जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा आज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे। पंजाब सरकार ने नियुक्ति पर आपत्ति जताई है, जबकि केंद्र ने संवैधानिक प्रक्रिया का पालन होने और राज्य की राय बाध्यकारी नहीं होने की बात कही है।
चंडीगढ़: पंजाब सरकार के विरोध के बीच जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा आज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह सुबह साढ़े नौ बजे पंजाब लोक भवन में होगा। नियुक्ति को लेकर भगवंत मान सरकार ने केंद्र पर संवैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी का आरोप लगाया है, जबकि केंद्र की ओर से नियुक्ति को संविधान के अनुरूप बताया गया है।
पंजाब सरकार ने नियुक्ति पर जताई आपत्ति
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार और केंद्र के बीच विवाद सामने आया है। पंजाब सरकार का आरोप है कि नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में राज्य की सहमति नहीं ली गई।
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रविवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में केंद्र सरकार के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, पंजाब सरकार की राय लिए बिना नियुक्ति करना तय संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
सरकार ने मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर का दिया हवाला
पंजाब सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के मामले में संबंधित राज्य सरकार से राय लेना तय प्रक्रिया का हिस्सा है। मान सरकार ने आरोप लगाया कि इस मामले में पंजाब की राय को नजरअंदाज किया गया है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र और पंजाब के बीच चल रहे अन्य विवादों का भी उल्लेख किया। इनमें करीब 9,000 करोड़ रुपये के लंबित ग्रामीण विकास फंड और बाढ़ राहत राशि का मुद्दा शामिल है। पंजाब सरकार ने BBMB के नियमों में किए गए एकतरफा बदलाव का हवाला देते हुए न्यायपालिका की नियुक्तियों में भी केंद्र की दखलअंदाजी का आरोप लगाया है।
केंद्र ने कहा- राज्य की राय बाध्यकारी नहीं
केंद्र की ओर से भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने पंजाब सरकार के विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण और अनावश्यक बताया है। उन्होंने कहा कि जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 217(1) के तहत की है और न्यायाधीशों की नियुक्ति की निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ है।
उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त को नियुक्ति की सिफारिश की थी। इसके बाद 10 अगस्त को पंजाब और हरियाणा सरकारों से राय मांगी गई थी। हरियाणा ने समय पर अपनी राय दे दी, जबकि पंजाब ने अब तक अपनी राय नहीं भेजी।
सत्य पाल जैन के मुताबिक, राज्य सरकार की राय लेना जरूरी है, लेकिन वह बाध्यकारी नहीं है। राज्य सरकार के पास नियुक्ति को रोकने का वीटो अधिकार भी नहीं है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने जताई नाराजगी
जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति के विरोध को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भी आपत्ति जताई है। ऑनरेरी सेक्रेटरी परमप्रीत सिंह बाजवा (हैरी) की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है।
बार एसोसिएशन ने कहा कि कार्यपालिका को न्यायिक नियुक्तियों पर राजनीतिक दबाव नहीं बनाना चाहिए। उसके मुताबिक, संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजनीतिक मतभेदों के आधार पर नियुक्ति को विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है।
एसोसिएशन की आपात बैठक में पंजाब सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया का सम्मान करने और हाईकोर्ट की गरिमा बनाए रखने की अपील की गई। साथ ही बार एसोसिएशन ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संस्थागत गरिमा के समर्थन में मजबूती से खड़े रहने की बात कही।








