जयशंकर बोले- तेल खरीद रोकने से नहीं थमेगी रूस-यूक्रेन जंग, भारत मध्यस्थता को तैयार

एस. जयशंकर ने कीव में कहा कि रूसी तेल की खरीद रोकने से युद्ध खत्म नहीं होगा। उन्होंने कूटनीति, बातचीत और समझौते को समाधान बताते हुए मध्यस्थता की पेशकश की।

एस. जयशंकर ने कीव में कहा कि रूसी तेल की खरीद रोकने से युद्ध खत्म नहीं होगा। उन्होंने कूटनीति, बातचीत और समझौते को समाधान बताते हुए मध्यस्थता की पेशकश की।

कीव: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर स्पष्ट कहा है कि किसी देश द्वारा रूसी तेल, खनिज या अन्य वस्तुओं की खरीद रोकने से यह संघर्ष समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि युद्ध का स्थायी समाधान केवल कूटनीति, बातचीत और समझौते के जरिए संभव है। कीव दौरे के दौरान जयशंकर ने भारत की ओर से शांति प्रयासों में मदद और जरूरत पड़ने पर मध्यस्थता करने की पेशकश भी की।

तेल खरीद पर रोक से युद्ध खत्म नहीं होगा: जयशंकर

जयशंकर ने गुरुवार को कीव में यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान को लेकर भारत का रुख दोहराया।

उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अब पांचवें साल में पहुंच चुका है और इसे तेल, एल्युमिना, खनिज, धातु या खाद जैसी वस्तुओं की खरीद अथवा रोक के जरिए समाप्त नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, युद्ध का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होने वाले समझौते में ही निहित है।

जयशंकर का बयान ऐसे समय आया है, जब रूस से तेल खरीद को लेकर भारत सहित कई देशों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और दबाव बना हुआ है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए।

भारत शांति प्रयासों में मदद के लिए तैयार

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त कराने में मदद करने के लिए तैयार है। जरूरत पड़ने पर भारत मध्यस्थता की भूमिका निभाने को भी तैयार है।

कीव में जयशंकर ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से भी मुलाकात की। दोनों देशों के बीच संबंधों के साथ-साथ युद्ध और क्षेत्रीय परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

भारत का रुख यह रहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच विवाद का समाधान दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत के जरिए होना चाहिए। नई दिल्ली ने कई मौकों पर सभी पक्षों से कूटनीतिक रास्ता अपनाने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है।

रूसी हमलों के बीच जयशंकर का कीव दौरा अहम: सिबिहा

यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने जयशंकर के कीव दौरे को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि रूस के लगातार हमलों के बीच भारतीय विदेश मंत्री की यूक्रेन यात्रा का विशेष महत्व है।

सिबिहा के मुताबिक, रूस यूक्रेन के शहरों, बंदरगाहों और नागरिक जहाजों को लगातार निशाना बना रहा है। ऐसे माहौल में भारत के विदेश मंत्री का यूक्रेन पहुंचना दोनों देशों के बीच संवाद के लिहाज से अहम है।

दोनों विदेश मंत्रियों ने ब्लैक सी में समुद्री यातायात को सामान्य करने और इससे जुड़ी वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर भी चर्चा की। सिबिहा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस रुख का स्वागत किया, जिसमें भारत लगातार युद्ध को बातचीत और कूटनीति के जरिए खत्म करने की वकालत करता रहा है।

भारत और यूक्रेन के बीच अगली अंतर-सरकारी आयोग की बैठक आयोजित करने पर भी सहमति बनी है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी में सहयोग पर चर्चा

जयशंकर और सिबिहा की बातचीत केवल युद्ध तक सीमित नहीं रही। दोनों नेताओं ने भारत और यूक्रेन के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की।

बातचीत में इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मास्युटिकल्स, टेक्नोलॉजी और डिजिटल सेक्टर जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए इन क्षेत्रों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत और यूक्रेन के संबंधों में युद्ध के कारण कई चुनौतियां आई हैं, लेकिन दोनों पक्ष आर्थिक और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

ब्लैक सी में जहाजों पर हमलों से बढ़ी चिंता

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ब्लैक सी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और व्यापारिक क्षेत्र बन चुका है। जयशंकर ने इस क्षेत्र में भारतीय नागरिकों सहित सभी नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

यूक्रेन के अनुसार, पिछले करीब डेढ़ महीने में रूस और यूक्रेन की ओर से 300 से अधिक जहाजों को निशाना बनाया गया है। इनमें अनाज ले जाने वाले जहाजों के अलावा तेल टैंकर और अन्य मालवाहक पोत भी शामिल हैं।

लगातार हमलों के कारण ब्लैक सी के समुद्री व्यापार पर असर पड़ रहा है। जहाज मालिक इस मार्ग से गुजरने में जोखिम महसूस कर रहे हैं। इससे परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ने की आशंका है।

जयशंकर बोले- तेल खरीद रोकने से नहीं थमेगी रूस-यूक्रेन जंग, भारत मध्यस्थता को तैयार

वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ सकता है असर

ब्लैक सी के जरिए रूस और यूक्रेन से बड़ी मात्रा में कृषि उत्पादों का निर्यात होता है। दोनों देश मिलकर दुनिया के करीब 30 प्रतिशत गेहूं निर्यात में योगदान देते हैं।

ऐसे में समुद्री मार्ग पर लगातार हमले जारी रहने से वैश्विक खाद्य आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा है। विशेष रूप से गेहूं और मक्का जैसी प्रमुख कृषि वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

समुद्री व्यापार में बाधा आने से निर्यात की लागत बढ़ सकती है और कई देशों तक खाद्य सामग्री की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। विकासशील और आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति विशेष चिंता का विषय बन सकती है।

2022 से जारी है रूस-यूक्रेन युद्ध

रूस और यूक्रेन के बीच पूर्ण पैमाने का युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था। इसके बाद रूस ने यूक्रेन के कई क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया और दोनों देशों के बीच संघर्ष लगातार जारी रहा।

युद्ध के कारण बड़े पैमाने पर जनहानि हुई है। हजारों नागरिकों और सैनिकों के मारे जाने की रिपोर्ट सामने आई है, जबकि लाखों यूक्रेनियन विस्थापित हुए हैं। जून 2023 तक करीब 80 लाख लोग यूक्रेन छोड़कर दूसरे देशों में चले गए थे।

युद्ध के दौरान रूस और यूक्रेन के बीच कई दौर की बातचीत और शांति प्रयास हुए, लेकिन अब तक ऐसा समझौता नहीं हो सका है जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो।

डोनबास बना शांति समझौते में बड़ी अड़चन

रूस और यूक्रेन के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा डोनबास क्षेत्र है। रूस इस क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है, जबकि यूक्रेन अपनी जमीन छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले कह चुके हैं कि शांति समझौते के लिए यूक्रेन को रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों पर अपना दावा छोड़ना होगा और इन क्षेत्रों को रूस का हिस्सा स्वीकार करना होगा।

यूक्रेन इस मांग को स्वीकार नहीं करता। इसी कारण क्षेत्रीय नियंत्रण का मुद्दा दोनों देशों के बीच संभावित शांति समझौते की सबसे बड़ी बाधाओं में शामिल है।

ट्रम्प भी युद्ध खत्म कराने के प्रयास में सक्रिय

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए दोनों पक्षों के नेताओं के साथ बातचीत कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अलास्का में मुलाकात भी की थी।

यह यात्रा कई दशकों बाद किसी रूसी नेता की अलास्का यात्रा के रूप में महत्वपूर्ण रही। हालांकि, रूस और यूक्रेन के बीच मूल विवादों का स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है।

5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड के दौरे पर जयशंकर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर 3 से 5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड की आधिकारिक यात्रा पर हैं। यूक्रेन यात्रा पूरी करने के बाद वह पोलैंड जाएंगे।

पोलैंड में जयशंकर उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यात्रा का उद्देश्य दोनों यूरोपीय देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत करना है।

इस दौरान क्षेत्रीय परिस्थितियों, द्विपक्षीय संबंधों और साझा हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

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