भारतीय लेग स्पिनर कर्ण शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी है। 38 वर्षीय कर्ण ने भारत के लिए एक टेस्ट, दो वनडे और एक टी20 मैच खेला। उनका आखिरी मुकाबला 25 अगस्त को यूपी टी20 लीग में होगा।
क्रिकेट: भारतीय क्रिकेट के अनुभवी लेग स्पिनर कर्ण शर्मा ने अपने करीब दो दशक लंबे क्रिकेट करियर को विराम देने का फैसला किया है। 38 वर्षीय कर्ण ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ-साथ घरेलू क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी। उन्होंने भारत के लिए सीमित अवसरों में खेलते हुए कुल चार अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले, जिनमें एक टेस्ट, दो वनडे और एक टी20 इंटरनेशनल शामिल है। कर्ण शर्मा ने अपना अंतिम प्रतिस्पर्धी मुकाबला खेलने के बाद संन्यास लेने का निर्णय किया है। वह उत्तर प्रदेश टी20 लीग में कानपुर सुपरस्टार्स का हिस्सा हैं और 25 अगस्त को लखनऊ के इकाना क्रिकेट स्टेडियम में मेरठ मेवरिक्स के खिलाफ अपना आखिरी मैच खेलेंगे। इसके बाद उनका लंबा पेशेवर क्रिकेट करियर आधिकारिक तौर पर समाप्त हो जाएगा।
2014 में भारत के लिए तीनों फॉर्मेट में किया डेब्यू
मेरठ में जन्मे कर्ण शर्मा ने वर्ष 2014 में भारत के लिए तीनों अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में पदार्पण किया था। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर भले ही ज्यादा लंबा नहीं रहा, लेकिन उन्होंने सीमित मौकों में अपनी गेंदबाजी से प्रभाव छोड़ा।
कर्ण ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में अपना एकमात्र टेस्ट मैच खेला। इस मुकाबले की दोनों पारियों में उन्होंने दो-दो विकेट हासिल किए। इसके बाद उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम में टी20 इंटरनेशनल खेलने का मौका मिला। इस मैच में उन्होंने इंग्लैंड के बल्लेबाज जो रूट का विकेट हासिल किया था।
उसी वर्ष कर्ण ने श्रीलंका के खिलाफ भारत के लिए दो वनडे मुकाबले भी खेले। इस तरह उन्होंने 2014 में ही टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों प्रारूपों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
चोट ने अंतरराष्ट्रीय करियर पर लगाया ब्रेक
कर्ण शर्मा को 2015 में जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टीम में भी चुना गया था, लेकिन चोट के कारण वह दौरे से बाहर हो गए। इसके बाद उन्हें दोबारा भारतीय टीम में जगह नहीं मिल सकी।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका सफर छोटा रहा, लेकिन घरेलू क्रिकेट और टी20 फ्रेंचाइजी क्रिकेट में उन्होंने लंबे समय तक अपनी उपयोगिता साबित की। खासकर आईपीएल में उनका प्रदर्शन और अलग-अलग चैंपियन टीमों के साथ उनकी सफलता उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रही।
घरेलू क्रिकेट में लगभग 20 साल का सफर
कर्ण शर्मा ने 2007-08 सीजन में फर्स्ट क्लास, लिस्ट-ए और टी20 क्रिकेट में पदार्पण किया था। अपने पहले रणजी ट्रॉफी मुकाबले में ही उन्होंने शतक लगाकर अपनी बल्लेबाजी क्षमता की भी झलक दिखाई।
2012-13 रणजी सीजन उनके करियर के लिए खास रहा। उस सत्र में तीन मैचों में 21 विकेट हासिल करने के बाद उन्हें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI के बेस्ट अंडर-25 क्रिकेटर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
घरेलू क्रिकेट में कर्ण ने रेलवे, आंध्र और विदर्भ जैसी टीमों का प्रतिनिधित्व किया। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने 97 मैचों में 270 विकेट लिए। वहीं 123 लिस्ट-ए मुकाबलों में उनके नाम 153 विकेट दर्ज हैं। टी20 क्रिकेट में उन्होंने 191 मैच खेले और 168 विकेट हासिल किए।
ये आंकड़े बताते हैं कि भले ही कर्ण को भारत की ओर से ज्यादा खेलने का अवसर नहीं मिला, लेकिन घरेलू स्तर पर वह लंबे समय तक प्रभावी स्पिन गेंदबाज बने रहे।
IPL में बनाया अनोखा रिकॉर्ड
कर्ण शर्मा के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में इंडियन प्रीमियर लीग में उनकी सफलता भी शामिल है। वह लगातार तीन सीजन में तीन अलग-अलग फ्रेंचाइजी के साथ आईपीएल खिताब जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने थे।
उन्होंने 2016 में सनराइजर्स हैदराबाद के साथ आईपीएल ट्रॉफी जीती। इसके बाद 2017 में मुंबई इंडियंस की चैंपियन टीम का हिस्सा बने और फिर 2018 में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ खिताब अपने नाम किया।
इस उपलब्धि ने उन्हें आईपीएल के इतिहास में एक खास पहचान दिलाई। तीन अलग-अलग टीमों के साथ लगातार तीन सीजन चैंपियन बनना उनके करियर की दुर्लभ उपलब्धियों में गिना जाता है।
चेन्नई सुपर किंग्स के साथ जीता चौथा IPL खिताब
कर्ण शर्मा ने 2021 में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ अपना चौथा आईपीएल खिताब भी जीता। इस तरह वह चार आईपीएल ट्रॉफी जीतने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए।
उनका आखिरी आईपीएल मुकाबला 2025 में मुंबई इंडियंस की ओर से रहा। अपने आईपीएल करियर में कर्ण ने अलग-अलग टीमों के लिए महत्वपूर्ण मौकों पर स्पिन गेंदबाजी की और अनुभवी खिलाड़ी के तौर पर टीमों को विकल्प उपलब्ध कराया।
उनकी सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने अलग-अलग परिस्थितियों और फ्रेंचाइजी के साथ खुद को ढाला। आईपीएल जैसी प्रतिस्पर्धी लीग में लंबे समय तक बने रहना उनके कौशल और अनुभव को दर्शाता है।
2014 की IPL नीलामी में मिली थी बड़ी रकम
कर्ण शर्मा को 2014 की आईपीएल नीलामी में सनराइजर्स हैदराबाद ने 3.75 करोड़ रुपये की कीमत में खरीदा था। उस समय वह आईपीएल नीलामी में सबसे महंगे अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी बने थे।
यह बोली उस समय कर्ण की बढ़ती लोकप्रियता और घरेलू तथा आईपीएल क्रिकेट में उनके प्रदर्शन का संकेत थी। बाद में भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय पदार्पण ने भी उनके करियर को एक नई पहचान दी।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका सफर अपेक्षाकृत छोटा रहा, लेकिन फ्रेंचाइजी क्रिकेट में वह कई वर्षों तक सक्रिय रहे।

आखिरी मुकाबले के बाद थमेगा क्रिकेट का सफर
कर्ण शर्मा अब अपने करियर का आखिरी मुकाबला उत्तर प्रदेश टी20 लीग में खेलेंगे। कानपुर सुपरस्टार्स की ओर से उनका सामना 25 अगस्त को लखनऊ के इकाना क्रिकेट स्टेडियम में मेरठ मेवरिक्स से होगा।
यह मुकाबला उनके लिए भावनात्मक रूप से खास होगा, क्योंकि इसके बाद वह प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से पूरी तरह दूर हो जाएंगे। करीब 20 वर्षों तक घरेलू क्रिकेट, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल में सक्रिय रहने के बाद कर्ण अब अपने करियर के अगले अध्याय की ओर बढ़ेंगे।
उनका सफर यह भी दिखाता है कि किसी खिलाड़ी का प्रभाव केवल अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता। भारत के लिए चार मैच खेलने के बावजूद कर्ण ने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में लगातार योगदान देकर अपनी अलग पहचान बनाई।
लगातार तीन IPL खिताब का रिकॉर्ड चर्चा में रहेगा
कर्ण शर्मा के संन्यास के साथ उनके लगातार तीन आईपीएल खिताब जीतने का रिकॉर्ड एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उनके अलावा फिल सॉल्ट और सुयश शर्मा भी लगातार तीन सीजन चैंपियन टीम का हिस्सा रहे हैं।
सॉल्ट और सुयश ने 2024 में कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ आईपीएल ट्रॉफी जीती थी। इसके बाद दोनों 2025 और 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की चैंपियन टीम का हिस्सा बने।
हालांकि कर्ण की उपलब्धि अलग इसलिए रही क्योंकि उन्होंने लगातार तीन खिताब तीन अलग-अलग फ्रेंचाइजी के साथ जीते थे। यह रिकॉर्ड उनके आईपीएल करियर को खास बनाता है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में छोटा, लेकिन यादगार सफर
भारत के लिए कर्ण शर्मा का अंतरराष्ट्रीय करियर केवल चार मैचों तक सीमित रहा, लेकिन उनका पदार्पण अपने आप में खास था। उन्होंने एक ही वर्ष में टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों प्रारूपों में देश का प्रतिनिधित्व किया।
इसके बाद चोट और टीम में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण उन्हें भारतीय टीम में नियमित जगह नहीं मिल सकी। फिर भी उन्होंने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में खुद को साबित करते हुए लंबे समय तक खेल जारी रखा।
अब संन्यास के साथ कर्ण शर्मा के क्रिकेट करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो रहा है। 25 अगस्त का मुकाबला उनके प्रशंसकों के लिए उन्हें आखिरी बार प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में देखने का अवसर होगा।
कर्ण शर्मा के करियर पर एक नजर
कर्ण शर्मा ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 97 मैचों में 270 विकेट लिए, जबकि लिस्ट-ए क्रिकेट में 123 मैचों में 153 विकेट हासिल किए। टी20 क्रिकेट में उनके नाम 191 मैचों में 168 विकेट हैं। भारत के लिए उन्होंने एक टेस्ट, दो वनडे और एक टी20 मैच खेला।
आईपीएल में चार बार चैंपियन बनने की उपलब्धि और तीन अलग-अलग टीमों के साथ लगातार तीन खिताब जीतने का रिकॉर्ड उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहेगा।
करीब दो दशक तक क्रिकेट से जुड़े रहने के बाद अब कर्ण शर्मा ने खेल से विदाई लेने का फैसला किया है। उनका करियर उन खिलाड़ियों की कहानी है जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमित अवसर मिलने के बावजूद घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में लंबे समय तक अपनी जगह बनाए रखी।










