भारत की पहली महिला CJI कौन बन सकती हैं? जस्टिस बीवी नागरत्ना के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा

जस्टिस बीवी नागरत्ना 2027 में भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (CJI) बन सकती हैं। जानें उनका न्यायिक करियर, सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति और पहली महिला CJI बनने

गुजरात हाई कोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल के सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने के साथ ही शीर्ष अदालत में महिला जजों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में अब जजों की स्वीकृत संख्या 38 है, जिसमें सीजेआई सूर्यकांत समेत 37 जज कार्यरत हैं और एक पद खाली है।

नई दिल्ली: भारत की न्यायपालिका के इतिहास में जल्द ही एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के 76 साल के इतिहास में अब तक कोई महिला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) नहीं बनी है। हालांकि, मौजूदा न्यायिक वरिष्ठता और सेवानिवृत्ति की तय तारीखों को देखते हुए जस्टिस बीवी नागरत्ना के देश की पहली महिला CJI बनने की संभावना सबसे मजबूत मानी जा रही है। अगर परिस्थितियां तय क्रम के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो 2027 में भारत को पहली बार महिला मुख्य न्यायाधीश मिल सकती हैं।

हाल ही में गुजरात हाई कोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किए जाने के बाद सर्वोच्च अदालत में महिला जजों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश समेत जजों की स्वीकृत संख्या अब 38 है। फिलहाल कुल 37 जज कार्यरत हैं और एक पद खाली है। तीन महिला जजों में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस वी मोहना पहले से सुप्रीम कोर्ट का हिस्सा थीं, जबकि सुनीता अग्रवाल के आने से महिला प्रतिनिधित्व बढ़ा है।

कभी सुप्रीम कोर्ट में एक साथ थीं चार महिला जज

सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या हमेशा इतनी कम नहीं रही है। एक समय ऐसा भी आया था, जब सर्वोच्च अदालत में चार महिला जज एक साथ कार्यरत थीं। उस दौरान जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस हिमा कोहली, जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी और जस्टिस बीवी नागरत्ना ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी सेवाएं दी थीं।हालांकि, मौजूदा स्थिति में तीन महिला जजों के बावजूद शीर्ष अदालत में महिलाओं की हिस्सेदारी कुल न्यायाधीशों की तुलना में काफी कम है। इसके बावजूद जस्टिस नागरत्ना का संभावित CJI बनना न्यायपालिका में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जस्टिस बीवी नागरत्ना बन सकती हैं पहली महिला CJI

जस्टिस बीवी नागरत्ना इस समय भारत की पहली महिला CJI बनने की संभावित उम्मीदवार हैं। मौजूदा वरिष्ठता क्रम और अलग-अलग जजों की सेवानिवृत्ति की तारीखों को देखें तो उनके लिए CJI का रास्ता 2027 में खुल सकता है। मौजूदा CJI सूर्यकांत का कार्यकाल 9 फरवरी 2027 को समाप्त होगा। इसके बाद वरिष्ठता के आधार पर जस्टिस विक्रम नाथ के CJI बनने की संभावना है। हालांकि, उनका कार्यकाल भी लंबा नहीं होगा, क्योंकि वह 23 सितंबर 2027 को 65 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त होंगे।

इसके बाद जस्टिस बीवी नागरत्ना के CJI बनने का रास्ता साफ हो सकता है। उपलब्ध वरिष्ठता क्रम के मुताबिक वह 24 सितंबर 2027 से 29 अक्टूबर 2027 तक भारत की पहली महिला CJI के रूप में पद संभाल सकती हैं। यानी उनका संभावित कार्यकाल करीब 36 दिनों का होगा।

सुनीता अग्रवाल और वी मोहना के लिए मुश्किल है मौका

सुप्रीम कोर्ट की अन्य दो महिला जजों की बात करें तो जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस वी मोहना के लिए CJI पद तक पहुंचना मौजूदा वरिष्ठता क्रम में काफी मुश्किल दिखाई देता है। जस्टिस सुनीता अग्रवाल 29 अप्रैल 2031 को सेवानिवृत्त होंगी, जबकि जस्टिस वी मोहना का कार्यकाल 26 जून 2031 तक रहेगा। इस समय तक वरिष्ठता क्रम में कई अन्य जज CJI के पद पर आ चुके होंगे। इसलिए मौजूदा परिस्थितियों में इन दोनों के भारत की पहली महिला CJI बनने की संभावना नहीं के बराबर मानी जा रही है।

नागरत्ना के बाद कौन-कौन बन सकते हैं CJI?

जस्टिस बीवी नागरत्ना के संभावित कार्यकाल के बाद वरिष्ठता क्रम में कई जज CJI पद की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। इनमें जस्टिस पी. नरसिम्हा का संभावित कार्यकाल 30 अक्टूबर 2027 से 2 मई 2028 तक, जस्टिस जेबी पारदीवाला का 3 मई 2028 से 11 अगस्त 2030 तक और जस्टिस केवी विश्वनाथन का 12 अगस्त 2030 से 25 मई 2031 तक हो सकता है।

इसके बाद जस्टिस जॉटमाल्या बागची 26 मई 2031 से 2 अक्टूबर 2031 तक और जस्टिस वीएम पंचोली 3 अक्टूबर 2031 से 27 मई 2033 तक CJI पद संभालने की कतार में रहेंगे।

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