राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने गुरुवार, 8 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस टिप्पणी पर तंज कसा, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह अपनी सीखने की क्षमता को कभी कम नहीं होने देना चाहते।
नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर निशाना साधा है, जिसमें उन्होंने खुद को अब भी एक विद्यार्थी बताते हुए हर दिन कुछ नया सीखने की बात कही थी। सिब्बल ने प्रधानमंत्री की इसी टिप्पणी को आधार बनाकर राजनीतिक और लोकतांत्रिक मुद्दों पर तंज किया। उन्होंने कहा कि अगर सीखने की बात हो रही है तो युवाओं, किसानों और आदिवासियों की आवाज सुनने से लेकर लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों का सम्मान करने तक कई चीजें सीखी जा सकती हैं।
कपिल सिब्बल की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दिए गए संबोधन के एक दिन बाद आई। प्रधानमंत्री ने बुधवार को आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ में अपने राजनीतिक सफर और सरकार की उपलब्धियों का जिक्र किया था। इसी दौरान उन्होंने कहा था कि वह आज भी खुद को एक विद्यार्थी मानते हैं और हर दिन कुछ नया सीखने का प्रयास करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा था?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा था कि वह आज भी खुद को एक विद्यार्थी मानते हैं। उनके मुताबिक, सीखने की प्रक्रिया जीवनभर चलती रहती है और वह हर दिन कुछ नया सीखने की कोशिश करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की है कि उनकी सीखने की क्षमता कभी कम न हो।मोदी ने अपने भाषण में भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर भी जोर दिया।
उन्होंने ‘हम यह करके दिखाएंगे’ का नारा देते हुए कहा कि देश इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की ओर से अलग-अलग क्षेत्रों में किए गए कामों को भी गिनाया और कहा कि जिन चीजों को कभी असंभव माना जाता था, वे अब संभव होती दिखाई दे रही हैं।
प्रधानमंत्री ने चुनावी राजनीति में जातिगत विभाजन को भी एक बड़ी चुनौती के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने देश की विकास यात्रा में सामाजिक एकता और व्यापक भागीदारी के महत्व पर जोर दिया।
कपिल सिब्बल ने ‘सीखने’ को लेकर क्या कहा?
प्रधानमंत्री के बयान के बाद कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने प्रधानमंत्री की ‘सीखने’ वाली टिप्पणी को लेकर कई मुद्दे गिनाए और व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि कुछ महत्वपूर्ण बातें सीखने की जरूरत है। सिब्बल ने कहा कि युवाओं, किसानों और आदिवासियों की बात सुनना, नफरत से दूरी बनाए रखना और दूसरे लोगों के सपनों को समझना भी सीखने का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने देश की विविधता को महत्व देने की बात भी कही।
इसके अलावा सिब्बल ने चुनाव प्रक्रिया में कथित हेरफेर को रोकने, लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों का सम्मान करने और बिना सिद्धांत के दल-बदल की राजनीति पर रोक लगाने जैसे मुद्दे भी उठाए। इस तरह उन्होंने प्रधानमंत्री के बयान को सीधे राजनीतिक सवालों से जोड़ते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी।











