इस हफ्ते शेयर बाजार में दबाव, ये 4 कारण बदल सकते हैं मार्केट का मूड

इस हफ्ते शेयर बाजार में दबाव, ये 4 कारण बदल सकते हैं मार्केट का मूड

इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में दबाव दिख रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट, मिडिल ईस्ट तनाव, तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिका के कमजोर रोजगार आंकड़े बाजार की सेंटीमेंट प्रभावित कर रहे हैं।

Stock Market: पिछले कुछ दिनों से भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिली है। बीते चार ट्रेडिंग सेशन में सेंसेक्स और निफ्टी लगभग 3 प्रतिशत तक लुढ़क गए। शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 1,100 अंक गिरकर 78,870.95 पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी 50 24,438.70 के स्तर पर बंद हुआ। कई बड़े शेयरों में भारी बिकवाली के कारण बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप में एक ही दिन में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। 

इस सप्ताह निवेशकों के मूड पर कुछ प्रमुख वैश्विक और घरेलू कारक असर डाल सकते हैं। आइए जानते हैं उन 4 प्रमुख कारणों के बारे में जो मार्केट की दिशा तय कर सकते हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव

मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों के नेताओं ने चेतावनी दी है कि संघर्ष अभी और गंभीर हो सकता है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि यह संघर्ष अभी शुरू हुआ है और डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्पष्ट किया कि युद्ध की कोई निश्चित समय सीमा नहीं है। इस तनाव का असर वैश्विक मार्केट पर देखने को मिल रहा है। निवेशक सुरक्षा और तेल सप्लाई को लेकर चिंतित हैं, जिससे शेयर बाजार की सेंटीमेंट कमजोर हुई है।

कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर के पार

मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी देखने को मिली है। संघर्ष शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड लगभग 62 डॉलर प्रति बैरल पर था, लेकिन शुक्रवार तक यह 92.69 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। 

वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत 90.90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं। तेल महंगा होने से एनर्जी की लागत बढ़ेगी, जिसका असर कंपनियों की लागत और महंगाई पर पड़ेगा। इसके साथ ही करंट अकाउंट डेफिसिट और कॉर्पोरेट मार्जिन पर भी दबाव बढ़ सकता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली

इस हफ्ते विदेशी निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली की है। एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने 6,030 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं घरेलू निवेशकों ने 6,971 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जिससे कुछ हद तक बिकवाली का असर कम हुआ। 

हालांकि इस महीने अब तक विदेशी निवेशकों ने लगभग 30,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण निवेशकों में डर बना हुआ है, जिससे FII लगातार बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं।

अमेरिका के कमजोर रोजगार आंकड़े

फरवरी में अमेरिका के रोजगार बाजार में कमजोरी देखने को मिली। ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में नौकरियों की संख्या में 92,000 की गिरावट आई। जनवरी में लगभग 126,000 नौकरियां बनाई गई थीं। अर्थशास्त्रियों ने 50,000 नई नौकरियों की उम्मीद जताई थी, लेकिन इसके बजाय नौकरियों में कमी आई। 

इसके साथ ही बेरोजगारी दर में भी बढ़ोतरी हुई और यह 4.3% से बढ़कर 4.4% हो गई। अमेरिका में रोजगार बाजार की कमजोरी वैश्विक निवेशकों के भरोसे पर असर डाल सकती है और इससे भारतीय मार्केट में भी सेंटीमेंट दबाव में रह सकती है।

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