झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर के लिए स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 की रैंकिंग चिंता बढ़ाने वाली है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के तहत जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में जमशेदपुर को 36वां स्थान मिला है। शहर को कुल 147.3 अंक मिले। इसी श्रेणी में झारखंड के धनबाद ने 174.5 अंक के साथ 18वां और रांची ने 162.5 अंक के साथ 27वां स्थान हासिल किया। यानी राज्य के तीन बड़े शहरों में जमशेदपुर का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा।
इस रैंकिंग में सिर्फ हवा में प्रदूषण की मात्रा को आधार नहीं बनाया गया है। सर्वेक्षण में शहरों की ओर से वायु प्रदूषण कम करने के लिए उठाए गए कदमों और उनके क्रियान्वयन का भी आकलन किया जाता है। सड़क की धूल पर नियंत्रण, ठोस कचरा प्रबंधन, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के उपाय, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण एवं विध्वंस से निकलने वाली धूल-कचरा और जन-जागरूकता जैसे कई पहलुओं को मूल्यांकन में शामिल किया जाता है। इसलिए 36वां स्थान जमशेदपुर की समग्र स्वच्छ वायु प्रबंधन व्यवस्था के प्रदर्शन को दर्शाता है, इसे केवल किसी एक दिन की एयर क्वालिटी रीडिंग के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
देश के 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में उत्तर प्रदेश का लखनऊ 198 अंक के साथ पहले स्थान पर रहा। इसके बाद इंदौर 197 अंक और जबलपुर 195 अंक के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। वहीं जमशेदपुर 147.3 अंक के साथ 36वें स्थान पर रहा। सूची में उसके नीचे चेन्नई 147.7 अंक के साथ 35वें स्थान पर थी, जबकि जमशेदपुर के बाद भी कुछ बड़े शहर शामिल रहे।
झारखंड के लिहाज से देखें तो तस्वीर और ज्यादा स्पष्ट हो जाती है। धनबाद ने 174.5 अंक हासिल कर राज्य के तीनों बड़े शहरों में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और राष्ट्रीय स्तर पर 18वां स्थान प्राप्त किया। रांची 162.5 अंक के साथ 27वें नंबर पर रही। जमशेदपुर को 147.3 अंक मिले और वह 36वें स्थान पर रहा। इस तरह धनबाद और जमशेदपुर के बीच 27.2 अंकों का अंतर रहा, जबकि रांची भी जमशेदपुर से 15.2 अंक आगे रही।
जमशेदपुर की रैंकिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में शामिल है। यहां बड़े उद्योगों के साथ-साथ भारी वाहनों की आवाजाही, सड़क यातायात, निर्माण गतिविधियां और औद्योगिक क्षेत्र मौजूद हैं। ऐसे शहर में हवा को साफ रखने के लिए केवल उद्योगों के उत्सर्जन पर नियंत्रण पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सड़क की धूल, ट्रैफिक से निकलने वाले धुएं, खुले में कचरा जलाने और निर्माण स्थलों से उठने वाले धूल कणों पर भी लगातार निगरानी जरूरी होती है।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के मूल्यांकन में इन्हीं अलग-अलग स्रोतों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए शहरों की ओर से किए गए प्रयासों को देखा जाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम से जुड़े पोर्टल पर भी सड़क की धूल, वाहन, उद्योग, कचरा और जन-जागरूकता को वायु प्रदूषण नियंत्रण के प्रमुख क्षेत्रों के तौर पर दर्ज किया गया है।
जमशेदपुर के लिए चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि शहर की अर्थव्यवस्था और पहचान औद्योगिक गतिविधियों से गहराई से जुड़ी हुई है। औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना शहर के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जमशेदपुर के लिए तैयार की गई क्लीन एयर एक्शन प्लान में भी वाहनों, पुराने डीजल वाहनों, उद्योगों के उत्सर्जन और गैर-मोटराइज्ड परिवहन जैसे क्षेत्रों में सुधार के कदम दर्ज किए गए हैं।
इस एक्शन प्लान में पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने, प्रदूषणकारी व्यावसायिक डीजल वाहनों पर कार्रवाई, उद्योगों की निगरानी बढ़ाने और प्रदूषण मानकों का पालन नहीं करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई जैसे उपाय शामिल हैं। इससे साफ है कि जमशेदपुर में स्वच्छ हवा के लिए प्रदूषण के कई स्रोतों पर एक साथ काम करने की जरूरत है।
शहर में सड़क की धूल भी वायु प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकती है। सड़क निर्माण, मरम्मत, खुदाई, भारी वाहनों की आवाजाही और खुले स्थानों पर जमा मिट्टी के कारण सूक्ष्म धूल कण हवा में पहुंच सकते हैं। ऐसे में नियमित सड़क सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और मलबे के सही निस्तारण जैसे उपायों की भूमिका बढ़ जाती है।
वाहनों से निकलने वाला धुआं भी शहरी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। बढ़ते यातायात के बीच पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या को नियंत्रित करना, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना और ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर करना स्वच्छ हवा के लिए जरूरी माना जाता है। CPCB की जमशेदपुर क्लीन एयर एक्शन प्लान में भी वाहन प्रदूषण को कम करने के लिए पुराने वाहनों और डीजल चालित वाणिज्यिक वाहनों से संबंधित कदमों का उल्लेख है।
जमशेदपुर की 36वीं रैंकिंग का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सर्वेक्षण में सिर्फ प्रदूषण का स्तर नहीं बल्कि स्थानीय निकायों द्वारा उठाए गए कदमों का प्रदर्शन भी देखा जाता है। इसलिए आने वाले समय में शहर की रैंकिंग सुधारने के लिए नगर निकाय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, परिवहन विभाग और औद्योगिक इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत होगी। कचरा प्रबंधन से लेकर सड़क की धूल और औद्योगिक उत्सर्जन तक हर क्षेत्र में सुधार का असर समग्र स्कोर पर पड़ सकता है।
इस सर्वेक्षण में झारखंड के लिए एक सकारात्मक पहलू यह भी सामने आया कि राज्य के अलग-अलग शहरों के कुछ वार्डों को स्वच्छ वायु से जुड़े प्रदर्शन के लिए सम्मान मिला। रांची नगर निगम के वार्ड 29 को 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में चुना गया, जबकि वार्ड 26 को 10 हजार से 30 हजार आबादी वाले वर्ग में सम्मान मिला। धनबाद के वार्ड 15 को 10 हजार से कम आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में सम्मानित किया गया।
इससे यह संकेत मिलता है कि शहरों के भीतर भी स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण के प्रदर्शन में अंतर हो सकता है। किसी शहर की कुल रैंकिंग कमजोर होने के बावजूद उसके कुछ इलाके बेहतर काम कर सकते हैं। ऐसे सफल मॉडलों को शहर के दूसरे हिस्सों में लागू करना भी प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
धनबाद का प्रदर्शन जमशेदपुर के लिए एक तरह से तुलना का आधार भी बन गया है। कोयला खनन और औद्योगिक गतिविधियों के लिए पहचाने जाने वाले धनबाद ने 174.5 अंक हासिल कर 18वां स्थान प्राप्त किया। रिपोर्ट के मुताबिक धनबाद पिछले साल 29वें स्थान पर था और इस बार 11 पायदान ऊपर आया है।
रांची भी जमशेदपुर से आगे रही, हालांकि राजधानी को 27वां स्थान मिला। 162.5 अंक के साथ रांची का स्कोर जमशेदपुर से बेहतर रहा। इससे झारखंड के तीनों प्रमुख शहरों के बीच स्वच्छ वायु प्रबंधन को लेकर प्रदर्शन का अंतर सामने आता है।
जमशेदपुर के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी रैंकिंग सुधारने की होगी। इसके लिए शहर को अपने मौजूदा एयर एक्शन प्लान को प्रभावी तरीके से लागू करने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों की लगातार पहचान करनी होगी। खासकर सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों, वाहनों और औद्योगिक उत्सर्जन पर नियमित निगरानी बढ़ाना जरूरी होगा।
साथ ही आम लोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी। खुले में कचरा जलाने से बचना, निजी वाहनों के बजाय जहां संभव हो सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करना, निर्माण सामग्री को ढककर रखना और सड़क किनारे धूल को नियंत्रित करना जैसे कदम सामूहिक रूप से शहर की हवा को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। स्वच्छ वायु कार्यक्रम में जन-जागरूकता को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया जाता है।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 का परिणाम जमशेदपुर के लिए एक चेतावनी के साथ सुधार का अवसर भी लेकर आया है। 147.3 अंक और 36वां स्थान बताता है कि शहर को अपने प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण प्रबंधन के प्रयासों को और मजबूत करने की जरूरत है। वहीं धनबाद का 18वां और रांची का 27वां स्थान दिखाता है कि झारखंड के शहरों के बीच प्रदर्शन का अंतर काफी बड़ा है।
अब आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जमशेदपुर प्रशासन इस रैंकिंग से मिले संकेतों के आधार पर किन क्षेत्रों में सुधार करता है। यदि सड़क की धूल, कचरा प्रबंधन, वाहनों और औद्योगिक उत्सर्जन पर प्रभावी कार्रवाई के साथ नियमित मॉनिटरिंग और जनभागीदारी बढ़ाई जाती है, तो अगले सर्वेक्षण में शहर अपनी स्थिति बेहतर कर सकता है। फिलहाल 36वां स्थान जमशेदपुर के लिए यह याद दिलाने वाला परिणाम है कि औद्योगिक विकास के साथ स्वच्छ हवा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार प्रयास करना जरूरी है।









