करनाल में सफाई और अग्निशमन कर्मचारियों ने 30 दिन से जारी हड़ताल के बीच सामूहिक रूप से सिर मुंडवाकर विरोध जताया। कर्मचारियों ने 5 सितंबर तक काम पर लौटने की सरकारी चेतावनी ठुकराते हुए लिखित आदेश तक आंदोलन जारी रखने की बात कही।
करनाल: हरियाणा के करनाल जिले में सफाई और अग्निशमन कर्मचारियों का आंदोलन शुक्रवार को 30वें दिन भी जारी रहा। विरोध के दौरान करीब 10 सफाई कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से सिर मुंडवाकर सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। कर्मचारी नेताओं ने इसे प्रदेशभर में ‘मुंडन दिवस’ के रूप में मनाने का ऐलान किया है।
नगर निगम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर मुख्यमंत्री स्तर से लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक हड़ताल और धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।
यह आंदोलन ऐसे समय जारी है जब राज्य सरकार ने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को 5 सितंबर तक काम पर लौटने की चेतावनी दी है। कर्मचारियों ने सरकार की इस चेतावनी के बावजूद आंदोलन वापस लेने से इनकार किया है।
30वें दिन विरोध का अलग तरीका
करनाल में सफाई और अग्निशमन कर्मचारियों की हड़ताल का शुक्रवार को 30वां दिन था। इस दौरान कर्मचारियों ने विरोध दर्ज कराने के लिए सामूहिक मुंडन का सहारा लिया।
धरना स्थल पर करीब 10 कर्मचारियों ने अपना सिर मुंडवाया। कर्मचारी नेताओं के अनुसार, यह कदम सरकार के प्रति उनके विरोध और लंबित मांगों पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया।
कर्मचारियों ने कहा कि सरकार की ओर से कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बावजूद वे अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय होने तक विरोध जारी रहेगा।
13 मई के समझौते के बाद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
सफाई कर्मचारी संघ हरियाणा इकाई के प्रधान राजकुमार ने सरकार पर समझौते के बाद अपेक्षित कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है।
राजकुमार के अनुसार, 13 मई को सरकार और कर्मचारियों के बीच समझौता हुआ था। उन्होंने कहा कि उस समय कर्मचारियों की मांगों को उचित मानते हुए सरकार ने उन्हें समाधान के लिए 30 दिन का समय दिया था।
कर्मचारी नेता का आरोप है कि निर्धारित समय बीतने के बावजूद उनकी मांगों को लेकर कोई प्रभावी निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने सरकार की नीति और नीयत पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि कर्मचारियों को नियमित करने के मुद्दे पर सरकार गंभीरता नहीं दिखा रही है।
राजकुमार ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री स्तर से मांगों के संबंध में लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक हड़ताल और धरना जारी रहेगा।
नियमितीकरण की मांग प्रमुख मुद्दों में शामिल
कर्मचारियों के आंदोलन में नियमितीकरण का मुद्दा प्रमुख बताया गया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार को उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
कर्मचारी नेता के मुताबिक, केवल आश्वासन से अब आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि लिखित सरकारी आदेश मिलने के बाद ही आगे की स्थिति पर विचार किया जाएगा।
इस बीच सरकार और कर्मचारियों के बीच जारी गतिरोध का असर स्थानीय प्रशासन और शहर की सेवाओं पर भी पड़ रहा है।
करनाल में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने का दावा
करीब एक महीने से जारी हड़ताल के कारण करनाल शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने का दावा कर्मचारियों की ओर से किया गया है। कर्मचारियों के अनुसार, मुख्य बाजारों, सड़कों और शहर के कई हिस्सों में कचरा जमा हो गया है।
बारिश के बाद स्थिति और चुनौतीपूर्ण होने का दावा भी किया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि जमा कचरा और पॉलिथीन नालियों तथा सीवरों में जाने से जलभराव की समस्या बढ़ सकती है।
उनका यह भी कहना है कि लंबे समय तक कचरा जमा रहने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। कर्मचारियों ने सरकार से जल्द बातचीत कर विवाद का समाधान निकालने और शहर की सफाई व्यवस्था सामान्य करने की मांग की है।
हालांकि, उपलब्ध सामग्री में नगर प्रशासन की ओर से शहर में जमा कचरे की मात्रा या स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को लेकर कोई स्वतंत्र आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन दावों को कर्मचारी संगठन के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सरकार ने 5 सितंबर तक काम पर लौटने को कहा
हड़ताल के बीच हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों को 5 सितंबर तक ड्यूटी पर लौटने की चेतावनी दी है। सरकार ने निर्धारित समय तक काम पर वापस नहीं आने पर कार्रवाई की बात कही है।
सरकार की चेतावनी के बावजूद कर्मचारी नेताओं ने आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया है। अग्निशमन विभाग के जिला प्रधान संदीप त्यागी ने कहा कि कर्मचारी निलंबन या विभागीय कार्रवाई की धमकी से पीछे नहीं हटेंगे।
त्यागी ने कहा कि सरकार के पास कर्मचारियों की मांगों को स्वीकार करने का रास्ता मौजूद है। उनके अनुसार, यदि सरकार ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और लंबा किया जा सकता है।
कर्मचारियों ने कार्रवाई से नहीं डरने की बात कही
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार की ओर से संभावित निलंबन या विभागीय कार्रवाई की चेतावनी उन्हें आंदोलन से पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं करेगी।
उनका तर्क है कि यदि हड़ताल के कारण शहर में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है, तो इसका समाधान निकालने की जिम्मेदारी भी सरकार की है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार से बातचीत के जरिए विवाद खत्म करने की अपील की है।
दूसरी ओर, सरकार की चेतावनी से स्पष्ट है कि वह हड़ताल को लंबे समय तक जारी रहने देने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच बातचीत और समझौते की संभावना महत्वपूर्ण हो गई है।
आंदोलन अब निर्णायक दौर में
करनाल में सफाई और अग्निशमन कर्मचारियों का आंदोलन 30 दिन पूरे होने के बाद निर्णायक स्थिति में पहुंचता दिखाई दे रहा है। एक तरफ कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने काम पर लौटने की समयसीमा तय कर दी है।
सामूहिक मुंडन के जरिए कर्मचारियों ने अपने विरोध को नया स्वरूप दिया है। कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री स्तर से लिखित आदेश मिलने तक धरना और हड़ताल जारी रहेगी।
अब इस विवाद का समाधान सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत से निकलता है या सरकार की चेतावनी के बाद प्रशासनिक कार्रवाई होती है, इस पर नजर बनी हुई है।
सफाई सेवाओं पर बढ़ता दबाव
सफाई कर्मचारियों की लंबी हड़ताल का सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव शहरी सेवाओं पर पड़ने की आशंका रहती है। करनाल में कर्मचारियों ने खुद शहर में कचरा जमा होने और बारिश के बाद नालियों में रुकावट की समस्या का दावा किया है।
ऐसे में विवाद का जल्द समाधान स्थानीय प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण है। एक ओर कर्मचारियों की सेवा संबंधी मांगों पर फैसला करना है, वहीं दूसरी ओर शहर की नियमित सफाई और सार्वजनिक सेवाओं को बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
फिलहाल कर्मचारी अपने आंदोलन को जारी रखने की घोषणा कर चुके हैं। सरकार की 5 सितंबर की समयसीमा के बाद स्थिति किस दिशा में जाती है, यह इस लंबे गतिरोध के अगले चरण को तय करेगा।









