हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन और बुनियादी ढांचे को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) की 9 अगस्त तक की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में 124 सड़कें बंद हैं और 255 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर रीजन (DTRs) के प्रभावित होने से बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश में मानसून की भारी बारिश ने राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, अचानक बाढ़, पेड़ और पत्थर गिरने जैसी घटनाओं के साथ सड़क दुर्घटनाओं ने भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मानसून से जुड़ी घटनाओं और सड़क हादसों में अब तक 155 लोगों की जान जा चुकी है।
स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में 259 सड़कें फिलहाल आवाजाही के लिए बंद हैं। इसके अलावा 255 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर (DTRs) के प्रभावित होने से कई इलाकों में बिजली आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए अभियान तेज कर दिया है।
मंडी में सबसे ज्यादा सड़कें बंद
भारी बारिश और भूस्खलन से सड़क नेटवर्क सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मंडी जिला सड़क बंद होने के मामले में सबसे आगे है। यहां 88 सड़कें बंद हैं। इसके बाद कुल्लू में 39 और शिमला में 13 सड़कें प्रभावित हैं। पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण कई मार्गों पर मलबा जमा हो गया है। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ जरूरी सामान और राहत सामग्री की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। प्रशासन की टीमें प्रमुख मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने में जुटी हैं।
मानसून से जुड़ी घटनाओं में 68 मौतें
SEOC के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में मानसून के दौरान दर्ज 155 मौतों में 68 मौतें सीधे आपदा से जुड़ी घटनाओं के कारण हुई हैं, जबकि 87 लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में गई है। आपदा से जुड़ी मौतों में भूस्खलन, अचानक आई बाढ़, डूबने, पेड़ या पत्थर गिरने और आग जैसी घटनाएं शामिल हैं। मंडी में आपदा से जुड़ी सबसे ज्यादा 14 मौतें दर्ज की गई हैं। कांगड़ा में 11, जबकि चंबा और शिमला में नौ-नौ लोगों की मौत हुई है। कुल्लू में आठ मौतें दर्ज की गई हैं।
सड़क हादसों के मामले में चंबा सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां 15 लोगों की जान गई। कुल्लू और शिमला में 12-12, जबकि कांगड़ा में 10 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई।

8,352 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान
भारी बारिश और मानसून से हुई तबाही ने राज्य के बुनियादी ढांचे, कृषि, सरकारी संपत्ति और निजी संपत्तियों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। सरकारी अनुमान के मुताबिक, अब तक कुल नुकसान 83,526.19 लाख रुपये, यानी लगभग 8,352.62 करोड़ रुपये है। नुकसान का सबसे बड़ा हिस्सा लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़ा है। PWD को करीब 61,585.43 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है। वहीं, जल शक्ति विभाग को लगभग 19,986.05 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
बारिश और आपदा का असर लोगों के घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी पड़ा है। राज्य में 213 मकान पूरी तरह और 620 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा 256 कच्ची-पक्की झोपड़ियों और 22 दुकानों को भी नुकसान पहुंचा है।
पशुधन को भी भारी नुकसान
मानसून की आपदाओं ने इंसानी जीवन के साथ पशुधन और ग्रामीण संपत्तियों को भी प्रभावित किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न घटनाओं में करीब 200 पशुओं की मौत हुई है, जबकि 160 पशु-बाड़े क्षतिग्रस्त हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बाधित होने से प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सेवाएं पहुंचाना भी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। ऐसे इलाकों में राहत और पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।











