क्या अमेरिका की स्पेशल फोर्स ईरान में तैनात होगी? US‑इज़राइल की सीक्रेट बैठक, ट्रंप ने युद्ध के बीच चेतावनी दी

क्या अमेरिका की स्पेशल फोर्स ईरान में तैनात होगी? US‑इज़राइल की सीक्रेट बैठक, ट्रंप ने युद्ध के बीच चेतावनी दी

अमेरिका और इज़राइल ईरान के परमाणु भंडार पर संभावित सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहे हैं। CENTCOM और ट्रंप ने चेतावनी जारी की। ईरान पर हमले और ड्रोन क्षति की रिपोर्ट के बीच वैश्विक सुरक्षा चिंता बढ़ गई है।

US Israel Attack Iran: मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और इज़रायल के बीच ईरान के परमाणु यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करने के लिए संभावित सैन्य ऑपरेशन पर गुप्त चर्चा हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें ईरान में अमेरिकी स्पेशल फोर्स की तैनाती की संभावना पर भी विचार किया गया है। इस ऑपरेशन का उद्देश्य ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना और इसे किसी भी जोखिम से बचाना है।

CENTCOM ने दी कड़ी चेतावनी

इस बीच यूएस के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी अमेरिकी नागरिक को नुकसान पहुंचाता है या उन्हें कहीं भी धमकी देता है, तो अमेरिका उसे ढूंढ कर समाप्त कर देगा। इस चेतावनी के साथ United States Central Command (CENTCOM) ने 21 सेकंड का वीडियो भी साझा किया। वीडियो में अमेरिकी सेना के हाल के सैन्य अभियानों और वाहनों व इमारतों को निशाना बनाते हुए दिखाया गया। इसका मकसद था कि अमेरिका किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ट्रंप ने किया बड़ा दावा

यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने युद्ध में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर दिया है। उनके अनुसार यह कदम दुनिया से एक बड़े खतरे को दूर करने जैसा है। ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी हमलों में ईरान की नौसेना लगभग नष्ट हो गई है और 44 जहाज ध्वस्त कर दिए गए हैं। इसके अलावा ईरान के अधिकांश लड़ाकू विमान और मिसाइल क्षमताओं को भी भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि मिसाइल बनाने वाले कई कारखानों पर हमले किए गए, जिससे ईरान की सैन्य क्षमता काफी कम हो गई।

ईरान के स्कूल पर हमले पर ट्रंप का बयान

हाल ही में ईरान में एक लड़कियों के स्कूल पर बम गिरने की खबर आई। इस पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। उनका दावा था कि यह घटना ईरान के अपने हथियारों की गलत दिशा या तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुई हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की ड्रोन क्षमता कमजोर हो गई है और अब पहले की तुलना में बहुत कम मिसाइलें दागी जा रही हैं। लगभग 70 प्रतिशत रॉकेट लॉन्चर भी नष्ट हो गए हैं, जो ईरान के लिए बड़ा झटका है।

युद्ध की समय सीमा

ट्रंप ने युद्ध की समय सीमा को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक आवश्यक होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि ईरान की सेना अब लगभग खत्म होने की स्थिति में है। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा कि कूटनीतिक समाधान की संभावना अभी भी बनी हुई है, लेकिन पहले हुई बातचीत में ईरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते के लिए तैयार नहीं दिखा।

ईरान का यूरेनियम भंडार

ईरान ने दावा किया है कि उसे यूरेनियम इनरिचमेंट करने का अधिकार है। उनके पास 60 प्रतिशत तक समृद्ध ईंधन है, जो लगभग 11 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त माना जा सकता है। इसी कारण अमेरिका और उसके सहयोगियों की चिंता बढ़ गई है। यह पूरा संकट 28 फरवरी को शुरू हुए संयुक्त अमेरिकी-इज़रायली सैन्य अभियान के बाद और तेज हो गया। इस ऑपरेशन में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत की खबर सामने आई। इसके बाद ईरान ने कई देशों में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए।

इज़रायल की सैन्य कार्रवाई

इज़रायल रक्षा बल ने बताया कि उनकी वायु सेना ने तेहरान में कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इन हमलों में ईरान की सैन्य इकाइयों को ईंधन देने वाले भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया गया। इज़रायली सेना का कहना है कि इन हमलों से ईरान की सैन्य व्यवस्था कमजोर हुई है और उसके ठिकानों को नुकसान पहुंचा है।

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