झारखंड के स्कूलों में बच्चों के ड्रॉपआउट रेट में ऐतिहासिक गिरावट आई है। प्राथमिक स्तर पर यह शून्य हो गया है, जबकि माध्यमिक और उच्च प्राथमिक में भी भारी कमी दर्ज की गई है। नामांकन अनुपात में भी वृद्धि हुई है।
Jharkhand: झारखंड के स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य के स्कूलों में बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर यानी ड्रॉपआउट रेट में उल्लेखनीय कमी आई है। प्राथमिक कक्षाओं से लेकर माध्यमिक स्तर तक सभी स्तरों पर यह गिरावट देखी गई है। खास बात यह है कि प्राथमिक कक्षाओं में ड्रॉपआउट रेट शून्य पर आ गया है, जो राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
प्राथमिक स्कूलों में शून्य ड्रॉपआउट
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी यूडायस (Unified District Information System) प्लस 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में स्कूल छोड़ने की दर में जबरदस्त सुधार हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि प्राथमिक कक्षाओं में ड्रॉपआउट रेट शून्य पर आ गया है।
वहीं, उच्च प्राथमिक स्तर पर यह दर नौ प्रतिशत से घटकर 1.70 प्रतिशत रह गई है। माध्यमिक स्तर पर भी भारी गिरावट देखी गई है, जहां यह दर 15.16 प्रतिशत से घटकर केवल 3.50 प्रतिशत रह गई है। यह संकेत है कि बच्चे अब स्कूल में बने रह रहे हैं और शिक्षा पर जोर दे रहे हैं।
सकल नामांकन अनुपात में बढ़ोतरी
- यूडायस प्लस 2024-25 रिपोर्ट बताती है कि झारखंड में सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrollment Ratio) में भी वृद्धि हुई है।
- माध्यमिक स्तर पर GER 62 से बढ़कर 73 प्रतिशत हुआ है।
- उच्च माध्यमिक स्तर पर यह अनुपात 41 प्रतिशत से बढ़कर 49 प्रतिशत हो गया है।
- प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर GER में कोई बदलाव नहीं हुआ है। प्राथमिक में यह 93 और उच्च प्राथमिक में 83 प्रतिशत पर स्थिर है।
यह साफ दिखाता है कि राज्य में शिक्षा के प्रति बच्चों और अभिभावकों की रुचि बढ़ी है और शिक्षा की पहुंच पहले से बेहतर हुई है।
शून्य नामांकन वाले स्कूलों की संख्या में कमी
रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में शून्य नामांकन वाले स्कूलों की संख्या में कमी आई है। 2023-24 में ऐसे 199 स्कूल थे, जो 2024-25 में घटकर 107 हो गए हैं।
- हालांकि, यह समस्या अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इन 107 स्कूलों में अब भी 31 शिक्षक कार्यरत हैं, लेकिन वहां कोई छात्र नामांकित नहीं है।
- सिंगल टीचर वाले स्कूलों में थोड़ी बढ़ोतरी। बच्चों की संख्या भी अधिक
- रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि सिंगल टीचर वाले स्कूलों की संख्या 8,353 से बढ़कर 9,172 हो गई है। ऐसे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या भी 4,10,199 से बढ़कर 4,36,480 हो गई है।
यह दर्शाता है कि अभी भी कुछ इलाकों में शिक्षक संख्या की कमी एक चुनौती बनी हुई है।
स्कूलों में सुविधाओं का विस्तार
रिपोर्ट में झारखंड के स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं पर भी जानकारी दी गई है।
- 42,010 स्कूलों में लाइब्रेरी, बुक बैंक या रीडिंग कार्नर मौजूद हैं।
- 32,469 स्कूलों में खेल का मैदान है।
- 917 स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी है।
- 12,283 स्कूलों में किचन गार्डन बनाए गए हैं।
- 42,324 स्कूलों में बालिकाओं के लिए क्रियाशील शौचालय हैं।
- 41,115 स्कूलों में बिजली की सुविधा है।
- 6,388 स्कूलों में सोलर पैनल लगे हैं।
- 33,718 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा है।
- 25,715 स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध है।
- 43,857 स्कूलों में पीने का पानी क्रियाशील है।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि झारखंड में शिक्षा का बुनियादी ढांचा लगातार बेहतर हो रहा है।
शिक्षकों की संख्या और छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार
- 2023-24 की तुलना में झारखंड में शिक्षकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
- 2023-24 में कुल शिक्षक 2,06,591 थे, जो 2024-25 में बढ़कर 2,09,203 हो गए।
- छात्र-शिक्षक अनुपात भी 35 से बढ़कर 36 हुआ है।
राज्य में प्रति स्कूल औसत नामांकन 161 से बढ़कर 168 हो गया है। यह स्पष्ट करता है कि शिक्षा व्यवस्था में बच्चों की भागीदारी बढ़ रही है और शिक्षक भी संख्या में अधिक हो रहे हैं।
ड्रॉपआउट रेट में गिरावट के पीछे कारण
विशेषज्ञ मानते हैं कि ड्रॉपआउट रेट में गिरावट के पीछे कई कारण हैं।
- मिड-डे मील योजना ने बच्चों को स्कूलों से जोड़े रखा।
- डिजिटल लर्निंग और नई शिक्षा नीतियों ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया।
- सरकारी योजनाओं ने बच्चों और अभिभावकों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई।