झारखंड के 10,906 सरकारी स्कूलों का होगा सोशल ऑडिट, शिक्षा योजनाओं की होगी जमीनी जांच

झारखंड सरकार इस वर्ष 10,906 सरकारी स्कूलों का सोशल ऑडिट कराएगी। शिक्षा योजनाओं और सुविधाओं के जमीनी क्रियान्वयन की जांच होगी।

झारखंड सरकार इस वर्ष 10,906 सरकारी स्कूलों का सामाजिक अंकेक्षण कराएगी। इसके तहत समग्र शिक्षा अभियान और अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी। सरकार ने तीन वर्षों में सभी सरकारी स्कूलों का सोशल ऑडिट पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

रांची: झारखंड सरकार ने सरकारी स्कूलों के सोशल ऑडिट को लेकर बड़ा कदम उठाया है। इस वर्ष राज्य के 10,906 स्कूलों का सामाजिक अंकेक्षण कराया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से पहुंच रहा है और शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है।

इस वर्ष 10,906 सरकारी स्कूलों में होगा सोशल ऑडिट

झारखंड सरकार राज्य के सरकारी स्कूलों में संचालित योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए बड़े स्तर पर सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) कराएगी। इस वर्ष राज्य के 10,906 सरकारी स्कूलों को इसके लिए चुना गया है। सामाजिक अंकेक्षण के दौरान समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत चल रही विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों को सभी सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से मिल रहा है।

झारखंड के 10,906 सरकारी स्कूलों का होगा सोशल ऑडिट, शिक्षा योजनाओं की होगी जमीनी जांच

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने हाल ही में केंद्र सरकार को इस संबंध में जानकारी दी है। विभाग ने यह भी बताया कि अगले तीन वर्षों में राज्य के सभी सरकारी स्कूलों का सामाजिक अंकेक्षण पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों से ली जाएगी जानकारी

सामाजिक अंकेक्षण केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्कूलों में जाकर वास्तविक स्थिति का भी मूल्यांकन किया जाएगा। इसके तहत शिक्षकों, विद्यार्थियों, विद्यालय प्रबंधन समिति (VMC) के सदस्यों, अभिभावकों और गांव के अन्य लोगों से बातचीत कर योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी जुटाई जाएगी।

ऑडिट टीम यह भी जांचेगी कि स्कूलों में मिलने वाली सुविधाएं वास्तव में छात्रों तक पहुंच रही हैं या नहीं। यदि किसी योजना के संचालन में गड़बड़ी या कमी पाई जाती है, तो उसकी रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विभाग को भेजी जाएगी, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

इन योजनाओं और सुविधाओं की होगी समीक्षा

सामाजिक अंकेक्षण के दौरान कई महत्वपूर्ण योजनाओं और कार्यक्रमों की जांच की जाएगी। इसमें विद्यार्थियों को मिलने वाली निःशुल्क पाठ्य-पुस्तकें, स्कूल ड्रेस और स्कूल किट का वितरण प्रमुख रूप से शामिल होगा। इसके अलावा आईसीटी (ICT) योजना, व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) और समग्र शिक्षा अभियान के तहत संचालित अन्य कार्यक्रमों का भी मूल्यांकन किया जाएगा।

ऑडिट के दौरान कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय और नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय में छात्रों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की भी समीक्षा होगी। साथ ही पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना का सामाजिक अंकेक्षण अलग से किया जाएगा, ताकि भोजन की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था का भी मूल्यांकन हो सके।

ग्रामीण विकास विभाग की एजेंसी को मिल सकती है जिम्मेदारी

जानकारी के अनुसार, सामाजिक अंकेक्षण का कार्य ग्रामीण विकास विभाग की सामाजिक अंकेक्षण एजेंसी को सौंपा जा सकता है। इससे पहले भी यही एजेंसी सरकारी स्कूलों में इस तरह का ऑडिट कर चुकी है। केंद्र सरकार भी स्कूलों में सोशल ऑडिट को लेकर लगातार जोर दे रही है और राज्यों को नियमित रूप से इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

शिक्षा विभाग का मानना है कि सामाजिक अंकेक्षण से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी और यदि कहीं कोई कमी या अनियमितता होगी, तो उसे समय रहते दूर किया जा सकेगा। इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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