केरल सरकार ने PSC भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सभी विभागों को तीन हफ्तों में खाली पद रिपोर्ट करना अनिवार्य किया गया है। आदेश का पालन न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
तिरवंतपुरम: केरल में सरकारी भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार ने सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने विभागों में खाली पदों की जानकारी तीन सप्ताह के भीतर केरल लोक सेवा आयोग (PSC) को अनिवार्य रूप से भेजें।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आदेश का पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस कदम को राज्य की भर्ती प्रणाली में लंबे समय से चली आ रही अनियमितताओं और देरी को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश
यह निर्देश केवल सरकारी विभागों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) पर भी लागू होगा। प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा जारी इस आदेश का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में खाली पदों की समय पर रिपोर्टिंग न होने से अस्थायी नियुक्तियों में वृद्धि हुई है, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब सरकार इस समस्या को संरचनात्मक सुधार के जरिए हल करना चाहती है।
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PSC पर बढ़ती जांच और विवाद
हाल के महीनों में केरल लोक सेवा आयोग (PSC) की चयन प्रक्रियाओं को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के बाद सरकार ने आंतरिक सतर्कता जांच (vigilance probe) शुरू की है। युवा मामलों के मंत्री ओ.जे. जनीश ने भी संकेत दिए हैं कि जांच की वर्तमान प्रगति से सरकार पूरी तरह संतुष्ट नहीं है और आगे व्यापक जांच की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
भर्ती घोटाले के आरोप और चयन प्रक्रिया पर सवाल
PSC द्वारा हाल ही में आयोजित रिसर्च ऑफिसर परीक्षा को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। उम्मीदवारों ने आरोप लगाया है कि परीक्षा का स्तर निर्धारित पोस्टग्रेजुएट योग्यता के अनुरूप नहीं था।
इसके अलावा, यह भी आरोप लगाया गया है कि उत्तर कुंजी (answer key) में बड़ी संख्या में प्रश्नों के लिए विकल्प ‘B’ को सही उत्तर के रूप में निर्धारित किया गया, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। उम्मीदवारों ने परीक्षा रद्द कर पुनः परीक्षा कराने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को शिकायत सौंपी है।
सरकार की सख्ती से बढ़ी उम्मीदें
सरकार के इस नए आदेश को प्रशासनिक सुधार की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे प्रभावी तरीके से लागू किया गया तो राज्य की भर्ती प्रणाली में बड़े सुधार देखने को मिल सकते हैं। इसके साथ ही यह भी माना जा रहा है कि सरकार PSC की कार्यप्रणाली पर व्यापक पुनरावलोकन की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता में सुधार होगा।
PSC की संरचना और मौजूदा स्थिति
केरल PSC में वर्तमान में अध्यक्ष सहित 15 सदस्य हैं। संविधान के अनुसार, PSC सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक होता है। फिलहाल आयोग में पांच पद खाली हैं, जिससे इसके संचालन पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव
यह मामला राज्य की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। सरकार और विपक्ष दोनों ही PSC की भूमिका और पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में प्रशासनिक सुधारों के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।








