जवाई में लेपर्ड हैबिटेट के 1 किमी दायरे में होटल-रिसॉर्ट निर्माण पर रोक, पहाड़ काटने पर भी पाबंदी

राजस्थान हाईकोर्ट ने जवाई में लेपर्ड आवास, गुफाओं और प्रजनन स्थलों के 1 किमी दायरे में होटल-रिसॉर्ट निर्माण व पहाड़ काटने पर रोक लगाई।

राजस्थान हाईकोर्ट ने जवाई में लेपर्ड के आवास, गुफाओं, प्रजनन स्थलों और वन्यजीव कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने संवेदनशील क्षेत्रों के एक किलोमीटर दायरे को निर्माण-कंट्रोल जोन घोषित किया।

जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने जवाई इलाके में लेपर्ड के प्राकृतिक आवास और वन्यजीव कॉरिडोर की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने लेपर्ड के रहने की खास जगहों, गुफाओं और प्रजनन स्थलों के आसपास एक किलोमीटर के क्षेत्र में निर्माण पर रोक लगाई है। इस दायरे में होटल-रिसॉर्ट बनाने के साथ पहाड़ काटने जैसी गतिविधियों पर भी पाबंदी रहेगी।

लेपर्ड के आवास के आसपास बनेगा कंस्ट्रक्शन-कंट्रोल जोन

राजस्थान हाईकोर्ट ने जवाई क्षेत्र में लेपर्ड और उसके प्राकृतिक पर्यावास की सुरक्षा को लेकर अहम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने लेपर्ड के रहने की खास जगहों, उनकी गुफाओं, प्रजनन स्थलों और वन्यजीव कॉरिडोर को संवेदनशील मानते हुए इनके आसपास निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करने का फैसला किया है। इसके तहत इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों के चारों ओर एक किलोमीटर का दायरा ‘लेपर्ड हैबिटेट कंस्ट्रक्शन-कंट्रोल जोन’ घोषित किया गया है।

जवाई में लेपर्ड हैबिटेट के 1 किमी दायरे में होटल-रिसॉर्ट निर्माण पर रोक, पहाड़ काटने पर भी पाबंदी

इस फैसले का सीधा असर जवाई क्षेत्र में होने वाले निर्माण पर पड़ेगा। एक किलोमीटर के इस दायरे में होटल, रिसॉर्ट और अन्य निर्माण गतिविधियों पर रोक रहेगी। इसके अलावा प्राकृतिक पहाड़ियों को काटकर निर्माण करने जैसी गतिविधियां भी नहीं की जा सकेंगी। कोर्ट का आदेश जवाई के उस प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें लेपर्ड लंबे समय से रहते हैं।

गुफाओं और प्रजनन स्थलों की सुरक्षा पर जोर

जवाई क्षेत्र अपनी प्राकृतिक चट्टानों, पहाड़ियों और गुफाओं के लिए जाना जाता है। यही क्षेत्र लेपर्ड के लिए रहने और सुरक्षित ठिकाने के रूप में महत्वपूर्ण हैं। लेपर्ड की गुफाएं और प्रजनन स्थल उसके प्राकृतिक जीवनचक्र का अहम हिस्सा हैं। ऐसे क्षेत्रों के आसपास बड़े पैमाने पर निर्माण होने से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके सामान्य व्यवहार पर असर पड़ सकता है।

हाईकोर्ट के आदेश में लेपर्ड के इन संवेदनशील क्षेत्रों के साथ वन्यजीव कॉरिडोर को भी संरक्षण के दायरे में रखा गया है। वन्यजीव कॉरिडोर वे प्राकृतिक रास्ते होते हैं, जिनका इस्तेमाल वन्यजीव एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आने-जाने के लिए करते हैं। इन क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियां बढ़ने से वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

होटल-रिसॉर्ट निर्माण पर लगेगी रोक

जवाई में पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने के साथ होटल और रिसॉर्ट निर्माण भी महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद लेपर्ड के खास आवासीय क्षेत्रों के एक किलोमीटर दायरे में ऐसे निर्माण पर रोक रहेगी। इससे पर्यटन विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश को बल मिलेगा।

पहाड़ काटने पर रोक भी इस आदेश का अहम हिस्सा है। प्राकृतिक पहाड़ियों को नुकसान पहुंचाकर निर्माण करने से लेपर्ड के आवास और आसपास के पर्यावरण में बदलाव हो सकता है। ऐसे में कोर्ट ने संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण को नियंत्रित करने के साथ प्राकृतिक संरचना को बनाए रखने पर भी जोर दिया है।

वन्यजीव संरक्षण के लिए अहम माना जा रहा आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट का यह आदेश जवाई क्षेत्र में लेपर्ड के आवास, गुफाओं, प्रजनन स्थलों और वन्यजीव कॉरिडोर की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। एक किलोमीटर के निर्माण-कंट्रोल जोन से इन क्षेत्रों में मानवीय दखल को सीमित करने का प्रयास किया गया है।

इस व्यवस्था से जवाई के प्राकृतिक पर्यावास को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही क्षेत्र में पर्यटन और निर्माण गतिविधियों के विस्तार के दौरान वन्यजीवों के हितों को प्राथमिकता देने का आधार भी मजबूत होगा। कोर्ट का आदेश जवाई में लेपर्ड संरक्षण और प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर आगे की निर्माण गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण दिशा तय करता है।

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