राजस्थान की राजधानी जयपुर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें करीब 53 लाख रुपए का सरकारी गेहूं बाजार में बेचे जाने का मामला उजागर हुआ है। यह मामला न केवल स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही को दिखाता है, बल्कि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
जयपुर: राजधानी में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बड़ा गेहूं घोटाला सामने आया है, जिसमें 1790 क्विंटल (करीब 53 लाख रुपए) का सरकारी गेहूं राशन दुकानों तक पहुंचाने के बजाय बाजार में बेच दिया गया। जो गरीबों को राशन दुकानों के माध्यम से वितरित किया जाना था।
जांच में पता चला कि ट्रांसपोर्ट फर्म ने 34 ट्रकों के जरिए गेहूं की कालाबाजारी की और गड़बड़ी छिपाने के लिए मार्च के कोटे को फरवरी में दिखाया। शिकायत के बाद मामले का खुलासा हुआ और पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अब प्रशासन फर्म से 53 लाख रुपए की वसूली की तैयारी कर रहा है और पूरे मामले में शामिल लोगों की जांच जारी है।
कैसे हुआ घोटाला
इस पूरे मामले में एक ट्रांसपोर्ट फर्म को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिसे सरकारी गेहूं को गोदामों से राशन दुकानों तक पहुंचाने का काम सौंपा गया था।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत यह गेहूं जयपुर जिले के विभिन्न इलाकों—चौमूं, चाकसू, आमेर, बस्सी, झोटवाड़ा और अन्य क्षेत्रों की 34 राशन दुकानों तक पहुंचाया जाना था।
हालांकि, विभागीय जांच में यह पाया गया कि 34 ट्रकों में लोड किया गया गेहूं दुकानों तक पहुंचने के बजाय खुले बाजार में बेच दिया गया। इस तरह ट्रांसपोर्ट फर्म ने सरकारी अनाज का गबन कर लिया।

गड़बड़ी छिपाने के लिए किया गया हेरफेर
जब राशन दुकानों तक गेहूं नहीं पहुंचा, तो दुकानदारों ने खाद्य विभाग से शिकायत की। इसके बाद शुरू हुई विजिलेंस जांच में पूरे घोटाले का खुलासा हुआ।
जांच में यह भी सामने आया कि ट्रांसपोर्ट फर्म ने अपनी गलती छिपाने के लिए मार्च 2026 के कोटे को फरवरी का बताकर रिकॉर्ड में हेरफेर करने की कोशिश की।
फर्म ने मार्च में आवंटित 1311 क्विंटल गेहूं को फरवरी के वितरण में दिखा दिया, ताकि कमी को छिपाया जा सके। लेकिन जांच एजेंसियों ने इस गड़बड़ी को पकड़ लिया।
53 लाख की वसूली की तैयारी
इस मामले में खाद्य विभाग के प्रवर्तन अधिकारी निशांत पंचोली की शिकायत पर सांगानेर सदर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।
पुलिस के अनुसार, ट्रांसपोर्ट फर्म के संचालक विनोद कुमार शर्मा के खिलाफ गबन और कालाबाजारी का मामला दर्ज किया गया है।
प्रशासन अब इस फर्म से लगभग 53 लाख रुपए की वसूली करने की तैयारी कर रहा है। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच जारी है, ताकि इसमें शामिल अन्य लोगों की भी पहचान की जा सके।
जांच में सामने आई नई बातें
प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि घोटाले को अंजाम देने के लिए हर ट्रक से थोड़ा-थोड़ा गेहूं गायब किया गया, ताकि एक साथ बड़ी मात्रा में कमी नजर न आए।
इस तरीके से लंबे समय तक गड़बड़ी को छिपाने की कोशिश की गई, लेकिन अंततः शिकायतों के बाद यह मामला उजागर हो गया।
यह भी सामने आया है कि गेहूं को खुले बाजार में बेचकर अवैध मुनाफा कमाया गया, जिससे सरकारी योजना के तहत लाभार्थियों को मिलने वाला अनाज प्रभावित हुआ।
खाद्य सुरक्षा पर उठे सवाल
इस तरह के मामले सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में खाद्य वितरण प्रणाली की चुनौतियों को उजागर करते हैं।
सरकारी योजनाओं के तहत गरीब और जरूरतमंद लोगों तक खाद्य सामग्री पहुंचाना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में यदि सप्लाई चेन में ही भ्रष्टाचार हो जाए, तो इसका सीधा असर कमजोर वर्गों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के घोटालों को रोकने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग, पारदर्शिता और कड़ी निगरानी की जरूरत है।
आगे की कार्रवाई और सुधार की जरूरत
प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
इसके साथ ही, राशन वितरण प्रणाली में सुधार के लिए नई तकनीकों और पारदर्शी प्रक्रियाओं को लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है।









