गर्भावस्था में कुछ दिनों की भीषण गर्मी भी बढ़ा सकती है नवजात के लिए खतरा, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि गर्भावस्था के दौरान कुछ दिनों की भीषण गर्मी समय से पहले प्रसव खतरा बढ़ा सकती है। गर्भवती महिलाओं को हीटवेव से जरूर बचना चाहिए

नई स्टडी में पाया गया है कि गर्भावस्था के दौरान तीन से चार दिनों की भीषण गर्मी समय से पहले प्रसव और कम वजन वाले नवजात का खतरा बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं को हीटवेव सुरक्षा योजनाओं में प्राथमिकता देने की सिफारिश की है।

pregnancy raise newborn risk: गर्भावस्था के दौरान कुछ दिनों तक रहने वाली अत्यधिक गर्मी भी नवजात शिशु के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। एक नए शोध में पाया गया है कि यदि गर्भवती महिला गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में लगातार तीन से चार दिनों तक अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहती है, तो समय से पहले प्रसव (Preterm Birth) का जोखिम बढ़ सकता है। वहीं, गर्भावस्था के मध्य चरण में हीटवेव का सामना करने पर कम वजन वाले शिशु के जन्म (Low Birth Weight) की संभावना अधिक हो सकती है।

यह अध्ययन भारत में बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि बदलती जलवायु के बीच गर्भवती महिलाओं को विशेष सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकता होनी चाहिए।

दो लाख से अधिक जन्मों के आंकड़ों का किया गया विश्लेषण

यह अध्ययन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली, ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड और अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया। इसमें वर्ष 2015 से 2020 के बीच भारत में जन्मे दो लाख से अधिक बच्चों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने गर्भावस्था की विभिन्न अवस्थाओं और उस अवधि में दर्ज तापमान के आंकड़ों का मिलान किया। विश्लेषण में पाया गया कि लगातार कुछ दिनों तक अत्यधिक गर्म मौसम रहने पर गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भस्थ शिशुओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

शुरुआती गर्भावस्था में गर्मी बढ़ा सकती है समय से पहले प्रसव का खतरा

अध्ययन के अनुसार, यदि गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में महिला अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आती है, तो समय से पहले बच्चे के जन्म की संभावना बढ़ जाती है। समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों को श्वसन संबंधी समस्याएं, संक्रमण और विकास संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक तापमान गर्भवती महिला के शरीर में तनाव बढ़ाता है, जिससे गर्भस्थ शिशु के विकास पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इस संबंध में जैविक प्रक्रियाओं पर अभी और विस्तृत शोध की आवश्यकता बताई गई है।

मध्य गर्भावस्था में हीटवेव से कम वजन वाले शिशु का जोखिम

शोध में यह भी सामने आया कि गर्भावस्था के मध्य चरण के दौरान भीषण गर्मी के संपर्क में आने वाली महिलाओं के यहां कम वजन वाले बच्चों के जन्म की संभावना अधिक रही। कम वजन वाले नवजातों में संक्रमण, कुपोषण, विकास में देरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा अपेक्षाकृत अधिक होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भस्थ शिशु का स्वस्थ विकास पर्याप्त पोषण, उचित रक्त प्रवाह और नियंत्रित शारीरिक तापमान पर निर्भर करता है। अत्यधिक गर्मी इन प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है।

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आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर महिलाएं अधिक प्रभावित

अध्ययन में यह भी पाया गया कि कम आय वाले परिवारों और कम शिक्षित महिलाओं पर हीटवेव का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक देखा गया। शोधकर्ताओं का मानना है कि ऐसे परिवारों में एयर कंडीशनिंग, ठंडे वातावरण, पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं और समय पर चिकित्सकीय सलाह तक पहुंच सीमित हो सकती है।

इसी कारण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की गर्भवती महिलाओं के लिए गर्मी का प्रभाव और अधिक गंभीर हो सकता है। विशेषज्ञों ने इस वर्ग के लिए विशेष स्वास्थ्य योजनाएं और जागरूकता अभियान चलाने की सिफारिश की है।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों पर विशेष चिंता

भारत के कई हिस्सों में हर वर्ष गर्मियों के दौरान तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है। विशेष रूप से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में लंबे समय तक हीटवेव की स्थिति बनी रहती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन क्षेत्रों में गर्मी अधिक पड़ती है, वहां गर्भवती महिलाओं के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है। नियमित स्वास्थ्य जांच, पर्याप्त पानी का सेवन, धूप से बचाव और चिकित्सकीय सलाह का पालन जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।

जलवायु परिवर्तन के बीच नई स्वास्थ्य चुनौती

दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता लगातार बढ़ रही है। विश्वभर के वैज्ञानिक पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अत्यधिक गर्मी केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, छोटे बच्चे और पहले से बीमार लोग अत्यधिक गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील माने जाते हैं। इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब जलवायु परिवर्तन को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जोड़कर भी देख रहे हैं।

विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता देने की दी सलाह

शोधकर्ताओं का मानना है कि हीट एक्शन प्लान (Heat Action Plan) में गर्भवती महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी जानी चाहिए। स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, जिससे भीषण गर्मी के दौरान गर्भवती महिलाओं को समय पर सहायता मिल सके। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि अत्यधिक गर्मी वाले दिनों में गर्भवती महिलाएं अनावश्यक रूप से धूप में बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं, हल्के कपड़े पहनें और किसी भी असामान्य शारीरिक परेशानी की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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