ISRO सात महीने बाद सितंबर में फिर शुरू करेगा लॉन्च, GISAT-1A की पहले सप्ताह में उड़ान

ISRO सितंबर के पहले सप्ताह में GISAT-1A लॉन्च करेगा। जनवरी में PSLV-C62 मिशन की विफलता के बाद करीब सात महीने बाद लॉन्च गतिविधियां फिर शुरू होंगी।

ISRO सात महीने के ठहराव के बाद सितंबर के पहले सप्ताह में GISAT-1A के लॉन्च के साथ मिशन दोबारा शुरू करने की तैयारी में है। जनवरी में PSLV-C62 मिशन की विफलता के बाद लॉन्च गतिविधियां प्रभावित हुई थीं।

श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) सितंबर के पहले सप्ताह में GISAT-1A अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। यह लॉन्च एजेंसी के लिए करीब सात महीने के अंतराल के बाद वापसी का संकेत है। अधिकारियों के अनुसार, GISAT-1A के बाद नवंबर में NVS-03 को लॉन्च किए जाने की संभावना है।

सात महीने बाद फिर शुरू होंगे ISRO के लॉन्च

ISRO लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर नियमित लॉन्च गतिविधियों को गति देने की तैयारी में है। श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र पर कई महीनों से तैयार दो प्रमुख उपग्रहों में GISAT-1A और NVS-03 शामिल हैं। अब GISAT-1A को सितंबर के पहले सप्ताह में लॉन्च किए जाने की योजना है।

यह मिशन ISRO के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ लॉन्च में तकनीकी गड़बड़ियों के कारण उपग्रह निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच सके थे। जनवरी में PSLV-C62/EOS-N1 मिशन की विफलता के बाद लॉन्च गतिविधियों की गति पर असर पड़ा था।

GISAT-1A से आपदा और कृषि निगरानी में मदद

GISAT-1A को Geo Imaging Satellite के नाम से जाना जाता है, जबकि नई नामकरण व्यवस्था के तहत इसे EOS-05 भी कहा जा रहा है। यह 2021 में असफल हुए GISAT-1 यानी EOS-03 का स्थान लेने वाला उपग्रह है।

नए उपग्रह की अनुमानित मिशन लाइफ 10 साल है। इसे बड़े क्षेत्रों की लगातार और कम अंतराल पर तस्वीरें लेने के लिए तैयार किया गया है। इससे प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी के साथ कृषि और वानिकी जैसे क्षेत्रों में भी उपयोगी डेटा मिलने की उम्मीद है।

GISAT-1 मिशन 2021 में रॉकेट के अंतिम प्रोपल्शन चरण के इंजन में समस्या के कारण निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था। ऐसे में GISAT-1A का सफल प्रक्षेपण ISRO के लिए तकनीकी और परिचालन दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

NVS-03 लॉन्च से NavIC को मिलेगी मजबूती

GISAT-1A के बाद NVS-03 को नवंबर में लॉन्च किए जाने की संभावना है। यह मिशन भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC के लिए विशेष महत्व रखता है।

NVS-02 के मिशन में उपग्रह को निर्धारित कक्षा तक पहुंचाने में समस्या आने के बाद NavIC की परिचालन क्षमता प्रभावित हुई है। केंद्र सरकार के अनुसार, मौजूदा NavIC समूह में तीन उपग्रह पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाओं के लिए उपलब्ध हैं, जबकि बुनियादी स्वतंत्र पोजिशनिंग सेवा के लिए कम से कम चार सक्रिय उपग्रहों की आवश्यकता होती है।

फिलहाल भारतीय सशस्त्र बल NavIC के संकेतों का इस्तेमाल अमेरिका के GPS, यूरोपीय संघ के Galileo और रूस के GLONASS जैसे अन्य नेविगेशन सिस्टम के साथ मिलाकर कर रहे हैं।

हाल के मिशनों में सामने आईं तकनीकी चुनौतियां

ISRO के हालिया मिशनों में कुछ असफलताओं ने लॉन्च कार्यक्रम पर असर डाला है। जनवरी में PSLV-C62/EOS-N1 मिशन कथित तौर पर तीसरे चरण में आई तकनीकी समस्या के कारण असफल हुआ था। इससे पहले PSLV-C61 मिशन में भी EOS-09 को निर्धारित कक्षा में पहुंचाने में समस्या आई थी।

इसके अलावा GSLV-F15 से लॉन्च किया गया NVS-02 उपग्रह भी कक्षा बढ़ाने की प्रक्रिया में आई समस्या के कारण अपने निर्धारित गंतव्य तक नहीं पहुंच सका था। हालांकि GSLV-F15 रॉकेट ने सामान्य रूप से काम किया था।

इन घटनाओं के बावजूद ISRO ने आने वाले वर्षों के लिए महत्वाकांक्षी लॉन्च कार्यक्रम तैयार किया है। सितंबर में GISAT-1A और इसके बाद NVS-03 का संभावित प्रक्षेपण एजेंसी के लिए इस कार्यक्रम को फिर गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

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