इंटरनेट पर अभिनेत्री जाह्नवी कपूर के नाम, तस्वीर और पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता गौतम भाटिया को न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) नियुक्त किया है।
Janhvi Kapoor Case: बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर के नाम, तस्वीर और पहचान के कथित अनधिकृत इस्तेमाल से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम कदम उठाया है। अदालत ने इस मामले में सामने आए व्यापक कानूनी सवालों पर विचार करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता गौतम भाटिया को एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किया है। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने 3 सितंबर को यह आदेश पारित किया।
मामला इंटरनेट पर अभिनेत्री की पहचान और छवि के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जाह्नवी कपूर के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना किया गया। इसके अलावा कुछ मामलों में आपत्तिजनक या अश्लील सामग्री, पहचान की नकल और अभिनेत्री की लोकप्रियता का कथित तौर पर व्यावसायिक फायदा उठाने के मुद्दे भी उठाए गए हैं।
जाह्नवी कपूर ने हाई कोर्ट में क्यों दायर की याचिका?
अभिनेत्री की याचिका का मुख्य केंद्र उनकी पर्सनैलिटी राइट्स और पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल से जुड़ा है। याचिका में इंटरनेट पर मौजूद ऐसी सामग्री पर आपत्ति जताई गई है, जिसमें उनके नाम, तस्वीर या पहचान का कथित रूप से इस तरह इस्तेमाल किया गया जिससे उनकी प्रतिष्ठा और निजी अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
मामले में अभिनेत्री की ओर से बड़ी संख्या में ऑनलाइन लिंक और वेब पेजों की पहचान की गई है। याचिका के अनुसार, कुल 6,884 URL ऐसे हैं जिन पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। इन लिंक में कथित रूप से अलग-अलग प्रकार की सामग्री मौजूद है और सभी मामलों की प्रकृति एक जैसी नहीं है। यही पहलू इस मामले को कानूनी तौर पर जटिल बनाता है।
6,884 URL पर एक साथ कार्रवाई क्यों नहीं?
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दिल्ली हाई कोर्ट ने सभी 6,884 URL को एक ही आदेश के जरिए हटाने की मांग को स्वीकार नहीं किया है। अदालत का रुख यह है कि इंटरनेट पर मौजूद हर सामग्री को केवल अभिनेत्री के नाम या तस्वीर से जुड़े होने के आधार पर एक समान नहीं माना जा सकता। अदालत अब इन URL को सामग्री की प्रकृति और उसके इस्तेमाल के उद्देश्य के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में देखने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
यानी यह जांचना महत्वपूर्ण होगा कि किसी लिंक पर किस तरह की सामग्री है, उसमें अभिनेत्री की पहचान का किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया और क्या वह इस्तेमाल कानूनी अधिकारों का उल्लंघन करता है। इससे इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री को हटाने के आदेश और किसी व्यक्ति के नाम या छवि की सुरक्षा के बीच संतुलन का सवाल भी सामने आता है।
गौतम भाटिया की नियुक्ति क्यों अहम?
मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता गौतम भाटिया को न्याय मित्र नियुक्त किया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एमिकस क्यूरी के तौर पर वह अदालत को ऐसे व्यापक कानूनी पहलुओं पर सहायता देंगे, जिनका असर केवल इस मामले तक सीमित नहीं हो सकता। डिजिटल युग में किसी सार्वजनिक हस्ती के नाम, तस्वीर, आवाज या पहचान का ऑनलाइन इस्तेमाल कई अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
इनमें सामान्य रिपोर्टिंग, सोशल मीडिया पोस्ट, विज्ञापन, मनोरंजन सामग्री और व्यावसायिक गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। ऐसे में हर इस्तेमाल को एक ही कानूनी श्रेणी में रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।









