JD Vance on Iran Talks: बातचीत में प्रगति, अब ईरान के फैसले पर टिका आगे का रास्ता

US Iran Nuclear Talks 2026 बिना समझौते खत्म हुई। यूरेनियम मुद्दे पर मतभेद, जेडी वेंस ने प्रगति की बात कही। अब फैसला ईरान के हाथ में।

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई लंबी परमाणु वार्ता बिना अंतिम समझौते के समाप्त हो गई। यूरेनियम एनरिचमेंट को लेकर सहमति नहीं बन सकी। जेडी वेंस ने कहा कि बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन आगे का फैसला अब ईरान के हाथ में है।

US Iran Nuclear Talks 2026: अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत इस्लामाबाद में 21 घंटे तक चली, जो बिना किसी अंतिम समझौते के समाप्त हो गई। यह वार्ता पाकिस्तान की राजधानी में अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच हुई, जिसमें यूरेनियम एनरिचमेंट को लेकर मतभेद बने रहे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वार्ता में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन ईरान को अब आगे कदम उठाना होगा। दोनों देशों के बीच यह बातचीत इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसका असर वैश्विक ऊर्जा और सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

इस्लामाबाद वार्ता में क्या हुआ, क्यों नहीं बनी डील

इस उच्चस्तरीय बातचीत में अमेरिका ने ईरान पर परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने का दबाव बनाया, लेकिन ईरानी पक्ष यूरेनियम एनरिचमेंट रोकने की शर्त पर सहमत नहीं हुआ। इसी वजह से अंतिम समझौता संभव नहीं हो सका।

अमेरिकी पक्ष ने बातचीत को सकारात्मक बताया, लेकिन यह भी साफ किया कि ईरानी टीम के पास अंतिम निर्णय लेने का अधिकार सीमित था। चर्चा के बाद उन्हें तेहरान में शीर्ष नेतृत्व से मंजूरी लेनी होगी।

जेडी वेंस बोले, अब गेंद ईरान के पाले में

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि बातचीत “सही दिशा में आगे बढ़ी है” और कुछ ठोस प्रगति भी हुई है। उनके अनुसार ईरान ने कुछ कदम आगे बढ़ाए, लेकिन वह पर्याप्त नहीं थे।

वेंस ने साफ कहा कि अमेरिका ने अपनी सीमाएं तय कर दी हैं और अब आगे की पहल ईरान को करनी है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जा सकते।

आगे की राह और वैश्विक असर

वेंस के मुताबिक यह वार्ता सिर्फ परमाणु मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। अमेरिका का मानना है कि बातचीत के जरिए समाधान सबसे बेहतर रास्ता है।

हालांकि फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है, क्योंकि आगे का फैसला पूरी तरह तेहरान के राजनीतिक नेतृत्व पर निर्भर करता है। यदि सहमति बनती है तो यह दोनों देशों के बीच बड़े समझौते की दिशा में अहम कदम होगा।

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