JPSC Scam: 13 साल में 12 परीक्षाएं पास करने वाले अभय तिवारी की गिरफ्तारी से खुला परीक्षा सिंडिकेट

JPSC Scam में अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद कथित परीक्षा सिंडिकेट की जांच तेज है। एजेंसी लेनदेन और परीक्षा हेरफेर की पड़ताल कर रही है।

झारखंड JPSC परीक्षा घोटाले में गिरफ्तार अभय तिवारी से पूछताछ के दौरान कथित परीक्षा धांधली और लेनदेन से जुड़े कई खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी अब करोड़ों रुपये के कथित सिंडिकेट और अन्य आरोपितों की भूमिका खंगाल रही है।

रांची: JPSC परीक्षा घोटाले की जांच में गिरफ्तार अभय तिवारी से पूछताछ के बाद कथित परीक्षा सिंडिकेट से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, अभय ने 13 वर्षों में 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं और TDPL से भी जुड़े रहे। पूछताछ में परीक्षा में कथित हेराफेरी, अभ्यर्थियों से रकम वसूली और चयन प्रक्रिया प्रभावित करने के आरोपों की जांच आगे बढ़ी है।

अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद जांच में तेजी

झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और मेधा घोटाले की जांच के दौरान अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी का नाम प्रमुखता से सामने आया है। गोड्डा के पोड़ैयाहाट में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर कार्यरत रहे अभय तिवारी को सीआईडी ने जुलाई 2026 में गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें रांची लाकर पूछताछ की गई।

जांच के दौरान अभय तिवारी के TDPL यानी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े होने की बात सामने आई है। बताया गया है कि कंपनी में वह मनोज कुमार तिवारी के नाम से मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर काम करते थे। TDPL झारखंड में JPSC और JSSC से जुड़ी कई परीक्षाओं के संचालन में शामिल रही है।

13 साल में 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने का दावा

सीआईडी के अनुसार, अभय तिवारी ने करीब 13 वर्षों में 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं। इनमें पुलिस अवर निरीक्षक, भारतीय नौसेना, BARC, CRPF हेड कांस्टेबल और नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड से जुड़ी परीक्षाओं के अलावा JSSC PGT, JSSC CGL और JPSC की विभिन्न परीक्षाएं शामिल बताई गई हैं।

उनकी असाधारण परीक्षा सफलता अब जांच के दायरे में है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन परीक्षाओं में उनकी सफलता सामान्य प्रक्रिया का परिणाम थी या किसी तरह की अनियमितता का लाभ उन्हें मिला था।

जांच में उनके परिवार के सदस्यों की सरकारी नौकरियों से जुड़े पहलुओं को भी देखा जा रहा है। अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी और उनकी पत्नी के JSSC CGL जैसी परीक्षाओं के जरिए चयनित होने की जानकारी भी सामने आई है।

गिरफ्तारी के बाद सामने आए कथित लेनदेन के आरोप

सीआईडी ने 22 जुलाई 2026 को अभय तिवारी को गोड्डा के पोड़ैयाहाट से गिरफ्तार किया था। उनके किराए के मकान से करीब पांच लाख रुपये नकद बरामद किए जाने की बात सामने आई है। गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ने उनसे रिमांड पर पूछताछ की।

जांच के अनुसार, अभय तिवारी पर अभ्यर्थियों को परीक्षा में चयन की गारंटी देने और इसके बदले बड़ी रकम लेने का आरोप है। पूछताछ में प्रारंभिक परीक्षा से लेकर अंतिम चयन और इंटरव्यू में अंक बढ़ाने तक के लिए कथित तौर पर अलग-अलग रकम तय होने की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है।

हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। सीआईडी अभय तिवारी के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कथित लेनदेन और परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप की जांच कर रही है।

परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर के आरोपों की जांच

पूछताछ में कथित तौर पर परीक्षा की OMR शीट में बदलाव, उत्तर कुंजी से संबंधित जानकारी लीक करने और इंटरव्यू में अंक बढ़ाने जैसे आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन गतिविधियों में कौन-कौन लोग शामिल थे और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की इसमें क्या भूमिका रही।

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू TDPL से संबंधित है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि परीक्षा संचालन का ठेका कंपनी को किस प्रक्रिया के तहत मिला और इसमें किसी तरह की अनियमितता या आर्थिक लेनदेन हुआ या नहीं।

सीआईडी की जांच जारी, आगे और खुलासे की संभावना

अभय तिवारी से पूछताछ के आधार पर सीआईडी अब मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। JPSC के पूर्व पदाधिकारियों और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। मामले में सामने आए आरोपों के आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

छात्र संगठन और विपक्षी दल इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। फिलहाल सीआईडी की जांच जारी है और अभय तिवारी से पूछताछ के दौरान सामने आए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही कथित परीक्षा सिंडिकेट में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

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