ओडिशा के तटीय शहर पुरी में गुरुवार से शुरू होने वाली विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के भव्य रथ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ग्रैंड रोड पर निकलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
Rath Yatra: ओडिशा के पवित्र शहर पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 का शुभारंभ आज से हो रहा है। यह भारत के सबसे बड़े और ऐतिहासिक धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसमें हर वर्ष देश ही नहीं बल्कि दुनिया के विभिन्न देशों से भी लाखों श्रद्धालु भाग लेने पहुंचते हैं। भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा भव्य रथों पर विराजमान होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक की यात्रा करेंगे और भक्तों को दर्शन देंगे।
रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और परंपरा का वैश्विक प्रतीक भी मानी जाती है। इस वर्ष भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और प्रबंधन की व्यवस्था की है।
तीनों भव्य रथ पूरी तरह तैयार
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए तैयार किए गए तीनों पारंपरिक रथ पूरी तरह सजकर तैयार हैं। भगवान बलभद्र का रथ तालध्वज, देवी सुभद्रा का दर्पदलन और भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष सिंहद्वार के सामने ग्रैंड रोड पर स्थापित किए गए हैं।पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के तहत देवताओं से आज्ञामाला प्राप्त होने के बाद रथों को मंदिर परिसर से बाहर लाया गया। अब श्रद्धालु रथों के दर्शन करने के साथ-साथ ऐतिहासिक रथ खींचने की परंपरा का हिस्सा बन सकेंगे।
लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी की उम्मीद
पुरी रथ यात्रा को दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालुओं के पुरी पहुंचने की संभावना है। भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल, मॉरीशस और अन्य देशों से भी भक्त इस आध्यात्मिक आयोजन में भाग लेने के लिए पहुंचे हैं।
रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों को रस्सियों से खींचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस सेवा में भाग लेने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम
विशाल जनसमूह को देखते हुए ओडिशा सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय सशस्त्र बलों की 15 कंपनियों के लगभग 1,500 जवान तैनात किए गए हैं। इनके अलावा ओडिशा पुलिस के करीब 13,000 कर्मी पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे।
राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG), रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल हैं। भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक से होगी निगरानी
इस वर्ष सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। ओडिशा पुलिस के अनुसार, पूरे आयोजन की निगरानी ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के माध्यम से की जाएगी। इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और नियंत्रण कक्ष से पूरे आयोजन पर लगातार नजर रखी जाएगी।
समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और ओडिशा मरीन पुलिस द्वारा संयुक्त गश्त भी शुरू की गई है। समुद्र तट पर लगभग 500 लाइफगार्ड तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।








