जल्लीकट्टू पर बयान से बढ़ा विवाद, TVK विधायक करुप्पैया ने जताया खेद; बोले- खेल का अपमान करना मकसद नहीं था

TVK पार्टी के विधायक करुप्पैया ने जल्लीकट्टू पर अपनी विधानसभा टिप्पणी को लेकर सफाई दी। उन्होने खेल का अपमान करने से इनकार किया और भावनाएं आहत होने पर खेद जताया

तमिलनाडु के TVK विधायक करुप्पैया ने जल्लीकट्टू पर अपनी विधानसभा टिप्पणी को लेकर खेद जताया है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पारंपरिक खेल की आलोचना करना नहीं था, बल्कि अलंगानल्लूर में सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और बंद चीनी मिल को लेकर प्राथमिकताओं पर सवाल उठाना था।

मदुरै: तमिलनाडु के मदुरै जिले की शोलावंदन विधानसभा सीट से तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के विधायक करुप्पैया ने जल्लीकट्टू से जुड़ी अपनी हालिया विधानसभा टिप्पणी पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य तमिलनाडु के पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण खेल जल्लीकट्टू को किसी भी तरह से नीचा दिखाना नहीं था। विधायक ने कहा कि यदि उनके शब्दों से इस खेल से जुड़े युवाओं या समर्थकों की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका खेद है।

करुप्पैया की यह सफाई तमिलनाडु विधानसभा में अलंगानल्लूर के पास बने जल्लीकट्टू एरिना को लेकर दिए गए उनके बयान के बाद सामने आई है। उनके बयान की आलोचना होने लगी थी और इसे पारंपरिक खेल के प्रति नकारात्मक टिप्पणी के रूप में देखा गया। इसके बाद विधायक ने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति जल्लीकट्टू को लेकर नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के इस्तेमाल की प्राथमिकताओं को लेकर थी।

करुप्पैया ने जल्लीकट्टू को बताया तमिल संस्कृति का हिस्सा

अपने स्पष्टीकरण में करुप्पैया ने जल्लीकट्टू को तमिल संस्कृति से गहराई से जुड़ा ऐतिहासिक और वीरतापूर्ण खेल बताया। उन्होंने कहा कि इसकी सांस्कृतिक अहमियत को लेकर कोई विवाद नहीं हो सकता।

विधायक ने यह भी कहा कि जिस क्षेत्र से जल्लीकट्टू की परंपरा विशेष रूप से जुड़ी हुई है, वह उनके अपने जन्म और पालन-पोषण से भी संबंधित है। इसलिए उनके लिए इस खेल की सांस्कृतिक पहचान और महत्व को समझना स्वाभाविक है।

उन्होंने साफ किया कि उन्होंने कभी भी जल्लीकट्टू को खत्म करने या उसकी परंपरा का विरोध करने की बात नहीं कही। उनका मुद्दा सरकारी धन के इस्तेमाल और क्षेत्र की आर्थिक जरूरतों को लेकर था।

विधानसभा में किस बात पर उठे थे सवाल?

विधानसभा में अपने भाषण के दौरान करुप्पैया ने अलंगानल्लूर के पास बनाए गए जल्लीकट्टू एरिना पर खर्च को लेकर सवाल उठाए थे। उनका दावा था कि इस सुविधा के निर्माण पर करीब 63 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

विधायक का तर्क था कि इसी क्षेत्र में नेशनल कोऑपरेटिव शुगर मिल लंबे समय से बंद है और उसे दोबारा शुरू करने के लिए धन की आवश्यकता है। उनके अनुसार, चीनी मिल को पुनर्जीवित करने के लिए लगभग 50 करोड़ रुपये की जरूरत हो सकती है।

करुप्पैया ने कहा कि मिल दोबारा शुरू होने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इसी वजह से उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में स्थानीय रोजगार और आर्थिक पुनरुद्धार को प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए थी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान जल्लीकट्टू की परंपरा के खिलाफ नहीं था, बल्कि सरकार के खर्च की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने के संदर्भ में था।

एरिना की उपयोगिता पर भी सवाल

करुप्पैया ने विधानसभा में जल्लीकट्टू एरिना से स्थानीय लोगों को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ पर भी सवाल उठाया था। उनका कहना था कि यदि बड़ी राशि किसी परियोजना पर खर्च की जाती है तो उसके सामाजिक और आर्थिक लाभों का भी आकलन होना चाहिए।

विधायक ने यह मुद्दा स्थानीय रोजगार और क्षेत्र के आर्थिक विकास से जोड़ते हुए कहा कि बंद चीनी मिल को दोबारा शुरू करने से बड़ी संख्या में लोगों को फायदा हो सकता था।

हालांकि, जल्लीकट्टू समर्थकों के लिए अलंगानल्लूर और आसपास के क्षेत्र में इस खेल का सांस्कृतिक महत्व बेहद बड़ा है। ऐसे में एरिना पर खर्च को लेकर की गई टिप्पणी को लेकर प्रतिक्रिया सामने आई।

करुप्पैया ने बाद में कहा कि उनके बयान को व्यापक संदर्भ से अलग करके देखा गया और इसी वजह से गलतफहमी पैदा हुई।

विदेशी शैली के एरिना पर भी उठाया सवाल

TVK विधायक ने जल्लीकट्टू एरिना के डिजाइन को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या स्पेन जैसे यूरोपीय देशों में मौजूद बुलफाइटिंग एरिना से प्रेरित स्टेडियम शैली का ढांचा तमिलनाडु की पारंपरिक जल्लीकट्टू संस्कृति के अनुरूप है।

उनका तर्क था कि जल्लीकट्टू की अपनी स्थानीय और ग्रामीण पहचान है। यह खेल पीढ़ियों से गांवों और स्थानीय समुदायों की परंपराओं के बीच संरक्षित रहा है। इसलिए इसके आयोजन का स्वरूप भी तमिल संस्कृति और स्थानीय परंपराओं से जुड़ा रहना चाहिए।

करुप्पैया ने कहा कि जल्लीकट्टू को उसकी मूल पहचान के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, आधुनिक सुविधाएं विकसित करना अलग बात है, लेकिन खेल की सांस्कृतिक जड़ों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।

छात्रों की पढ़ाई को लेकर भी जताई चिंता

विधायक ने जल्लीकट्टू आयोजनों के दौरान छात्रों की भागीदारी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले DMK शासन के दौरान अलंगानल्लूर और पालामेडु में जल्लीकट्टू कार्यक्रमों के बाद नए एरिना में भी आयोजन किया गया।

करुप्पैया का दावा था कि लगातार कई कार्यक्रम होने के कारण कुछ स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी पढ़ाई से अनुपस्थित होकर आयोजनों में पहुंच रहे थे।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में इस विषय को उठाने का एक उद्देश्य युवाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक करना था। उनका कहना था कि युवाओं को पढ़ाई पूरी करके डिग्री हासिल करने और बेहतर करियर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य युवाओं को जल्लीकट्टू से दूर करना नहीं, बल्कि शिक्षा और भविष्य के बीच संतुलन बनाए रखने की सलाह देना था।

बोले- मैंने कभी जल्लीकट्टू का अपमान नहीं किया

विवाद बढ़ने के बाद करुप्पैया ने अपने बयान की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी जल्लीकट्टू जैसे तमिलों के वीरतापूर्ण पारंपरिक खेल का अपमान नहीं किया।

उन्होंने कहा कि अगर उनकी बातों से युवा पीढ़ी, जल्लीकट्टू समर्थकों या खेल से जुड़े लोगों को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका अफसोस है। उन्होंने अपने बयान के पीछे की मंशा को दोबारा समझाते हुए कहा कि वह केवल सार्वजनिक धन के बेहतर इस्तेमाल और छात्रों के हित से जुड़े मुद्दों को सामने रखना चाहते थे।

उनकी सफाई का मुख्य उद्देश्य जल्लीकट्टू के सांस्कृतिक महत्व और उनके विधानसभा में उठाए गए आर्थिक सवालों के बीच अंतर स्पष्ट करना था।

जल्लीकट्टू तमिलनाडु की पहचान से जुड़ा खेल

जल्लीकट्टू तमिलनाडु के ग्रामीण और सांस्कृतिक जीवन से जुड़ा पारंपरिक खेल है। इसका आयोजन विशेष रूप से पोंगल के आसपास किया जाता है। इसमें प्रशिक्षित बैल और प्रतिभागी आमने-सामने होते हैं और प्रतिभागी बैल को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं।

यह खेल लंबे समय से तमिल पहचान और ग्रामीण परंपराओं का हिस्सा रहा है। पिछले वर्षों में जल्लीकट्टू को लेकर कानूनी और राजनीतिक बहस भी होती रही है। समर्थकों का कहना रहा है कि यह केवल एक खेल नहीं बल्कि तमिल संस्कृति और स्थानीय पशुपालन परंपराओं से जुड़ी विरासत है।

इसी सांस्कृतिक संवेदनशीलता के कारण जल्लीकट्टू से संबंधित किसी भी राजनीतिक टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।

राजनीतिक बयान से ज्यादा बड़ी बहस सार्वजनिक खर्च की

करुप्पैया की सफाई से यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई है कि उनका मूल मुद्दा जल्लीकट्टू के आयोजन या परंपरा का विरोध नहीं था। वह सरकारी धन के उपयोग को लेकर अपनी प्राथमिकताओं की बात कर रहे थे।

एक तरफ जल्लीकट्टू के लिए आधुनिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की मांग है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में बंद उद्योगों और रोजगार की समस्या भी स्थानीय राजनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा है। करुप्पैया ने इसी आर्थिक पक्ष को विधानसभा में उठाने की कोशिश की।

अब उनके स्पष्टीकरण के बाद विवाद किस दिशा में जाता है, यह राजनीतिक प्रतिक्रिया और जल्लीकट्टू समर्थकों के रुख पर निर्भर करेगा।

युवाओं को लेकर विधायक का संदेश

करुप्पैया ने अपने बयान में युवाओं की शिक्षा और भविष्य को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उनका कहना है कि पारंपरिक खेलों और सांस्कृतिक गतिविधियों का सम्मान करते हुए युवाओं को अपनी पढ़ाई और करियर पर भी ध्यान देना चाहिए।

उनके मुताबिक, युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करें, डिग्री हासिल करें और रोजगार के बेहतर अवसर तलाशें। यही कारण है कि उन्होंने जल्लीकट्टू आयोजनों में छात्रों की लगातार भागीदारी को लेकर चिंता जताई।

विधायक ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य खेल और संस्कृति को कमजोर करना नहीं था, बल्कि युवाओं को शिक्षा की ओर प्रोत्साहित करना और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग पर बहस करना था।

विवाद के बाद सामने आई स्पष्टता

अलंगानल्लूर जल्लीकट्टू एरिना पर विधानसभा में की गई टिप्पणी ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को जन्म दिया। हालांकि, करुप्पैया ने अब स्पष्ट कर दिया है कि वह जल्लीकट्टू की सांस्कृतिक पहचान और तमिल समाज में उसके महत्व का सम्मान करते हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी आपत्ति एरिना पर खर्च, स्थानीय आर्थिक जरूरतों और छात्रों की भागीदारी जैसे मुद्दों को लेकर थी। साथ ही, उन्होंने उन लोगों से खेद जताया है जिन्हें उनके शब्दों से ठेस पहुंची।

फिलहाल, विधायक की सफाई के बाद यह स्पष्ट है कि विवाद का केंद्र जल्लीकट्टू के विरोध से ज्यादा सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और पारंपरिक खेल के आधुनिक स्वरूप को लेकर उनकी राजनीतिक टिप्पणी है।

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