बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने गुरुवार को लोकसभा में 'वीबी-जी राम जी विधेयक' पर चर्चा के दौरान आठ कांग्रेस सदस्यों पर विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना करने का आरोप लगाते हुए नोटिस दिया है।
नई दिल्ली: लोकसभा में ‘विकसित भारत–गैरंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (VB-G RAM G) विधेयक’ पर चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ताधारी दल के बीच तनाव की स्थिति बन गई। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के आठ सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का नोटिस लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजा है। अब इस नोटिस पर लोकसभा अध्यक्ष फैसला करेंगे, जिससे कांग्रेस के इन सांसदों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
किसने किया नोटिस दिया और क्यों?
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसदों ने ‘VB-G RAM G विधेयक’ पर चर्चा के दौरान सदन की कार्यवाही में व्यवधान पैदा किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों के इस व्यवहार ने सदन के सुचारू संचालन में बाधा डाली और संसदीय विशेषाधिकारों का उल्लंघन किया। दुबे ने अपने नोटिस में इन आठ कांग्रेस सांसदों के नाम शामिल किए:
- हिबी ईडन
- डीन कुरियाकोस
- एस मुरासोली
- के गोपीनाथ
- शशिकांत सेंथिल
- शफी परम्बिल
- एस वेंकटेशन
- जोतिमणि
दुबे ने कहा कि इन सांसदों ने कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और सदन के अधिकारियों के काम में बाधा डाली, जिससे यह स्पष्ट रूप से लोकसभा अध्यक्ष के अधिकारों की अवज्ञा और सदन की अवमानना बनता है।
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सदन में क्या हुआ?
सूत्रों के अनुसार, जब ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान विधेयक पर चर्चा कर रहे थे, विपक्षी सदस्य आसन के पास पहुंचे और विधेयक की प्रतियां फाड़ दीं। इसके साथ ही उन्होंने मेजों पर खड़े होकर विधेयक के प्रावधानों के खिलाफ अपना विरोध जताया। यह विधेयक मनरेगा (MGNREGA) का 20 साल पुराना संस्करण बदलने के लिए लाया गया है। नए VB-G RAM G कानून के तहत ग्रामीण रोजगार और आजीविका के लिए नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इस विधेयक को लेकर विपक्षी दलों की नाराजगी और प्रदर्शन सामने आया।
लोकसभा सचिवालय के अधिकारियों ने बताया कि अब ओम बिरला इस नोटिस की जांच कर रहे हैं। सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि विपक्षी सांसदों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
विशेषाधिकार हनन का मामला संसद के सख्त नियमों के तहत आता है। इसमें सदन के किसी सदस्य या अधिकारी के अधिकारों का उल्लंघन या कार्यवाही में बाधा डालना शामिल होता है। यदि यह पाया जाता है कि सांसदों ने सचमुच अवमानना की है, तो लोकसभा अध्यक्ष अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकते हैं, जिसमें चेतावनी, निलंबन या अन्य दंडात्मक उपाय शामिल हैं।








