कांग्रेस रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद राजनीति गरमा गई। राज्यसभा में जेपी नड्डा ने सोनिया गांधी से माफी की मांग की। भाजपा ने इसे संवैधानिक पद का अपमान बताया।
New Delhi: कांग्रेस की एक हालिया रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगाए गए आपत्तिजनक नारों को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। मामला अब संसद तक पहुंच चुका है। राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की भाषा न केवल प्रधानमंत्री पद का अपमान है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं के भी खिलाफ है।
राज्यसभा में जेपी नड्डा का तीखा बयान
सोमवार को राज्यसभा में बोलते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जिस तरह के नारे लगाए गए, वे बेहद निंदनीय हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है। नड्डा ने साफ शब्दों में कहा कि सोनिया गांधी को कांग्रेस नेताओं के इन बयानों के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।
जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस की यह सोच और मानसिकता अब खुलकर सामने आ रही है। प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन भाषा और मर्यादा की एक सीमा होनी चाहिए।
लोकसभा में किरेन रिजिजू का आरोप
इस मुद्दे पर लोकसभा में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को कहा कि कांग्रेस की एक रैली में कुछ नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की ‘कब्र खोदने’ जैसे नारे लगाए गए। उन्होंने इसे भारत के लिए बेहद दुखद समय बताया।
रिजिजू ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि देश की इतनी पुरानी पार्टी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि रैली में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे और इसके बावजूद इस तरह के नारे लगे। इससे कांग्रेस नेतृत्व की जिम्मेदारी और भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं।

सहयोगी दलों ने बनाई दूरी
इस विवाद पर कांग्रेस के सहयोगी दलों ने भी असहजता दिखाई है। समाजवादी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने इस बयान से खुद को अलग कर लिया है। समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने कहा कि राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के बारे में बोलते समय संयम जरूरी है।
एनसीपी (एसपी) नेता जयंत पाटिल ने भी कहा कि इस तरह के नारे लगाना सही नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे राजनीतिक असहमति कितनी भी हो, नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और उनके लिए एक मर्यादा होनी चाहिए।
रैली में क्या हुआ था
यह पूरा विवाद रविवार को आयोजित ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली के बाद शुरू हुआ। यह रैली विपक्ष द्वारा भाजपा पर लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों के विरोध में आयोजित की गई थी। इसी दौरान जयपुर महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष मंजू लता मीना द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ ‘कब्र’ से जुड़ा नारा लगाए जाने का आरोप लगा।
इस नारे का वीडियो और बयान सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई। भाजपा नेताओं ने इसे बेहद आपत्तिजनक बताते हुए कांग्रेस पर हमला बोला।
बयान पर सफाई
जब पत्रकारों ने मंजू लता मीना से इस बयान को लेकर सवाल किए, तो उन्होंने अपने बयान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि वह केवल वोट चोरी को लेकर जनता के गुस्से को व्यक्त कर रही थीं। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री रोजगार, युवाओं, महिलाओं और किसानों के मुद्दों पर बात नहीं करते और ध्यान भटकाते हैं।












