कर्नाटक में कथित स्टिंग ऑपरेशन विवाद को लेकर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बेंगलुरु पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर धरना समाप्त कर दिया। उन्होंने पुलिस को कार्रवाई के लिए दो दिन का समय दिया और निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
बेंगलुरु: कर्नाटक में कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बेंगलुरु पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर अपना धरना समाप्त कर दिया, लेकिन मामले में कार्रवाई के लिए पुलिस को दो दिन का समय दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समयसीमा में उचित कदम नहीं उठाए गए, तो वह दोबारा आंदोलन शुरू कर सकते हैं।
जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ कुमारस्वामी ने गुरुवार को करीब डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने पुलिस आयुक्त सीमनथ कुमार सिंह से मुलाकात की। लगभग 30 मिनट की बातचीत के बाद धरना समाप्त करने का फैसला लिया गया। कुमारस्वामी के अनुसार, पुलिस आयुक्त ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया था। हालांकि, पुलिस की ओर से जांच की समयसीमा और प्रस्तावित कार्रवाई का विस्तृत आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।
पुलिस आयुक्त के आश्वासन के बाद धरना समाप्त
कुमारस्वामी ने कहा कि पुलिस आयुक्त से मिले आश्वासन के आधार पर वह पुलिस को दो दिन का समय दे रहे हैं। उन्होंने मांग की कि कथित स्टिंग ऑपरेशन के पीछे मौजूद लोगों की पहचान की जाए और उनके संपर्कों की जांच की जाए।
उनका आरोप है कि इस पूरे मामले में मीडिया से जुड़े एक व्यक्ति की भूमिका की पड़ताल जरूरी है। कुमारस्वामी ने दावा किया कि संबंधित व्यक्ति ने मीडिया का दुरुपयोग किया और कथित तौर पर गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहा। उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को निशाना बनाने वाले इस कथित ऑपरेशन की पूरी सच्चाई सामने लाने की मांग की।
कुमारस्वामी ने कुछ राजनीतिक नेताओं के साथ संबंधित व्यक्ति के कथित संपर्कों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ उसके संबंधों की जांच किए जाने की मांग की। ये आरोप कुमारस्वामी के बयान पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस दो दिन के भीतर उचित कार्रवाई नहीं करती है, तो वह अपना आंदोलन फिर शुरू कर सकते हैं। इससे मामले को लेकर राज्य में राजनीतिक टकराव और बढ़ने की आशंका है।
सिद्धारमैया को निशाना बनाने वाले कथित स्टिंग ऑपरेशन पर विवाद
इस पूरे विवाद का केंद्र पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को निशाना बनाने वाला कथित स्टिंग ऑपरेशन है। कुमारस्वामी ने मांग की है कि इस ऑपरेशन के पीछे कौन लोग थे, उनकी भूमिका क्या थी और उनके आपसी संपर्क किस प्रकार के थे, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में कुछ लोगों के जरिए उनका नाम जोड़ने की कोशिश की जा रही है। कुमारस्वामी के मुताबिक, संबंधित प्रकरण में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जिसे उन्होंने मीडिया से जुड़े व्यक्ति का सहायक बताया। उन्होंने कहा कि उस व्यक्ति के जरिए उन्हें मामले से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
कुमारस्वामी ने सवाल उठाया कि गिरफ्तार व्यक्ति के मुख्य आरोपी से क्या संबंध हैं और उसके संपर्कों की वास्तविक स्थिति क्या है। उन्होंने इन सभी पहलुओं की जांच की मांग की है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान, उस पर लगाए गए विशिष्ट आरोपों और जांच एजेंसियों के निष्कर्षों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इन दावों को जांच में साबित हुए तथ्यों के बजाय कुमारस्वामी के आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
गृह मंत्री प्रियंक खड़गे पर भी लगाए आरोप
कुमारस्वामी ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं की जा रही है और कुछ पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर प्रकरण को दबाने की कोशिश हो रही है।
ये आरोप राजनीतिक रूप से गंभीर हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी में इनके समर्थन में कोई स्वतंत्र जांच निष्कर्ष या आधिकारिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। गृह मंत्री और संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष भी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
कुमारस्वामी ने राज्य सरकार पर पुलिस और सरकारी तंत्र का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि मामले की जांच बिना राजनीतिक दबाव के होनी चाहिए, ताकि सभी संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
इस विवाद में आगे की स्थिति पुलिस की जांच, संबंधित पक्षों के जवाब और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। आरोपों की सत्यता तय करने के लिए निष्पक्ष जांच और आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
न्यायिक निगरानी में जांच की मांग
कुमारस्वामी ने कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले की जांच न्यायिक निगरानी में कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच जरूरी नहीं है, लेकिन किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में जांच होनी चाहिए।
इससे पहले उन्होंने राज्य सरकार को चुनौती दी थी कि यदि उनके या उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ कोई सबूत है, तो उनकी भी जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि जांच सभी संबंधित लोगों के लिए समान होनी चाहिए और किसी को राजनीतिक कारणों से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से सवाल करते हुए न्यायिक निगरानी में जांच कराने की मांग दोहराई। उन्होंने यह भी कहा कि वह जांच से डरने वाले नहीं हैं। उनके मुताबिक, यदि उनके पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से कोई गलत काम किए जाने के प्रमाण मिलते हैं, तो वे जांच में सहयोग करेंगे।
यह मांग मामले की जांच प्रक्रिया और उसकी निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। हालांकि, न्यायिक निगरानी में जांच कराए जाने के संबंध में कोई अंतिम सरकारी निर्णय उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।
दो दिन बाद आंदोलन फिर शुरू करने की चेतावनी
धरना समाप्त करते समय कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने पुलिस को कार्रवाई के लिए दो दिन का समय दिया है और कहा है कि इस अवधि में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए, तो वह फिर से आंदोलन शुरू करेंगे।
उनके इस फैसले से फिलहाल प्रदर्शन थम गया है, लेकिन विवाद का समाधान पुलिस की कार्रवाई और जांच की दिशा पर निर्भर करेगा। पुलिस आयुक्त से मुलाकात के बाद कुमारस्वामी ने आश्वासन मिलने की बात कही, जबकि मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, इस पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
जेडीएस नेताओं और कार्यकर्ताओं के इस प्रदर्शन ने कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर राज्य की राजनीति में बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में पुलिस की प्रतिक्रिया और जांच से जुड़ी जानकारी इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।
आगे की कार्रवाई पर टिकी नजर
कर्नाटक के इस विवाद में फिलहाल तीन प्रमुख मुद्दे सामने हैं—कथित स्टिंग ऑपरेशन के पीछे मौजूद लोगों की पहचान, संबंधित व्यक्तियों के संपर्कों की जांच और जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता। कुमारस्वामी ने इन सभी पहलुओं पर कार्रवाई की मांग की है और पुलिस को दो दिन की समयसीमा दी है।
हालांकि, किसी व्यक्ति या राजनीतिक पक्ष की जिम्मेदारी तय करने के लिए आरोपों से आगे बढ़कर साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों की जरूरत होगी। पुलिस की ओर से की जाने वाली कार्रवाई, संबंधित पक्षों का जवाब और जांच की प्रगति ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेंगे।









