इराक की संसद ने गुरुवार को कैबिनेट के खाली पदों को भरते हुए नए मंत्रियों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी। नियुक्त किए गए लोगों में एक उप-प्रधानमंत्री भी शामिल हैं, जिन पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हुए हैं।
Iraq Cabinet Expansion: इराक में कैबिनेट विस्तार के बाद देश की राजनीति और अमेरिका के साथ उसके संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। इराकी संसद ने कई महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर नियुक्तियों को मंजूरी दी है। इनमें लैथ अल-खजाली का नाम भी शामिल है, जो अमेरिका के प्रतिबंधों का सामना कर चुके हैं और ईरान समर्थित मिलिशिया संगठन असाइब अहल अल-हक के नेतृत्व से जुड़े रहे हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब बगदाद के लिए अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बनाए रखना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
कौन हैं लैथ अल-खजाली?
लैथ अल-खजाली, ईरान समर्थित सशस्त्र संगठन असाइब अहल अल-हक के प्रमुख कैस अल-खजाली के भाई हैं। उनका नाम इराक में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और उससे जुड़े विवादों के संदर्भ में पहले भी सामने आ चुका है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने उन्हें 2007 में गिरफ्तार किया था। उन पर उसी वर्ष जनवरी में कर्बला में अमेरिकी सेना पर हुए हमले में भूमिका निभाने का आरोप था। उस हमले में पांच अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। लैथ अल-खजाली को जून 2009 में अमेरिकी हिरासत से रिहा कर दिया गया था।
इसके बाद 2019 में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने उनके खिलाफ प्रतिबंध लगाए। अमेरिकी पक्ष ने यह कार्रवाई असाइब अहल अल-हक में उनकी भूमिका और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े आरोपों सहित विभिन्न कारणों के आधार पर की थी। इन आरोपों को उनके खिलाफ लगाए गए अमेरिकी दावों के रूप में समझना जरूरी है।
ईरान से क्या है कनेक्शन?
असाइब अहल अल-हक इराक का एक प्रभावशाली सशस्त्र और राजनीतिक संगठन है, जिसे ईरान का समर्थन प्राप्त रहा है। इस संगठन की भूमिका इराक की सुरक्षा व्यवस्था और राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। लैथ अल-खजाली की उपप्रधानमंत्री पद पर नियुक्ति इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे इराक की सत्ता में ईरान समर्थक समूहों के प्रभाव को लेकर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि, किसी नेता की नियुक्ति अपने आप में यह साबित नहीं करती कि इराक सरकार की सभी नीतियां ईरान के हितों के अनुरूप होंगी।
इराक की सरकारों को लंबे समय से दो प्रमुख क्षेत्रीय शक्तियों—अमेरिका और ईरान—के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखना पड़ा है। दोनों देशों के इराक में अलग-अलग रणनीतिक हित हैं, जबकि बगदाद अपनी संप्रभुता और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की कोशिश करता रहा है।
अमेरिका की ओर से क्या प्रतिक्रिया आई?
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लैथ अल-खजाली की नियुक्ति पर अमेरिकी सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल सामने नहीं आई थी। हालांकि, अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद जो विल्सन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर नियुक्ति की आलोचना की। उन्होंने अल-खजाली को आतंकवादी और ईरान के प्रभाव में काम करने वाला नेता बताया। उन्होंने असाइब अहल अल-हक पर अमेरिकियों और इराकियों की हत्या में शामिल होने के आरोप भी लगाए।
यह बयान अमेरिकी राजनीतिक हलकों में इस नियुक्ति को लेकर मौजूद चिंता को दर्शाता है। यदि वाशिंगटन इस मामले को द्विपक्षीय संबंधों से जोड़ता है, तो इराक और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग तथा राजनीतिक संवाद पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव दोनों सरकारों के आगामी फैसलों पर निर्भर करेगा।
कैबिनेट में किन अन्य पदों पर हुई नियुक्तियां?
इराकी संसद ने उपप्रधानमंत्री पद के अलावा गृह, रक्षा, योजना, उच्च शिक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान और संस्कृति मंत्रालयों सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर भी नियुक्तियों को मंजूरी दी। कैबिनेट के अन्य पदों पर नियुक्तियां इससे पहले की जा चुकी थीं। प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने कहा कि रिक्त पदों को भरने के बाद सरकार अब अपने कार्यक्रमों को तेजी से लागू करने पर ध्यान देगी। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और इराक की संप्रभुता मजबूत करने का भी संकल्प जताया।
इराक सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती देश में विदेशी सैन्य मौजूदगी और गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों की भूमिका को लेकर है। प्रधानमंत्री ने अमेरिकी सेना की पूर्ण वापसी सुनिश्चित करने और सशस्त्र समूहों के हथियारों पर नियंत्रण मजबूत करने की बात कही है।
हालांकि, कुछ प्रभावशाली मिलिशिया समूह हथियार छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं। असाइब अहल अल-हक को उन समूहों में गिना गया है, जिन्होंने हथियार सौंपने की प्रक्रिया पर सहमति जताई है। इस दिशा में वास्तविक प्रगति इराक की आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता के लिए अहम होगी।








