जैसलमेर में चलती स्कूल बस में लगी भीषण आग, 17 बच्चे बाल-बाल बचे; फिटनेस सर्टिफिकेट भी था एक्सपायर

जैसलमेर में 17 बच्चों से भरी स्कूल बस में आग लग गई। चालक ने समय रहते सभी बच्चों को बाहर निकाल लिया। बस का फिटनेस प्रमाणपत्र 29 जुलाई को खत्म हो चुका था।

जैसलमेर में मंगलवार सुबह 17 बच्चों को ले जा रही स्कूल बस में आग लग गई। इंजन से धुआं निकलते ही चालक ने बस रोककर सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। दमकल की तीन गाड़ियों ने आग बुझाई, लेकिन बस और बच्चों का सामान जल गया।

जैसलमेर: राजस्थान के जैसलमेर जिले में मंगलवार सुबह एक बड़ा हादसा टल गया, जब 17 बच्चों को लेकर जा रही एक स्कूल बस में अचानक आग लग गई। इंजन से धुआं निकलता देखकर चालक ने तत्काल बस रोक दी और सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। कुछ ही देर में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया और बस जलकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

यह घटना जैसलमेर के सदर थाना क्षेत्र में धऊवा गांव के पास सुबह करीब 6:30 बजे हुई। हादसे के वक्त बस पिथला गांव से बच्चों को लेकर डाबला रोड स्थित एसएम पब्लिक स्कूल जा रही थी। बस में सवार सभी 17 बच्चों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया, जिससे किसी बच्चे के घायल होने की सूचना नहीं है। हालांकि आग की वजह से बच्चों के स्कूल बैग, कॉपियां, किताबें और बस में रखा अन्य सामान जल गया।

इंजन से धुआं निकलते ही चालक ने दिखाई सूझबूझ

पुलिस के अनुसार, बस धऊवा गांव के पास पहुंची थी, तभी सड़क पर बने एक गड्ढे में आगे का पहिया आने से बस को अचानक तेज झटका लगा। इसके बाद इंजन वाले हिस्से से धुआं निकलने लगा। चालक ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत बस को सड़क किनारे रोका और बच्चों को बाहर निकालना शुरू कर दिया।

चालक की तत्परता से सभी बच्चों को सुरक्षित बस से बाहर निकाल लिया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने भी मौके पर पहुंचकर बच्चों को बस से दूर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में मदद की। कुछ ही समय में बस में आग की लपटें तेज हो गईं और देखते ही देखते पूरा वाहन आग की चपेट में आ गया।

कुछ ही मिनटों में आग का गोला बनी बस

प्रत्यक्ष घटनाक्रम के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि बच्चों को बाहर निकालने के कुछ ही मिनट बाद बस बुरी तरह जलने लगी। आग की लपटें दूर से दिखाई दे रही थीं और घटना के बाद सड़क पर आसपास के लोग भी जमा हो गए।

सूचना मिलते ही दमकल विभाग की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। अग्निशमन कर्मियों ने पानी की बौछार कर आग पर काबू पाने की कोशिश की। काफी प्रयास के बाद आग बुझाई जा सकी, लेकिन तब तक बस का अधिकांश हिस्सा पूरी तरह जल चुका था।

आग बुझने के बाद बस के अंदर और बाहर बच्चों की जली हुई किताबें, कॉपियां और अन्य सामान दिखाई दिया। हादसे में किसी बच्चे को चोट नहीं आई, लेकिन उनके पढ़ाई से जुड़े जरूरी सामान के जलने से उन्हें नुकसान हुआ।

शॉर्ट सर्किट को माना जा रहा शुरुआती कारण

पुलिस की प्रारंभिक जांच में बस में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। सदर थाना प्रभारी महेंद्र कुमार सीरवी ने बताया कि बस में सवार सभी बच्चे सुरक्षित हैं और उन्हें उनके परिजनों के साथ घर भेज दिया गया है।

पुलिस ने घटना के तकनीकी और अन्य पहलुओं की जांच शुरू कर दी है। इसमें बस की स्थिति, इलेक्ट्रिकल वायरिंग और वाहन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

बस का फिटनेस प्रमाणपत्र 13 दिन पहले हो चुका था खत्म

हादसे के बाद बस के फिटनेस प्रमाणपत्र को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। जिला परिवहन अधिकारी (DTO) टीकूराम पूनड़ के अनुसार, बस का फिटनेस प्रमाणपत्र 29 जुलाई 2026 को समाप्त हो गया था। यानी हादसे के दिन वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र करीब 13 दिन से वैध नहीं था।

DTO के मुताबिक, हादसे के कारणों के साथ बस के दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि बस के अन्य दस्तावेज पूरे बताए जा रहे हैं, लेकिन फिटनेस की स्थिति की जांच की जाएगी और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिटनेस जांच की व्यवस्था को लेकर भी उठे सवाल

परिवहन विभाग के अधिकारी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर पिछले नवंबर से फिटनेस संबंधी काम बंद है और अब यह प्रक्रिया जोधपुर में की जा रही है। ऐसे में स्कूल बस जैसे बच्चों को ले जाने वाले वाहनों की फिटनेस और नियमित तकनीकी जांच को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्कूल बसों की नियमित फिटनेस जांच सड़क सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। खासतौर पर बच्चों को लेकर चलने वाले वाहनों में इंजन, वायरिंग, ब्रेक, टायर, आपातकालीन निकास और अग्निशमन उपकरणों की स्थिति की नियमित जांच जरूरी होती है।

समय पर कार्रवाई से टला बड़ा हादसा

इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि चालक ने धुआं दिखाई देने के तुरंत बाद बस रोक दी। अगर आग लगने के बाद बच्चों को बस से बाहर निकालने में देरी होती, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। बस में 17 बच्चे सवार थे और आग तेजी से फैलने के कारण कुछ ही मिनटों में वाहन पूरी तरह जल गया।

स्थानीय लोगों की मदद और दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई ने भी स्थिति को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिए जाने के कारण यह घटना किसी बड़ी जनहानि में बदलने से बच गई।

स्कूल बसों की सुरक्षा फिर चर्चा में

जैसलमेर की यह घटना स्कूल बसों की सुरक्षा और नियमित निरीक्षण की जरूरत को एक बार फिर सामने लाती है। बच्चों को स्कूल ले जाने और वापस घर पहुंचाने वाले वाहनों में किसी भी तकनीकी खराबी की अनदेखी गंभीर परिणाम दे सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूल बस संचालकों को निर्धारित अवधि पर वाहन की फिटनेस जांच करानी चाहिए और इलेक्ट्रिकल सिस्टम समेत सभी महत्वपूर्ण हिस्सों का निरीक्षण कराना चाहिए। आग से बचाव के लिए बस में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन स्थिति से निपटने की व्यवस्था भी जरूरी है।

पुलिस और परिवहन विभाग की जांच जारी

फिलहाल पुलिस और परिवहन विभाग हादसे के कारणों की जांच कर रहे हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आग वास्तव में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी या इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी वजह थी। साथ ही वाहन के फिटनेस प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों की वैधता भी जांच के दायरे में है।

हादसे में कोई बच्चा घायल नहीं हुआ, लेकिन स्कूल बस का पूरी तरह जल जाना वाहन की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित विभागों की ओर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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