल गांधी को उस समय बोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अप्रकाशित किताब का हवाला बना विवाद की जड़
पूरा विवाद पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित किताब से जुड़े एक मैगजीन आर्टिकल के हवाले से शुरू हुआ। राहुल गांधी इसी लेख के आधार पर सरकार से सवाल पूछना चाहते थे।
सत्ता पक्ष का कहना है कि जब किताब आधिकारिक रूप से प्रकाशित ही नहीं हुई है, तो उसका संसद में हवाला देना गलत है। वहीं विपक्ष का तर्क है कि अगर जानकारी सार्वजनिक डोमेन में है, तो उस पर सवाल पूछना लोकतांत्रिक अधिकार है।








