मोदी और देवी-देवताओं को गाली दे रही थी नीशू जंतर-मंतर मारपीट केस में गिरफ्तार स्वतंत्र के चाचा बोले लड़की के पिता को भी अरेस्ट करो

स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद उनके चाचा ने निष्पक्ष जांच की मांग की। आरोप लगाया कि विवाद से पहले दूसरे पक्ष ने मोदी और देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
मोदी और देवी-देवताओं को गाली दे रही थी नीशू जंतर-मंतर मारपीट केस में गिरफ्तार स्वतंत्र के चाचा बोले लड़की के पिता को भी अरेस्ट करो
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर जून में हुए विवाद और मारपीट का मामला स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर चर्चा में है। स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया था। अदालत ने उन्हें एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा। उन पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़ी नीशू आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित मारपीट का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद अब बिहार के दरभंगा स्थित स्वतंत्र के पैतृक गांव ओझौल में भी उनके परिवार और ग्रामीणों की ओर से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।

स्वतंत्र के चाचा रंजीत झा ने आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान दूसरे पक्ष की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्र और देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। उनके मुताबिक, इन्हीं टिप्पणियों के बाद माहौल बिगड़ा और दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई। रंजीत झा ने कहा कि मामले की जांच केवल एक पक्ष को आधार बनाकर नहीं होनी चाहिए, बल्कि जंतर-मंतर पर हुई पूरी घटना और उसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। ये आरोप स्वतंत्र के परिवार की ओर से लगाए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

परिवार का कहना है कि स्वतंत्र को इस मामले में राजनीतिक दबाव के कारण निशाना बनाया जा रहा है। चाचा रंजीत झा ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच होने पर वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी। परिवार ने स्वतंत्र के खिलाफ लगाई गई पॉक्सो और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं पर भी सवाल उठाए हैं और इन धाराओं की समीक्षा की मांग की है। दूसरे चाचा अजित झा ने भी कहा कि यदि घटना में दोनों पक्षों की भूमिका सामने आती है तो कार्रवाई दोनों तरफ होनी चाहिए।

परिवार की ओर से यह भी दावा किया गया है कि जंतर-मंतर पर स्वतंत्र को पहले घेर लिया गया था और उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की कोशिश हुई थी। परिवार का कहना है कि इसी स्थिति में स्वतंत्र ने बचाव में प्रतिक्रिया दी और इस दौरान संजय कुमार को चोट लगी। हालांकि, यह स्वतंत्र के परिजनों का पक्ष है और मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच तथा अदालत की कार्यवाही में स्पष्ट होगी।

विवाद की शुरुआत 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन से जुड़ी बताई जाती है। CJP के प्रदर्शन में नीशू आजाद भी शामिल थीं। इसी दौरान उनके पिता संजय कुमार और स्वतंत्र भारद्वाज के बीच विवाद और मारपीट की घटना सामने आई। नीशू की ओर से आरोप लगाया गया कि उनके पिता पर हमला किया गया और उन्हें गंभीर चोटें आईं। बाद में इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया और स्वतंत्र भारद्वाज समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया।

मामला उस समय फिर सुर्खियों में आया जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक, वीडियो में स्वतंत्र ने जंतर-मंतर की घटना के दौरान संजय कुमार के सिर पर हमला करने की बात कही थी। उन्होंने यह भी दावा किया था कि घटना के दौरान उनके खिलाफ भी हमला हुआ था और उन्होंने आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी। वायरल वीडियो के बाद नीशू आजाद और उनके समर्थकों ने स्वतंत्र की गिरफ्तारी की मांग तेज कर दी थी।

इसके बाद CJP से जुड़े लोगों ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया और पुलिस से कार्रवाई की मांग की। पुलिस की ओर से कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत के सामने पेश किया गया, जहां से एक दिन की पुलिस हिरासत मंजूर हुई।

इस मामले में स्वतंत्र के खिलाफ दर्ज धाराओं को लेकर भी विवाद बना हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस केस में एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट समेत अन्य कानूनी प्रावधानों का जिक्र है। स्वतंत्र के परिवार का कहना है कि इन धाराओं के इस्तेमाल की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं पुलिस कार्रवाई का आधार शिकायत और जांच में सामने आए तथ्यों पर है। अदालत में मामले की आगे की सुनवाई और जांच के दौरान इन आरोपों की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

स्वतंत्र की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थन में भी प्रदर्शन हुआ। दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर कुछ हिंदू संगठनों और समर्थकों ने कार्रवाई का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि मामले में एकतरफा कार्रवाई की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ CJP से जुड़े लोगों ने स्वतंत्र के खिलाफ कार्रवाई को जरूरी बताते हुए पुलिस पर पहले कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया था। इस तरह यह मामला अब केवल मारपीट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया के कारण भी चर्चा में है।

स्वतंत्र भारद्वाज के पैतृक गांव ओझौल में भी उनके समर्थन में लोग सामने आए हैं। ग्रामीणों और परिवार के सदस्यों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि यदि घटना में स्वतंत्र की भूमिका की जांच हो रही है तो जंतर-मंतर पर मौजूद दूसरे लोगों की भूमिका और घटना से पहले की परिस्थितियों की भी जांच की जानी चाहिए। परिवार ने स्वतंत्र को जल्द राहत देने और उसके खिलाफ दर्ज धाराओं की समीक्षा करने की मांग की है।

दूसरी तरफ, नीशू आजाद के पक्ष से उनके पिता पर हमले को गंभीर घटना बताया गया है। नीशू का आरोप रहा है कि उनके पिता के साथ जंतर-मंतर पर मारपीट की गई और उन्हें सिर में गंभीर चोट आई। इस मामले को लेकर उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए थे। स्वतंत्र की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन के बाद पुलिस ने कार्रवाई की।

इसी बीच स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद नीशू आजाद और उनके पिता के खिलाफ भी शिकायत सामने आई है। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की एक वकील ने दिल्ली साइबर थाने में शिकायत देकर दोनों पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए हिंदू देवी-देवताओं के अपमान का आरोप लगाया और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में कुछ सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया गया है। हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों पर पुलिस की जांच और कानूनी कार्रवाई की स्थिति अलग विषय है।

इस पूरे विवाद में अब दोनों पक्षों की शिकायतों और आरोपों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। स्वतंत्र के परिवार का कहना है कि यदि नीशू या उनके पिता की ओर से भी कानून का उल्लंघन हुआ है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। परिवार का दावा है कि जंतर-मंतर पर हुई घटना को केवल स्वतंत्र की कथित मारपीट के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि विवाद की शुरुआत, दोनों पक्षों की गतिविधियों और मौके पर मौजूद लोगों के बयानों को भी जांच में शामिल किया जाना चाहिए।

फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज पुलिस हिरासत के बाद कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं और मामले की जांच जारी है। उनके परिवार की ओर से निष्पक्ष जांच की मांग और नीशू आजाद तथा उनके पिता के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग ने विवाद को और तूल दे दिया है। अब इस मामले में पुलिस की जांच, दर्ज शिकायतों और अदालत की आगे की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि जंतर-मंतर पर हुई घटना में किसकी क्या भूमिका थी और दोनों पक्षों के लगाए गए आरोपों में से कौन से आरोप कानूनी जांच में सही साबित होते हैं।

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