ज्ञानेंद्र के शव से लिपटकर मां बोलीं-हमें छोड़कर क्यों चले गए'नीरज को 2 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि

कटिहार में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले तीन थाना प्रभारियों को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा और माहौल बेहद भावुक हो गया।
ज्ञानेंद्र के शव से लिपटकर मां बोलीं-हमें छोड़कर क्यों चले गए'नीरज को 2 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि
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बिहार के कटिहार में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले तीन थाना प्रभारियों को शुक्रवार को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। अंतिम संस्कार के दौरान ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया। एक ओर मां अपने बेटे ज्ञानेंद्र के शव से लिपटकर लगातार रोती रहीं और पूछती रहीं, "हमें छोड़कर क्यों चले गए?" वहीं दूसरी ओर नीरज के दो साल के बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी, जिसे देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं।

हादसे के बाद से ही तीनों पुलिस अधिकारियों के घरों में मातम पसरा हुआ है। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। स्थानीय लोगों, पुलिसकर्मियों और जनप्रतिनिधियों ने दिवंगत अधिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था और हर कोई इस दुखद घटना से स्तब्ध नजर आया।

अंतिम यात्रा के दौरान पूरे सम्मान के साथ तीनों अधिकारियों को विदाई दी गई। पुलिस बल ने सलामी दी और साथी अधिकारियों ने उनके कर्तव्यनिष्ठ जीवन को याद किया। लोगों का कहना था कि तीनों अधिकारी अपने व्यवहार और कार्यशैली के कारण इलाके में काफी लोकप्रिय थे।

ज्ञानेंद्र की मां बार-बार बेटे को याद कर बेहोश हो जा रही थीं। रिश्तेदार और आसपास के लोग उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे। वहीं नीरज के घर का माहौल भी बेहद गमगीन रहा। जब उनके दो साल के बेटे ने परिजनों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार की रस्म निभाई तो वहां मौजूद लोग अपनी भावनाएं नहीं रोक सके।

इस दुखद घटना ने पूरे पुलिस महकमे को शोक में डुबो दिया है। साथी पुलिसकर्मियों का कहना है कि तीनों अधिकारियों का जाना विभाग के लिए बड़ी क्षति है। वे हमेशा अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहे और आम लोगों की मदद के लिए तत्पर रहते थे।

अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की और परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य रखने की अपील की।

कटिहार में हुए इस भावुक अंतिम विदाई समारोह ने हर किसी को यह एहसास कराया कि वर्दी पहनने वाले अधिकारी सिर्फ कानून के रक्षक नहीं होते, बल्कि वे भी किसी के बेटे, पिता और परिवार की उम्मीद होते हैं। उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा।

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