भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) इस साल का पहला लॉन्च मिशन आज, सोमवार 12 जनवरी 2026 को करेगा। इस मिशन में PSLV-C62 रॉकेट के जरिए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-N1 को प्राथमिक पेलोड के रूप में कक्षा में स्थापित किया जाएगा।
नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) साल 2026 का पहला मिशन आज, सोमवार 12 जनवरी, 2026 को लॉन्च करेगा। इस मिशन के तहत PSLV-C62 रॉकेट के माध्यम से प्राथमिक पेलोड के रूप में पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट EOS-N1 को कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही इस मिशन में कुल 15 सह-यात्री उपग्रहों का भी प्रक्षेपण किया जाएगा। यह PSLV की 64वीं उड़ान होगी और PSLV-DL वैरिएंट का इस्तेमाल किया जाएगा।
रॉकेट को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के लॉन्च पैड-1 से लॉन्च किया जाएगा। इसरो के अनुसार वाहन एकीकरण (Vehicle Integration) का काम पूरा हो चुका है और अंतिम प्री-लॉन्च जांचें चल रही हैं।
EOS-N1: मुख्य उपग्रह और महत्व
इस मिशन का मुख्य उपग्रह EOS-N1 है, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के लिए विकसित किया गया है। यह लगभग 400 किलोग्राम वजन का हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट है। EOS-N1 का प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित क्षेत्रों में डेटा प्रदान करना है:
- रक्षा निगरानी: सीमा क्षेत्रों और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी।
- कृषि आकलन: फसल की स्थिति, पैदावार और कृषि योजना के लिए डेटा।
- शहरी मानचित्रण: शहरों के विस्तार, निर्माण और जमीन उपयोग का मूल्यांकन।
- पर्यावरणीय ट्रैकिंग: जलवायु, वनस्पति और पर्यावरणीय बदलाव पर निगरानी।
EOS-N1 12 मीटर की उच्च रेजोल्यूशन इमेजिंग क्षमता के साथ इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सह-यात्री उपग्रह और अन्य पेलोड
इस मिशन में EOS-N1 के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय और वाणिज्यिक उपग्रह शामिल हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- KID (Kestrel Initial Technology Demonstrator): स्पेनिश स्टार्टअप का 25 किलोग्राम का री-एंट्री टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर, जो दक्षिण प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन के साथ री-एंट्री का परीक्षण करेगा।
- अन्य उपग्रह: भारत के साथ-साथ मॉरीशस, लक्ज़मबर्ग, UAE, सिंगापुर, यूरोप और अमेरिका के कई वाणिज्यिक और शोध उपग्रह इस मिशन में शामिल हैं।
PSLV: ISRO का वर्क हॉर्स
PSLV को ISRO का वर्क हॉर्स माना जाता है। अब तक इस रॉकेट ने कई ऐतिहासिक मिशन सफलतापूर्वक अंजाम दिए हैं:
- चंद्रयान-1
- मंगल ऑर्बिटर मिशन (MOM)
- आदित्य-एल1 मिशन
साल 2017 में PSLV ने एक ही मिशन में 104 उपग्रहों का प्रक्षेपण कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। यह रॉकेट अपने विश्वसनीय प्रदर्शन के कारण ISRO के प्रमुख मिशनों का आधार बनता है।हालांकि PSLV की अब तक की उड़ानों में अधिकतर सफल रही हैं, लेकिन पिछले साल मई में PSLV-C61 मिशन विफल हो गया था। ऐसे में PSLV-C62 का लॉन्च ISRO के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह संगठन की विश्वसनीयता और तकनीकी क्षमता को पुनः साबित करने का अवसर है।
इस मिशन की कुल अवधि लगभग 1 घंटा 48 मिनट रहने की उम्मीद है। लॉन्च के बाद सभी उपग्रहों को 505 किलोमीटर की सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा।











