संजय राउत का दावा- जेल में रहते शुरू हुआ कैंसर, राहुल गांधी ने कराया था टॉक्सिसिटी टेस्ट

संजय राउत ने दावा किया कि जेल में रहने के दौरान कैंसर शुरू हुआ। राहुल गांधी ने टॉक्सिसिटी टेस्ट की सलाह दी थी। नवंबर 2025 में बीमारी की पुष्टि हुई।

संजय राउत ने दावा किया कि जेल में रहने के दौरान उनके शरीर में कैंसर की शुरुआत हुई। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने टॉक्सिसिटी टेस्ट की सलाह दी थी। राउत के मुताबिक, नवंबर 2025 में पेट के कैंसर की पुष्टि हुई और इलाज जारी है।

मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने दावा किया है कि जेल में रहने के दौरान ही उनके शरीर में कैंसर की बीमारी की शुरुआत हुई थी। राउत के मुताबिक, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उन्हें टॉक्सिसिटी टेस्ट कराने की सलाह दी थी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि जेल में दिए जाने वाले भोजन में किसी तरह का जहरीला पदार्थ तो शामिल नहीं था।

राउत ने यह बात अपने जेल में बिताए समय और बाद में सामने आई स्वास्थ्य संबंधी समस्या का जिक्र करते हुए कही। उन्होंने मौजूदा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार इतनी क्रूर है कि वह कुछ भी कर सकती है। हालांकि, खाने में जहर मिलाए जाने की आशंका को लेकर राउत ने कोई प्रत्यक्ष प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया है।

2022 में पत्रा चॉल मामले में गिरफ्तार हुए थे राउत

संजय राउत को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 1 अगस्त 2022 को गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी मुंबई के गोरेगांव स्थित पत्रा चॉल पुनर्विकास परियोजना से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई थी।

ED ने आरोप लगाया था कि राउत की इस मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी भूमिका थी। राउत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी गिरफ्तारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया था।

गिरफ्तारी के बाद राउत को मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा गया। वह करीब 101 दिन जेल में रहे। 9 नवंबर 2022 को PMLA कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया।

उनकी गिरफ्तारी उस समय महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनी थी। राउत शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और पार्टी के मुखर सांसदों में उनकी गिनती होती है।

राउत बोले- जेल के दौरान स्वास्थ्य पर पड़ा असर

राउत ने दावा किया कि जेल में रहने के दौरान ही उनकी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां शुरू हुई थीं। उनके अनुसार, बाद में जांच में पेट के कैंसर की पुष्टि हुई।

राउत ने यह भी कहा कि जेल में रहने वाले अन्य राजनीतिक नेताओं की सेहत पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। उन्होंने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों के साथ कठोर व्यवहार किया जा रहा है।

हालांकि, इन दावों को रिपोर्ट करते समय यह स्पष्ट करना जरूरी है कि राउत द्वारा जेल के भोजन में कथित विषाक्त पदार्थों की आशंका जताई गई है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई स्वतंत्र चिकित्सकीय या जांच संबंधी निष्कर्ष सामने नहीं आया है जो यह साबित करता हो कि उनके कैंसर और जेल के भोजन के बीच कोई सीधा संबंध था।

राहुल गांधी ने टॉक्सिसिटी टेस्ट की दी थी सलाह

संजय राउत के अनुसार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनसे टॉक्सिसिटी टेस्ट कराने को कहा था। इस जांच का उद्देश्य कथित तौर पर यह पता लगाना था कि उनके शरीर में किसी जहरीले पदार्थ या विषैले तत्व की मौजूदगी तो नहीं थी।

राउत ने कहा कि राहुल गांधी की सलाह के बाद इस पहलू की जांच कराने पर विचार किया गया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस टेस्ट के नतीजे या उससे जुड़ी कोई विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

इसलिए टॉक्सिसिटी टेस्ट की सलाह और उसके पीछे बताई गई आशंका को राउत के बयान के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। इसे किसी चिकित्सकीय निष्कर्ष या सिद्ध तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।

नवंबर 2025 में कैंसर की पुष्टि का दावा

राउत के मुताबिक, उन्हें पेट के कैंसर का पता नवंबर 2025 में चला था। उन्होंने बताया कि दिवाली से लगभग 2 से 4 दिन पहले उनकी बीमारी की पुष्टि हुई।

राउत के भाई सुनील राउत ने उनकी जांच के लिए ब्लड टेस्ट कराया था। इसके बाद हुई चिकित्सकीय जांच में कैंसर की पुष्टि होने की बात राउत ने कही।

संजय राउत का दावा- जेल में रहते शुरू हुआ कैंसर, राहुल गांधी ने कराया था टॉक्सिसिटी टेस्ट

उनके अनुसार, इसके बाद से उनका इलाज जारी है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कैंसर के प्रकार, बीमारी की अवस्था, अस्पताल या उपचार की विस्तृत मेडिकल जानकारी का उल्लेख नहीं है।

पत्रा चॉल मामला क्या है?

पत्रा चॉल पुनर्विकास परियोजना मुंबई के गोरेगांव क्षेत्र से जुड़ा मामला है। इस परियोजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच ED ने की थी।

इसी जांच के सिलसिले में संजय राउत को अगस्त 2022 में गिरफ्तार किया गया था। केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई के बाद यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में प्रमुख विवादों में शामिल हो गया था।

राउत और उनके समर्थकों ने गिरफ्तारी को राजनीतिक कार्रवाई बताया था, जबकि जांच एजेंसी ने मामले में वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित आरोप लगाए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राउत 101 दिन तक आर्थर रोड जेल में रहे और नवंबर 2022 में अदालत से जमानत मिलने के बाद बाहर आए।

राउत ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

अपने बयान में संजय राउत ने मौजूदा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार की कार्यशैली इतनी क्रूर है कि वह कुछ भी कर सकती है।

राउत ने अपने स्वास्थ्य का संदर्भ देते हुए जेल में बंद रहे अन्य राजनीतिक नेताओं की खराब हालत का भी उल्लेख किया। हालांकि, उन्होंने जिन आरोपों और आशंकाओं का जिक्र किया, उनके समर्थन में उपलब्ध जानकारी में कोई स्वतंत्र जांच रिपोर्ट या आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

राजनीतिक बयानों में लगाए गए ऐसे आरोपों को संबंधित नेता के दावे के तौर पर देखना महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध न हो।

राजनीतिक विवाद के बीच स्वास्थ्य का मुद्दा

संजय राउत की गिरफ्तारी से लेकर उनके स्वास्थ्य संबंधी दावे तक, पत्रा चॉल मामला महाराष्ट्र की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय रहा है। 2022 में उनकी गिरफ्तारी के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे।

अब राउत द्वारा जेल के दौरान बीमारी शुरू होने और टॉक्सिसिटी टेस्ट की सलाह का जिक्र किए जाने से यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस में आ सकता है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इतना स्पष्ट है कि राउत को 2022 में पत्रा चॉल मामले में गिरफ्तार किया गया था, उन्होंने 101 दिन आर्थर रोड जेल में बिताए और नवंबर 2022 में जमानत पर रिहा हुए। राउत के अनुसार, नवंबर 2025 में उन्हें पेट के कैंसर का पता चला और उनका इलाज जारी है।

उनका यह दावा कि बीमारी की शुरुआत जेल में रहने के दौरान हुई और भोजन में विषाक्त पदार्थ की आशंका की जांच की जरूरत थी, फिलहाल उनके बयान पर आधारित है। इस दावे की स्वतंत्र चिकित्सकीय या जांच संबंधी पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

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